अजेय 'कर्म' योगी आदित्यनाथ
मठ से मुख्‍यमंत्री तक

एक संन्यासी जिसने यूपी ही नहीं देश की राजनीति को भी नए तरीके से परिभाषित किया, साबित किया कि धर्म आधारित राजनीति भी जन केंद्रित हो सकती है

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

वर्ष 2017 में जब एक लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत मिला तो 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर, आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े और राजनीति के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील सूबे के मुखिया का दायित्व संभाला। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने पीठ की लोककल्याण की परंपरा और संस्कार के फलक को अपने पद के अनुसार लगातार विस्तार दिया। उन्होंने साबित किया कि जनकेंद्रित राजनीति के केंद्र में भी धर्म हो सकता है। उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के समय में जिस ‘हिंदू और हिंदुत्व’ को प्रतिगामी माना जाता था उसे योगी ने बहस के केंद्र में ला दिया।

इस तरह उन्होंने धर्म और राजनीति को लोक कल्याण का जरिया बनाकर साबित किया कि संत, समाज का वैचारिक मार्गदर्शन करने के साथ सत्ता का कुशलता से नेतृत्व भी कर सकता है। यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के खाते में ढेर सारी उपलब्धियां दर्ज हैं। 2019 में एक प्रतिष्ठित पत्रिका के सर्वे में उनको देश का सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री माना गया। यूपी में लगातार सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड भी योगी के नाम दर्ज है।

Yogi Aadityanath

सबसे कम उम्र के सांसद

योगी आदित्यनाथ ने 1998 से 2017 तक लगातार गोरखपुर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया, जबकि फिलहाल वह गोरखपुर शहर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब वह पहली बार सांसद बने तो सबसे कम उम्र के सांसद थे। अपने समय में वह देश के उन चुनिंदा सांसदों में थे जो सर्वाधिक सत्र अटेंड करते थे। कुछ साल पूर्व फेम इंडिया ने एक सर्वे में उनको प्रधानमंत्री के बाद देश के सर्वाधिक लोकप्रिय लोगों में रखा। इसके पहले भी इंडिया टूडे ने अपने सर्वे में उनको देश के सबसे रसूखदार लोगों में शामिल किया था।

चुनौतियों को अवसर में बदला

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी में लगभग हर क्षेत्र में रिकार्ड बने हैं। दरअसल वह विजनरी हैं। अपने विजन को अमली जामा पहनाने के लिए वह दिन-रात मेहनत करते हैं। उनकी डिक्शनरी में ना नाम का शब्द है ही नहीं। लिहाजा वह हर चुनौती को अवसर मानते हैं। और चुनौती मिलते ही उसे अवसर में बदलने के लिए पूरी ताकत और जी-जान से जुट जाते हैं। कोरोना का अभूतपूर्व संकट भी इसका अपवाद नहीं रहा। उनके लिए राजधर्म और पीठ की परंपरा के अनुसार लोककल्याण सर्वोपरि रहा है। कोविडकाल में अपने पिता के अंतिम संस्कार में जाने के बजाय प्रदेश की 23 करोड़ जनता की सेवा को तरजीह देकर उन्होंने राजधर्म की मिसाल कायम की। साथ ही लोककल्याण की पीठ की परंपरा क्या है, इसे भी साबित किया। जिसके बारे में वह अक्सर कहते रहे कि पीठ से जुड़े पीठाधीश्वरों ने मोक्ष की जगह हरदम लोककल्याण को प्राथमिकता दी।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

कई मिथकों को भी तोड़ा

योगी जी से लेकर उनके गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ का जीवन इसकी नजीर है। लोकल्याण से जुड़े मुद्दे स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज के सबसे वंचित तबके वनटांगिया, मुसहर, थारू और घुमंतू जातियों के हित में किए गए काम इसके प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद पद के अनुसार बढ़े फलक के अनुरूप पीठ की परंपरा के अनुसार लोककल्याण का यह काम पूरी शिद्दत से जारी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद लगभग हर क्षेत्र में बने रिकॉर्ड इसे साबित करते हैं। योगी आदित्यनाथ मिथक तोड़ने में भी यकीन रखते हैं। कई बार नोएडा जाकर उन्होंने इसे साबित किया। दरअसल, नोएडा को लेकर राजनेताओं में एक पुराना अंधविश्वास रहा है, जिसे 'नोएडा जिंक्स' कहा जाता था। इस मान्यता के अनुसार, अगर कोई मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान नोएडा का दौरा करता है, तो वह अगली बार सत्ता में नहीं आ पाता।

