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Author Raman Rawal 458.html

Sat, 7 Nov 2026

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रमण रावल
मध्यप्रदेश के कुक्षी (धार) में  5 जुलाई 1957 में जन्मे रमण रावल वाणिज्य स्नातक हैं। पत्रकारिता की शुरुआत 1979 से इंदौर से प्रकाशित साप्ताहिक युग प्रभात से हुई। इससे पहले अपने गांव से ही पत्र लेखन शुरू हो चुका था। 3 जुलाई 1975 को नईदुनिया के संपादकीय पन्ने पर पहला लेख छपा, जो कुक्षी की समस्याओं पर केंद्रित था। बीते 46 बरसों में इंदौर समाचार, दैनिक भास्कर, नवभारत, नईदुनिया, जागरण में नगर प्रतिनिधि, उप संपादक, समाचार संपादक व शहर संपादक का दायित्व निभाया। चौथा संसार, पीपुल्स समाचार, भास्कर टीवी, वीकेंड पोस्ट में संपादक की जिम्मेदारी का निर्वहन किया। प्रभात किरण जब साप्ताहिक हुआ करता था (1983-87) तब घुमंतू संवाददाता के तौर पर मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, उप्र, जम्मू-कश्मीर, पंजाब की खाक छानी और तत्कालीन लगभग हर ज्वलंत मुद्दे पर लिखा और फोटोग्राफी भी की।
 
स्वतंत्र लेखन : धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सरिता, भू भारती, अहा जिंदगी, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, अमर उजाला, नईदुनिया, दैनिक भास्कर, देशबंधु, जागरण, राज एक्सप्रेस, पीपुल्स समाचार, दबंग दुनिया, स्टार समाचार, आचरण, चौथी दुनिया, अग्निबाण, वीकेंड पोस्ट, हिन्दी मिलाप, दैनिक अजीत समाचार, हिन्दी वेब पोर्टल मीडियावाला, अमर उजाला, वेबदुनिया आदि पत्र-पत्रिकाओं में 46 बरस से सतत खबरें, आलेख का प्रकाशन।
 
विशेष साक्षात्कार : अमिताभ बच्चन, बाबा आमटे, रंगा राचुरे, शंकर गुहा नियोगी, संत लोंगोवाल, राजीव दीक्षित (आजादी बचाओ आंदोलन के प्रणेता), चौधरी चरणसिंह, सुब्रमण्यम स्वामी, नटवरसिंह, अर्जुनसिंह, दिग्विजयसिंह, वीरेंद्र कुमार सकलेचा, कैलाश जोशी, सुनील दत्त, श्रीराम लागू, सदाशिव अमरापुरकर, जया बच्चन।
 
प्रकाशित पुस्तकें : मोदी युग, युग-युग मोदी, युग पुरुष मोदी, इंदौर के सितारे-1, इंदौर के सितारे-2, इन्दौर के सितारे-3, इन्दौर के सितारे-4, अंगदान, कविता संग्रह- सुनो, तुमने शांति को कहीं देखा है?

भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है तिलक? बहनें क्यों खिलाती हैं भाई को पान? जानें इसका पौराणिक महत्‍व

भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है तिलक? बहनें क्यों खिलाती हैं भाई को पान? जानें इसका पौराणिक महत्‍वBhai Dooj 2026: भाई दूज (यम द्वितीया) सनातन धर्म में भाई-बहन के अटूट प्रेम, सम्मान और समर्पण का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। 5 दिवसीय दिवाली उत्सव का यह अंतिम और पांचवां दिन होता है। इस दिन भाई का बहन के घर जाकर तिलक करवाना और भोजन करना अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है। बहनें इस दिन व्रत रखकर अपने भाइयों के लंबे जीवन, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। भाई दूज पर बहनें भाई को तिलक क्यों लगाती हैं और उन्‍हें पान क्‍यों खिलाती हैं एवं इस पर्व के पौराणिक महत्‍व के बारे में आइए जानते हैं विस्‍तार से...

दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए? कहां-कहां जलाते हैं ये दीप? जानिए परंपरा का महत्व

Diwali Traditions 2026: बंगाल में काली, गुजरात में चोपड़ा तो दक्षिण भारत में क्या? जानें दिवाली पर राज्यों की अनोखी परंपराएं

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसार

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसारजब कुछ घरों में प्रकाश का उत्सव हो, तो कुछ घरों के अंधेरे की चिंता भी आवश्यक है। दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने का अवसर भी है। हर वर्ष हम अपने घरों को ज्योतिर्मय करते, मां लक्ष्मी का स्वागत कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन क्या कभी हमने विचार किया कि जिस समाज में हम समृद्धि का उत्सव मना रहे हैं,वहां कितने घर ऐसे हैं,जहां त्योहार की खुशियां भी आय और खर्च के गणित में उलझकर रह जाती हैं? जब बाजारों में करोड़ों की खरीदारी होती है,तब क्या हम उन परिवारों की चिंता करते हैं,जिनके लिए बच्चों को नए कपड़े दिलाना भी एक बड़ी उपलब्धि है?