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Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

Trip To London : 1

Trip To London
Trip To London: जानकर अजीब-सा लगता है ना? लेकिन यह हकीकत है। ऐसा नहीं है कि ऐसा मैंने नहीं देखा, बल्कि वास्तविकता में भी है। होते हैं, लेकिन पूर्व सूचना के आधार पर, निर्धारित जगह पर, निश्चित समय पर। चारों तरफ पुलिस घेरे रहेगी, हेलिकॉप्टर से निगरानी होगी, लेकिन हुड़दंगलीला न प्रदर्शनकारियों की चलेगी, न पुलिस की। यह और बात है कि फ्रांस में फुटबाल के दीवानों ने जो किया, उसने तो सारी हदें पार कर दी। लेकिन, ये अपवाद हैं। हां, कोई अकेला व्यक्ति भी सड़क के बीच के फुटपाथ जितने ऊंचे डिवाइडर पर तख्ती लेकर चुपचाप या कुछ बोलते हुए भी प्रदर्शन कर सकता है, जिसे पुलिस जवान अपने घेरे में रखेंगे, लेकिन करेंगे कुछ नहीं, जब तक कि वह कुछ गैर कानूनी हरकत न करे। कितना अटपटा लगता है ना?
 
लंदन की छोटी-छोटी लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हैं। हमारे इंदौर की तरह एक दिन छोड़कर पानी नहीं आता,न पानी के लिये टैंकर या बोरिंग के भरोसे हैं। वहां पानी 24 घंटे आता है और दो-तीन मंजिल तक आसानी से पहुंच जाए, इतना प्रेशर रहता है। सिंक के या बाथरूम के नल से लेकर पानी पी सकते हैं। आप यदि आशंकित हो तो आरओ या वाटर फिल्टर लगा सकते हो। फूड या किसी भी सामान की डिलेवरी के लिए ज्यादातर साइकिल, बैटरी साइकिल या कोई बाइक का उपयोग करता है। ये चौराहों पर सिग्नल जंप करते, लेफ्ट टर्न से राइट जाते हुए कभी नहीं दिखेंगे। वहां एटीएम के काउंटर के अलग कैबिन नहीं, बल्कि किसी भी भवन की दीवार में फिट रहते हैं, जिन्हें तोड़कर कैश लूटने की संभावना न्यूनतम होती है।
 
सड़क, मोहल्ले, मेट्रो, सिटी बस, मॉल, रेस्टारेंट या बगीचे में कुत्ते नजर आएंगे, लेकिन वे स्ट्रीट डॉग नहीं होते, बल्कि पालतू होते हैं। मालिक हाथ या बैग में पोट्‌टी पॉलिथिन लेकर चलता है। चूंकि सभी फुटपाथ पर चलते हैं तो कहीं-कहीं टकराने जैसी नौबत आए तो तत्काल वे रुककर सामने वाले को संकेत दे देते हैं। किसी को जल्दी हो तो एक्सक्यूज मी कहकर रास्ता मांगेंगे। अरे भिया, जरा छेटी होना-ऐसा नहीं बोलते। यह शिष्टाचार जबरदस्त है। एक दिन में बीसियों बार ऐसा मौका आता है। इंदौर में तो हम फुटपाथ पर चलते नहीं और चलें तो टक्कर देकर निकल जाएं।
 
हर छोटी-बड़ी दुकान, मॉल, शॉपिंग सेंटर, रेस्टारेंट हो, ज्यादातर जगह नो कैश के बोर्ड टंगे होते हैं। हम भारतीयों की मुश्किल हो जाती है, जो रुपए के बदले पाउंड ले जाने की याद तो रखते हैं, लेकिन क्रेडिट, डेबिट कार्ड नहीं रखते। वे 90 प्रतिशत तक कैशलेस इकॉनॉमी को अपना चुके हैं। मेट्रो, सिटी बस, कार टैक्सी, शॉपिंग सभी कुछ कार्ड से। इसलिए भारत से कोई जा रहा हो तो ट्रेवल एजेंट आपको यहां पर एक कार्ड दे देगा, जो विदेश में कहीं भी भुगतान के काम आएगा। इसमें फायदा यह भी है कि वहां बैलेंस खत्म होने पर एजेंट को फोन करने पर वह यहां से रकम उसमें डिपॉजिट कर सकता है या आपका कोई रिश्तेदार भी जमा कर सकता है।
Trip To London
भारतीय वैसे तो कोशिश करते हैं कि खाने का कुछ सामान यहां से ले जाएं। जैसे थेपले, खाखरे, दूध के पराठे, नमकीन, अचार, जीरावन, रेडी टू इट वाले सब्जियों के पैकेट, रेडिमेड चाय-कॉफी के पाउच आदि। वहां कोई भी सामग्री इसलिए बजट के बाहर हो जाती है कि एक पाउंड 125 से 130 रुपए का होता है। तब आप दिमाग लगाते हैं कि पौने दो पाउंड की चाय 450 में और मसाला डोसा 1300 रुपए का आता है। तब आप अनावश्यक रूप से खाने-पीने से बचते हैं, जो कि गलत होता है। पानी की बोतल ही 80 रुपए की आती है। इस गणित से आप विदेश में कहीं घूम नहीं सकते। खासकर, यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, रूस या किसी भी विकसित पश्चिमी देश में।
 
अब एक चलन और बढ रहा है कि यदि 4-6 लोग या परिवार जा रहा है तो वे होटल की बजाय अपार्टमेंट में रुकना पसंद करते हैं। वह एक, दो, तीन बेडरूम का मिल जाता है, जिसमें 6-7 व्यक्ति रुक सकते हैं। वहां खाना बनाने की सामग्री के अलावा सब मिलेगा। जैसे, गैस, इलेक्ट्रिक चूल्हा, इंडक्शन, हॉट वाटर पॉट, क्रॉकरी, रसोई बनाने के नॉन स्टीक कूकवेयर, फ्रीज, माइक्रोवेव ओवन, कॉफी मशीन, वॉशिंग मशीन वगैरह सब कुछ। बाथरूम के लिए पर्याप्त टॉवेल, नेपकीन, टॉयलेट पेपर, सोप भी। बस कहीं-कहीं एक बड़ी गड़बड़ होती है- न तो बेडरूम में अंदर से चिटकनी या लॉक होता है, न बाथरूम में कपड़े टांगने की खूंटी। और तो और टॉयलेट के साथ हैंड शॉवर भी नहीं होता, न ही मग होता है। टॉयलेट पेपर से ही सफाई करना होता है। ये अपार्टमेंट होटल से सस्ते पड़ते हैं और पसंद का खाना मिल जाता है। दाल, चावल, आटा, मसाले, सब्जियां वगैरह वहां आसानी से मिलता है।
 
आज जब भारत में पोस्टल सर्विस काफी कमजोर हो चुकी है, ब्रिटेन में रॉयल पोस्ट काफी लोकप्रिय और प्रामाणिक है। वहां बहुतायत से लाल रंग के लैटर बॉक्स भी मिलेंगे और रॉयल पोस्ट की वैन कूरियर सेवा के तहत घर पहुंच सेवा भी देती है। जिसके तहत आप भारत के निजी कूरियर वाले की तरह कोई भी छोटा-बड़ा सामान कहीं भी भेज सकते हैं। (क्रमश:) 
-लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। 
 
लेखक के बारे में
रमण रावल
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