राम मंदिर और गोवंश से लगाव

इसी तरह जिस अयोध्या और राम मंदिर के नाम मात्र से पूर्व के तमाम मुख्यमंत्रियों को करंट लगता था, उससे उन्होंने अपना लगाव पूर्ववत ही जारी रखा। पर्यावरण और प्रकृति के प्रति उनका प्रेम अद्भुत है। उनके इस प्रेम का विस्तार बच्चों, बेजुबानों खासकर गोवंश के प्रति दिखता है। यही वजह है कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदेश की हरीतिमा बढ़ाने के लिए उनके निर्देश पर हर साल रिकॉर्ड पौधा रोपण होता है। गोरखपुर स्थित गोरखनाथ का करीब 52 एकड़ का हरा भरा और साफ सुथरा परिसर भी योगी के पर्यावरण प्रेम का उदाहरण है। गोरखनाथ मंदिर में भी देशी गोवंश की एक समृद्ध गोशाला है।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

मजबूत हुई यूपी की पहचान

पहले कार्यकाल में योगी का फोकस प्रदेश के बाबत देश-दुनिया में जो खराब परसेप्शन था, उसको बदलने का था। इसमें कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियां कारगर रहीं। दूसरे कार्यकाल में फोकस प्रदेश की पहचान बदलने पर रहा। यूपी अब नए भारत के नए उत्तर प्रदेश के रूप में सबके सामने है। आज उत्तर प्रदेश की पहचान एक अपराधग्रस्त या दंगाग्रस्त प्रदेश के रूप में नहीं है। आज देश के अंदर यूपी बेहतर कानून व्यवस्था के रूप में जाना जाता है और अलग-अलग राज्यों में उत्तर प्रदेश के मॉडल को उतारने और उसको जानने की उत्सुकता भी रहती है।

सातवीं से दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

बीते 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश की सातवीं से दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के बाद अब लक्ष्य विकास के हर मानक पर नम्बर एक होने की है। नोएडा में फिल्म सिटी, डेटा पार्क, अयोध्या और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हेल्थपार्क, लेदर पार्क, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल का विस्तार, रैपिड रेल विस्तार, ओडीओपी और एमएसएमई के जरिए निर्यात को दोगुना करने, ब्रांड उप्र को देश और दुनिया में स्थापित करने जैसे बहुआयामी कार्यक्रमों से उत्तर प्रदेश के विकास को और रफ्तार देने की तैयारी है। प्रयागराज के महाकुंभ के रूप में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम के सफल आयोजन ने उनकी लोकप्रियता में चार चांद लगा दिया।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

राजनीति में अब तक अजेय रहे हैं योगी

नाथपंथ में दीक्षित होने के पहले योगी आदित्यनाथ का नाम अजय था। दीक्षा के बाद नाम तो बदल गया, पर पुराने नाम 'अजय' के अनुरूप योगीजी 1998 में जबसे राजनीति में आए अजेय ही रहे हैं। उन्होंने कभी खुद किसी इंटरव्यू में कहा था, 'मैं कभी हारा नहीं'। गोरखपुर से संसदीय चुनावों में वह अजेय रहे हैं तो पहली बार 2022 में विधानसभा चुनाव लड़कर उन्होंने अपनी अपराजेय लोकप्रियता को पुनः प्रमाणित किया।

Yogi Aadityanath

संत धर्म और राज धर्म का अद्भुत समन्वय

संत के रूप में लोक कल्याण के कार्य

'परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर'। अर्थात साधु-संत परमार्थ एवं लोक कल्याण के लिए ही शरीर धारण करते हैं। यह पंक्ति योगी आदित्यनाथ पर सटीक बैठती है। उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में न सिर्फ नाथ परंपरा को आगे बढ़ाया है, बल्कि वे सदियों पुरानी परंपराओं और संस्कारों का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं, जिसमें पूजा-पाठ, साधना और योग को प्राथमिकता देना शामिल है। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों का नेतृत्व वे वर्षों से करते आ रहे हैं। गोरखनाथ मंदिर का मकर संक्रांति पर लगने वाला खिचड़ी मेला काफी प्रसिद्ध है। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक मुफ्त या कम लागत पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने का कार्य भी मठ द्वारा किया जा रहा है। योगी सनातन धर्म के मूल्यों के प्रचार के साथ ही वह धर्मांतरण के खिलाफ मुखर रहे हैं और 'घर वापसी' के कार्यक्रमों के माध्यम से सुर्खियों में रहे हैं। योगी आदित्यनाथ एक संत होने के बावजूद, राजधर्म और संत धर्म का साथ-साथ पालन करने के लिए जाने जाते हैं।

