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Positive story: एक बार सोचिए… आपके लिए क्या उपयोगी है और क्या नहीं
Absorb what is useful, discard what is useless and add what is specifically your own – Bruce lee
गांधी जी ने कहा था बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो। इसी बात को दुनिया के मार्शल आर्ट किंग ब्रूस ली ने अपने एक नए अंदाज के साथ कहा है। उन्होंने कहा था-
Absorb what is useful, discard what is useless and add what is specifically your own
जो उपयोगी है उसे ग्रहण कीजिए, जो उपयोगी नहीं है उसे हटा दीजिए और जो खासतौर से आपका अपना है उसे अपनी जिंदगी में शामिल कीजिए।
गांधी जी ने अपनी बात चरित्र और धर्म के संबंध में कही थी, लेकिन आज के संदर्भ में हमारी पर्सनॉलिटी को लेकर ब्रूस ली की यह बात सबसे ज्यादा प्रासंगिक और जरुरी महसूस होती है।
ब्रूस ली ने बहुत ही सटीक और सीधी सी बात कही है। उन्होंने कहा-जो आपके जीवन के लिए सबसे जरुरी या उपयोगी है उसे अपने व्यक्तित्व में शामिल करना चाहिए, जो चीज या आदत आपके काम की नहीं उसे डिस्कार्ड यानी अपने पास से हटा देना चाहिए। इन दो बातों के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने जो कही वो थी कि उस गुण को अपनाइए जो आपका अपना है।
हमारे धर्म में भी बहुत मोटे तौर पर यही बात कही गई है। एक सही होता है और एक गलत। सही को अपनाना है और गलत को त्यागना है। इसमें किसी तरह के आध्यात्म को समझने की जरुरत नहीं है। ये कोई बहुत दार्शनिक या गहरी बात नहीं है, लेकिन इसके अर्थ बहुत गहरे हैं।
हमें बस इतना ही करना है। क्योंकि कई बार हमारी पर्सनॉलिटी को बेहतर बनाने के लिए इसी तरह की छोटी सी बात को समझना होता है। उसके लिए कोई बेहद बडी तिकड़म लगाने की जरुरत नहीं है।
अब सबसे जरुरी बात जो है वो यह है कि हमें अपने विवेक पर समझना होगा कि हमारे लिए क्या जरुरी है, क्या गैर जरुरी है और कौन सा गुण है जो हमारा अपना है और उसे हमें अपने चरित्र में शामिल करना है।
बस याद रखिए- Absorb what is useful, discard what is useless and add what is specifically your own
गांधी जी ने कहा था बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो। इसी बात को दुनिया के मार्शल आर्ट किंग ब्रूस ली ने अपने एक नए अंदाज के साथ कहा है। उन्होंने कहा था-
Absorb what is useful, discard what is useless and add what is specifically your own
जो उपयोगी है उसे ग्रहण कीजिए, जो उपयोगी नहीं है उसे हटा दीजिए और जो खासतौर से आपका अपना है उसे अपनी जिंदगी में शामिल कीजिए।
गांधी जी ने अपनी बात चरित्र और धर्म के संबंध में कही थी, लेकिन आज के संदर्भ में हमारी पर्सनॉलिटी को लेकर ब्रूस ली की यह बात सबसे ज्यादा प्रासंगिक और जरुरी महसूस होती है।
हमारे धर्म में भी बहुत मोटे तौर पर यही बात कही गई है। एक सही होता है और एक गलत। सही को अपनाना है और गलत को त्यागना है। इसमें किसी तरह के आध्यात्म को समझने की जरुरत नहीं है। ये कोई बहुत दार्शनिक या गहरी बात नहीं है, लेकिन इसके अर्थ बहुत गहरे हैं।
हमें बस इतना ही करना है। क्योंकि कई बार हमारी पर्सनॉलिटी को बेहतर बनाने के लिए इसी तरह की छोटी सी बात को समझना होता है। उसके लिए कोई बेहद बडी तिकड़म लगाने की जरुरत नहीं है।
अब सबसे जरुरी बात जो है वो यह है कि हमें अपने विवेक पर समझना होगा कि हमारे लिए क्या जरुरी है, क्या गैर जरुरी है और कौन सा गुण है जो हमारा अपना है और उसे हमें अपने चरित्र में शामिल करना है।
बस याद रखिए- Absorb what is useful, discard what is useless and add what is specifically your own