Yogi Aadityanath

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद

गोरक्षपीठ के संरक्षण में कई शैक्षणिक संस्थाएं (स्कूल, कॉलेज) चलती हैं। एक संत और महंत के रूप में उन्होंने इन संस्थानों के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के कार्य को बढ़ावा दिया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराण प्रताप से कितने प्रभावित थे, इसका सबूत 1932 में उनके द्वारा स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद है। इस परिषद का नाम महाराणा प्रताप रखने के पीछे यही मकसद था कि इसमें पढ़ने वाल विद्यार्थियों में भी देश के प्रति वही जज्बा, जुनून और संस्कार पनपे जो प्रताप में था। इस संस्था का संचालन गोरक्षपीठ द्वारा ‍ही किया जाता है।

Yogi Aadityanath

संस्कृत और संस्कृति का उन्नयन

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत और संस्कृति के उन्नयन की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। योगी सरकार ने संस्कृत को राज्य की दूसरी राजभाषा के रूप में मान्यता देने की दिशा में गंभीर प्रयास किए हैं, जिसका उद्देश्य सरकारी कामकाज और सार्वजनिक जीवन में इसके उपयोग को बढ़ाना है। संस्कृत विद्यालयों और मदरसों में संस्कृत शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया, ताकि छात्रों को योग्य शिक्षक मिल सकें। संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान करने पर भी जोर दिया गया। संस्कृत विद्यालयों में बुनियादी ढांचे में सुधार, जैसे कि फर्नीचर, पुस्तकालय और कंप्यूटर लैब की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। सरकारी आयोजनों और प्रशासनिक कार्यों में संस्कृत के श्लोकों और मंत्रों के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया।

संस्कृति और परंपरा के लिए भी योगी सरकार प्रमुखता से कार्य कर रही है। स्थानीय लोक कलाओं, जैसे कि रामलीला, कृष्ण लीला और कठपुतली कला को प्रोत्साहित करने के लिए मंच और वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अयोध्या की हर साल होने वाली रामलीला है। 2025 में अयोध्या की रामलीला को 50 से अधिक देशों के 62 करोड़ से ज्यादा लोगों ने विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से देखा। होली, दीपावली, कुंभ मेला (प्रयागराज) जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक मेलों को भव्य और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने पर जोर दिया गया, जिससे इन आयोजनों की वैश्विक पहचान बढ़ी। 2025 में रिकॉर्ड 66 करोड़ लोगों ने प्रयागराज महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाई। अयोध्या का दीपोत्सव तो हर वर्ष नया कीर्तिमान रच रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से इस क्षेत्र के मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों का पुनरुद्धार और विकास आदि कार्य योगी सरकार द्वारा प्रमुखता से किए जा रहे हैं।

योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के लिए प्रयागराज कुंभ 2025 एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि रही, जिसने सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था के उच्च मानक स्थापित किए। सनातन आस्था के इस महाकुंभ में 66 करोड़ से ज्यादा श्रद्‍धालुओं ने भागीदारी की। 45 दिन (13 जनवरी : पौष पूर्णिमा से 26 फरवरी : महाशिवरात्रि) तक चले इस महाकुंभ में 73 देशों के 50 लाख से ज्यादा विदेशी श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया। करीब 50 हजार कर्मियों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। प्रयागराज महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुशासन, विकास और सांस्कृतिक गौरव की एक विराट उपलब्धि रही।

Yogi Aadityanath

सरकार ने इस आयोजन को दिव्य और भव्य बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।

सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में, यह कुंभ एक मिसाल बन गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए AI-आधारित कैमरों, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और मल्टी-लैंग्वेज साइनबोर्ड का उपयोग किया गया। 'ग्रीन कुंभ' की पहल के तहत लाखों पौधे लगाकर इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया। योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि पारदर्शिता और सुगमता रही है। इस महाकुंभ ने न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दी बल्कि इसने दुनिया को भारत के सक्षम प्रबंधन और सनातन मूल्यों की शक्ति का अनुभव कराया।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

दृढ़ और निर्णायक प्रशासक

यूपी के मुखिया के रूप में योगी की कार्यशैली से परिलक्षित होता है कि वे बहुत ही दृढ़ और निर्णायक प्रशासक हैं। उनकी सख्त छवि ने राज्य की कानून व्यवस्था को नई दिशा दी है। योगी राज में 250 से ज्यादा अपराधियों का एनकाउंटर हो चुका है। अब लोगों में गुंडों का खौफ नहीं बल्कि योगी सरकार से गुंडे कांपते हैं। 2022 के चुनाव परिणाम के बाद थानों पर सरेंडर के लिए लगी गुंडों की लाइन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। जो महिलाएं 2017 से पहले सूरज डूबने के बाद घर से निकलने में डरती थीं, वे आज भयभुक्त हैं। एक समय यूपी में जिन अपराधियों और सरगनाओं का सिक्का चलता था, वे अब अतीत में गुम हो गए हैं। सीएम योगी ने एक बार खुद कहा था- 2017 में सरकार बनने के बाद परसेप्शन बदलने का संकल्प लिया। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था बेहतर हुई। पहले 6 दिसंबर को कर्फ्यू जैसा वातावरण नजर आता था, लेकिन वर्तमान समय में ना कहीं दंगा है, ना अशांति। मुख्यमंत्री ने खुद एक नारा दिया है- ना कर्फ्यू, ना दंगा, यूपी में सब चंगा।

जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले संगठित भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। सरकार ने 'ऑपरेशन नेस्तनाबूद' के तहत माफिया और बड़े अपराधियों की अवैध संपत्तियों को जब्त करने या ध्वस्त करने का अभियान चलाया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हजारों करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त की गई है, जिसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति के नेटवर्क को तोड़ना है। बड़े पैमाने पर अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई, जिससे उनकी आर्थिक रीढ़ टूट गई।

Yogi Aadityanath

संवेदनशील व्यक्तित्व

सख्त कार्यशैली के बावजूद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत ही संवेदनशील व्यक्ति हैं। लखनऊ का सीएम आवास हो या फिर गोरक्षपीठ का परिसर, उनका 'जनता दर्शन' कार्यक्रम यूपी के लोगों में काफी लोकप्रिय है। वे इस कार्यक्रम में बेझिझक अपनी समस्याएं मुख्‍यमंत्री योगी से साझा करते हैं। खास बात तो यह है कि अपने मुख्‍यमंत्री से मिलने के लिए लोगों को लाइन नहीं लगानी पड़ती। योगी स्वयं चलकर पीड़ितों के पास जाते हैं और तत्काल उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए आदेश भी जारी करते हैं। वे हर महीने हजारों लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके निराकरण के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित करते हैं। इससे जाहिर है कि यूपी के लोगों में उनके प्रति कितना भरोसा है।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

एक जन नेता के रूप में उभरे योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक शैली की पहचान उनके द्वारा अपनाए गए फील्ड विजिट, जन-संवाद और उत्तरदायित्वपूर्ण प्रशासन के सिद्धांतों से होती है। इन तीनों ही सिद्धांतों ने उनके कार्यकाल में शासन के तरीके को परिभाषित किया है। वे अक्सर विकास परियोजनाओं, अस्पतालों, थानों और गो-आश्रय स्थलों का अचानक निरीक्षण करते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं और निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ और समय पर पूरे हो रहे हैं। इतना ही नहीं वह मौके पर ही जरूरी निर्णय लेते हैं और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए निर्देश देते हैं, जिससे लालफीताशाही कम होती है। फील्ड विजिट के माध्यम से योगी अपनी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की प्रगति की सीधी निगरानी करते हैं। मुख्यमंत्री सार्वजनिक रैलियों, कार्यक्रमों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे लाभार्थियों (जैसे आवास योजना, किसान सम्मान निधि) से संवाद करते हैं, जिससे योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता आती है। यही कारण है कि मुख्‍यमंत्री योगी की लोकप्रियता अब सिर्फ यूपी तक सीमित न रहकर दूसरे राज्यों तक पहुंच गई है। वहां भी लोग चाहते हैं कि उनका मुख्‍यमंत्री भी योगी जैसा होना चाहिए।

कुशल प्रबंधक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक क्षमता की मुख्य पहचान त्वरित निर्णय लेने, सतत मॉनिटरिंग और बड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। यह क्षमता विशेष रूप से तब दिखाई दी जब उन्होंने यूपी जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण राज्य में वर्षों से लंबित परियोजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को गति दी। सत्ता में आते ही उन्होंने संगठित अपराध और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। बिना किसी देरी के एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया और दशकों से लंबित अवैध कब्जों को हटाने का कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह फैसले राजनीतिक जोखिमों की परवाह किए बिना तत्काल लिए। कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान अन्य राज्यों की तुलना में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और टेस्टिंग सुविधाओं को तेजी से बढ़ाने का निर्णय लिया। प्रवासी श्रमिकों के लिए त्वरित व्यवस्था, बड़ी संख्या में टेस्टिंग और ट्रेसिंग की क्षमता का विकास, जिसने महामारी के शुरुआती प्रसार को रोकने में मदद की।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

विकासोन्मुख सोच

मुख्यमंत्री योगी की दृष्टि 'नया उत्तर प्रदेश' बनाने पर केंद्रित है, जो आधुनिक, आत्मनिर्भर, सुरक्षित और विकसित हो। यह दृष्टि पांच प्रमुख स्तंभों पर टिकी हुई है, जिसमें बुनियादी ढांचा, निवेश, उद्यमशीलता, युवा शक्ति और राज्य की एक आधुनिक छवि शामिल है। उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी आदि पर खास ध्यान दिया है। एयर कनेक्टिविटी के लिए नोएडा/जेवर, अयोध्या, कुशीनगर, लखनऊ, वाराणसी को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‍डों के रूप में विकसित किया। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से राज्य को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ा गया। राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन तक ले जाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समि‍ट के माध्यम से रिकॉर्ड तोड़ प्रस्तावों को आकर्षित किया गया। योगी सरकार युवाओं का भी विशेष ध्यान रख रही है। प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के लिए सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। युवाओं को कौशल विकास की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। दरअसल, योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य यूपी को भारत की वृद्धि का 'ग्रोथ इंजन' बनाना है।

Yogi Aadityanath

योगी मॉडल जो बना नजीर

मिशन शक्ति

योगी सरकार ने मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। यह महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को समर्पित एक व्यापक अभियान है। महिला पुलिस बीट, एंटी-रोमियो स्क्वॉड की सक्रियता और यूपी 112 के माध्यम से पुलिस त्वरित प्रतिक्रिया देती है। एंटी-रोमियो स्क्वॉड के योगी मॉडल को तो बिहार सरकार ने भी अपनाया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके माध्यम से उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़कर छोटे व्यवसायों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। कन्या सुमंगला योजना के तहत सरकार जन्म से लेकर स्नातक तक की शिक्षा के विभिन्न चरणों में बालिकाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

गोवंश का संरक्षण

योगी का गोवंश के प्रति प्रेम काफी पुराना है। गोरक्षपीठ में भी गोशाला बनी हुई है। योगी सरकार ने निराश्रित गोवंश के लिए विशेष योजना शुरू की। यदि कोई किसान या व्यक्ति किसी बेसहारा गाय को सरकारी गो आश्रय स्थल से लेता है और उसकी देखभाल करता है, तो सरकार उसे 30 रुपए प्रति गाय प्रति दिन की दर से आर्थिक सहायता प्रदान करती है। राज्य के सभी जिलों और ब्लॉकों में बड़े पैमाने पर अस्थायी और स्थायी गो-आश्रय स्थलों का निर्माण कराया गया है ताकि सड़कों पर घूम रहे पशुओं को आश्रय दिया जा सके। देसी नस्ल के गोवंश को बढ़ावा देने और उनकी नस्ल सुधारने के लिए कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। जब योगी गोरखपुर में होते हैं तब वे पूजा-अर्चना के बाद सबसे पहले मंदिर परिसर में बनी गोशाला में जाते हैं। वे स्वयं अपने हाथों से गायों को गुड़, चना, हरी घास आदि खिलाते हैं और उनकी देखभाल का निरीक्षण भी करते हैं। जानकारी के मुताबिक योगी गायों को उनके नामों से पुकारते हैं।

Yogi Aadityanath

गरीब बेटियों का विवाह

इस योजना के तहत सरकार सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करती है और प्रत्येक जोड़े को आर्थिक सहायता, उपहार और विवाह की सामग्री प्रदान की जाती है। इस योजना में सभी वर्गों के गरीब परिवारों की बेटियों को शामिल किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य गरीब, निराश्रित और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत प्रति जोड़ा एक लाख रुपए की सहायता दिए जाने का प्रावधान है। इसमें कन्या के दाम्पत्य जीवन में खुशहाली एवं गृहस्थी की स्थापना के लिए सहायता राशि 60 हजार रुपये कन्या के खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।

आकांक्षात्मक विकास खंड

योगी सरकार ने आकांक्षात्मक विकास खंड कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य राज्य के उन ब्लॉकों पर ध्यान केंद्रित करना है, जो सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं और जिन्हें विकास की आवश्यकता है। इस योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विकास खंडों को 20 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

एक जिला एक उत्पाद (ODOP)

ODOP योजना यूपी के सभी 75 जिलों के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने, स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने और राज्य में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई। इस योजना से स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्पों को बढ़ावा मिला, जो कि राज्य की समृद्ध लोक-संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।

Yogi Aadityanath

एक जिला एक मेडिकल कॉलेज

यूपी में एक जिला एक मेडिकल कॉलेज योजना के तहत निकट भविष्य में सभी 75 जिलों में एक-एक मेडिकल कॉलेज संचालित करने का सरकार का लक्ष्य है। 2017 के बाद 42 नए मेडिकल कॉलेज खुल चुके हैं। इनमें 44 सरकारी हैं और 36 निजी मेडिकल कॉलेज हैं। 2017 से पहले राज्य में कुल 42 मेडिकल कॉलेज थे, इनमें सरकारी सिर्फ 17 थे। जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को अपने ही जिल में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।

बीसी सखी योजना

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए योगी सरकार ने बीसी सखी (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट सखी) योजना शुरू की। इस योजना के तहत बीसी सखी ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती हैं, जैसे पैसे जमा करना, निकालना, नए खाते खोलना, सरकारी योजनाओं का पैसा पहुंचाना और डिजिटल लेनदेन के बारे में ग्रामीणों को शिक्षित करना, जिससे बैंक की दूरी कम होती है और महिलाओं को सशक्तिकरण मिलता है।

Yogi Aadityanath

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

इस सयोजना के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक तक की शिक्षा के विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत लड़कियों को कुल 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है साथ ही इससे लिंगानुपान को सुधारने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना

इस योजना का दायरा काफी विस्तृत है। यहां से मिलने वाली कोचिंग सिर्फ यूपीपीसीएस तक सीमित नहीं है, बल्कि यूपीएससी, अधीनस्थ सेवाएं, विभिन्न भर्ती बोर्ड, बैंकिंग, एसएससी, अर्धसैनिक बल, जेईई, नीट, एनडीए, सीडीएस, बीएड, टीईटी जैसी लगभग हर प्रमुख परीक्षा इसमें शामिल है। राज्य के 150 अभ्युदय कोचिंग सेंटर में इस साल अब तक 23801 अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इनमें सिविल सर्विसेस के लिए 8663, NEET के लिए 5574, JEE के लिए 2018, एनडीए/सीडीएस के लिए 801 और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 6745 छात्र शामिल हैं।

Yogi Aadityanath

मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)

इस योजना के तहत उन गरीब परिवारों को पक्का आवास प्रदान किया जाता है जो केंद्र की प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभान्वित नहीं हो पाए। इसमें आपदा प्रभावित और वंचित वर्ग के लोग भी शामिल हैं। यह योजना विशेष रूप से वनटांगिया ग्रामों के निवासियों, मुसहर जाति के लोगों, कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों और जापानी इन्सेफेलाइटिस या तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम से प्रभावित परिवारों पर केंद्रित है। इस योजना में मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को 1 लाख 20 हजार रुपए की सहायता प्रदान की जाती है, जबकि पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 1 लाख 30 हजार रुपए की मदद दी जाती है।

मुख्यमंत्री किसान सर्वहित बीमा योजना

राज्य के किसानों और उनके परिवार को दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना। वर्तमान में यह योजना आयुष्मान भारत के साथ एकीकृत हो गई है, लेकिन पहले यह राज्य की विशिष्ट योजना थी।

ई वाउचर योजना

यह योजना राज्य सरकार की कौशल विकास पहल के तहत आती है, जिसका उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों को लाभ पहुंचाना है। इसमें विभिन्न 18 ट्रेडों के कारीगर और शिल्पकार शामिल हैं (जैसे बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, मूर्तिकार आदि)। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को टूलकिट खरीदने के लिए 15,000 रुपए का ई-वाउचर दिया जाता है। हालांकि लाभार्थी को पहले योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करना होता है।

कृषक और कृषि हितैषी सरकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार, किसानों की आय दोगुनी करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लघु और सीमांत किसानों का एक लाख रुपए तक का कृषि ऋण माफ किया। सरकार ने गेहूं और धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर रिकॉर्ड तोड़ खरीद की। इतना ही नहीं किसानों को सस्ती दर पर बिजली प्रदान करने और निजी नलकूपों के लिए विद्युत कनेक्शन देने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया। जानकारी के मुताबिक राज्य की कृषि विकास दर 2016-17 में 8.6% थी, जो 2024-25 में बढ़कर 17.7% तक पहुंच गई। यह वृद्धि 'बीज से बाज़ार तक' एकीकृत कृषि मॉडल की सफलता की कहानी कह रही है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि यूपी सरकार कृषि क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करने पर केंद्रित है।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

औद्योगिक वृद्धि दर

यूपी की औद्योगिक वृद्धि दर में वर्ष 2017 के बाद नीतिगत बदलाव और प्रशासनिक सुधारों के कारण एक स्पष्ट बदलाव देखा गया है। ODOP, निवेश प्रोत्साहन नीति-2022 और सिंगल विंडो सिस्टम पर केंद्रित, लक्षित नीतियों के कारण इसमें लगातार वृद्धि देखने को मिली। सकल मूल्य संवर्धन 25.03 फीसदी रहा, जो कि अखिल भारतीय औसत (11.9%) से दोगुने से भी ज्यादा है। इस मामले में यूपी को देश में शीर्ष स्तर पर है। 2022-23 से 2023-24 में कारखानों की संख्या में वृद्धि 15.91 फीसदी रही, जो कि राष्ट्रीय औसत (2.7%) से लगभग 7 गुना अधिक है। दरअसल, इस सबके पीछे योगी सरकार द्वारा सुरक्षित माहौल उपलब्ध करवाना है। इसके चलते राज्य में काफी निवेश आया।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

गुरु महंत अवेद्यनाथ से संपर्क

बाल्यकाल से राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित अजय सिंह बिष्ट का जुड़ाव नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन से हो गया। इसी दौरान वह मंदिर आंदोलन के शीर्षस्थ नायकों में शुमार गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के संपर्क में आए। महंत जी के सानिध्य और उनसे प्राप्त नाथपंथ के बारे में मिले ज्ञान ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि गढ़वाल विश्वविद्यालय से स्नातक (विज्ञान) तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने संन्यास लेने का निर्णय कर लिया। इसी क्रम में वह 1993 में गोरखनाथ मंदिर आ गए और नाथ पंथ की परंपरा के अनुरूप धर्म, अध्यात्म की तात्विक विवेचना और योग साधना में रम गए।

उनकी साधना और अंतर्निहित प्रतिभा को देख महंत अवेद्यनाथ ने उन्हें 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में दीक्षा प्रदान की। उस समय उनकी उम्र महज 22 साल थी। गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने पीठ की लोक कल्याण और सामाजिक समरसता के ध्येय को सदैव विस्तारित किया। उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तर प्रदेश अब उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ था। उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट वन विभाग में रेंजर थे। माता सावित्री देवी सामान्य गृहिणी थीं।

सितंबर 2014 में बने गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर

महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के उपरांत वह 14 सितंबर 2014 को गोरक्षपीठाधीश्वर (महंत) के रूप में पदासीन हुए। इसी भूमिका के साथ ही वह इसी तिथि से अखिल भारतीय बारह भेष पंथ योगी सभा के अध्यक्ष भी हैं। अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में योगी ने कहा भी था, ‘गुरुदेव के सम्मोहन ने संन्यासी बना दिया।’ दोनों का एक दूसरे पर अटूट भरोसा था। यही वजह रही कि पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में धार्मिक विरासत सौंपने के कुछ साल बाद ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने अपने प्रिय शिष्य (योगी) को अपनी राजनीतिक विरासत भी सौंप दी।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

जंगे आजादी में भी थी गोरक्षपीठ की महत्वपूर्ण भूमिका

जंगे आजादी जब चरम पर थी, तब योगी आदित्यनाथ के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर थे। वह मेवाड़ के ठिकाना कांकरवा में पैदा हुए थे। पर, 5 साल की उम्र में गोरखपुर आए तो यहीं के होकर रह गए। यकीनन देश भक्ति का जोश, जज्बा और जुनून उनको मेवाड़ की उसी माटी से मिली थी जहां के राणा प्रताप ने अपने समय के सबसे ताकतवर मुगल सम्राट के आगे तमाम दुश्वारियों के बावजूद घुटने नहीं टेके। प्रताप का संघर्ष उनकी विरासत में शामिल तो था ही, किशोरवय होते दिग्विजयनाथ पर आजादी को लेकर महात्मा गांधी के आंदोलन का भी काफी प्रभाव था। नतीजा दिग्विजयनाथ भी जंगे आजादी में कूद पड़े। उन्होंने जंगे आजादी के लिए जारी क्रांतिकारी आंदोलन और गांधीजी के नेतृत्व में जारी शांतिपूर्ण सत्याग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक ओर जहां उन्होंने समकालीन क्रांतिकारियों को संरक्षण, आर्थिक मदद और अस्त्र-शस्त्र मुहैया कराया, वहीं गांधीजी के आह्वान वाले असहयोग आंदोलन के लिए स्कूल का परित्याग कर दिया। स्वतंत्रता संग्राम के दोनों तरीकों में शामिल रहने का उनका एकमात्र उद्देश्य था कि चाहे जैसे मिले पर देश को आजादी मिलनी चाहिए।

चौरीचौरा जनक्रांति (चार फरवरी 1922) के करीब साल भर पहले आठ फरवरी 1921 को जब गांधीजी का पहली बार गोरखपुर आगमन हुआ था, वह रेलवे स्टेशन पर उनके स्वागत और सभा स्थल पर व्यवस्था के लिए अपनी टोली स्वयंसेवक दल के साथ मौजूद थे। नाम तो उनका चौरीचौरा जनक्रांति में भी आया था, पर वह ससम्मान बरी हो गए। बाद के दिनों में मुस्लिम लीग को तुष्ट करने की नीति से उनका कांग्रेस और गांधीजी से मोह भंग होता गया। इसके बाद उन्होंने वीर सावरकर और भाई परमानंद के नेतृत्व में गठित अखिल भारतीय हिंदू महासभा की सदस्यता ग्रहण कर ली। जीवन पर्यंत वह इसी में रहे। उनके बारे में कभी सावरकर ने कहा था, 'यदि महंत दिग्विजयनाथ की तरह अन्य धर्माचार्य भी देश, जाति और धर्म की सेवा में लग जाएं तो भारत पुनः जगतगुरु के पद पर प्रतिष्ठित हो सकता है।

संत के रूप में योगी की उपलब्धियां

वर्ष 1997, 2003, 2006 में गोरखपुर में और 2008 में तुलसीपुर (बलरामपुर) में विश्व हिन्दू महासंघ के अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन। सहभोज के माध्यम से छुआछूत और अस्पृश्यता की भेदभावकारी रूढ़ियों पर प्रहार। सीएम योगी 'यौगिक षटकर्म, 'हठयोग: स्वरूप एवं साधना, 'राजयोग: स्वरूप एवं साधना' तथा 'हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ नामक पुस्तकों का लेखन करने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मन्दिर से प्रकाशित मासिक योग पत्रिका 'योगवाणी’ के प्रधान सम्पादक भी हैं।

Yogi Aadityanath
Yogi Aadityanath

योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां

  • माफिया राज का खात्मा : मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे बड़े माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई, जिससे अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति स्थापित हुई।
  • पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली : लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, कानपुर नगर, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज सहित 7 जिलों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई।
  • महिला सुरक्षा : महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया और मिशन शक्ति अभियान को मजबूती से चलाया गया।
  • दंगों पर नियंत्रण : मुख्यमंत्री योगी ने दावा किया है कि 2017 के बाद से राज्य में सांप्रदायिक दंगों की संख्या में भारी कमी आई है।
  • रक्षा गलियारा : रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए डिफेंस कॉरिडोर परियोजना। ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप लखनऊ स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्रोडक्शन यूनिट से 18 अक्टूबर 2025 को रवाना हुई।
  • शस्त्र निर्माण अमेठी की शस्त्र निर्माण फैक्ट्री में एके 203 राइफल का उत्पादन। इस राइफल से एक मिनट में 700 राउंड फायर किए जा सकते हैं।
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस : यूपी ने इस रैंकिंग में अपनी स्थिति में सुधार करते हुए देश में दूसरे स्थान पर जगह बनाई।
  • निवेश के लिए अनुकूल माहौल : कानून व्यवस्था में सुधार के कारण राज्य में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिली है।