नाग पंचमी पर इन 5 उपायों से दूर होंगे कालसर्प और पितृदोष के दोष, जानें विधि
श्रावण शुक्ल पंचमी पर नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 17 अगस्त 2026 सोमवार को यह पर्व मनाया जा रहा है। नाग पंचमी का दिन भगवान शिव, नाग देव की पूजा के साथ-साथ कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष और पितृदोष के निवारण के लिए अत्यंत फलदाई माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि इस शुभ तिथि पर श्रद्धापूर्वक कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो इन दोषों के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नाग पंचमी पर कालसर्प और पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए 5 अचूक उपाय निम्नलिखित हैं:-
1. चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का जलप्रवाह
उपाय: नाग पंचमी के दिन चांदी से बना एक छोटा नाग-नागिन का जोड़ा बनवाएं। दूध और गंगाजल से इनका अभिषेक करें, शिव मंदिर में चढ़ाएं और फिर बहते हुए जल (नदी या नहर) में प्रवाहित कर दें।
लाभ: यह कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव को कम करने का सबसे प्रामाणिक और प्रभावी उपाय माना जाता है।
2. शिवलिंग पर जल, दूध और काले तिल से अभिषेक
उपाय: सुबह स्नान के बाद पास के शिव मंदिर जाएं। तांबे या पीतल के लोटे में जल, थोड़ा सा दूध, काले तिल और गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्" (सर्प गायत्री मंत्र) का जाप करें।
लाभ: शिवलिंग का अभिषेक करने से राहु-केतु का कुप्रभाव शांत होता है और कालसर्प योग से राहत मिलती है।
3. पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान
उपाय: नाग पंचमी की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। पीपल की जड़ में कच्चा दूध, जल और थोड़े से काले तिल चढ़ाएं और 7 बार परिक्रमा करें। इसके बाद अपने पूर्वजों (पितरों) का ध्यान करके उनका आशीर्वाद मांगें।
लाभ: पीपल में देवों और पितरों का वास माना जाता है। इस उपाय से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और घर की अशांति दूर होती है।
4. राहु-केतु और पितरों के नाम से दान
उपाय: इस दिन किसी जरूरतमंद, गरीब या पंडित को काले तिल, उड़द की दाल, काला कपड़ा, लोहे के बर्तन या सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज) का दान करें। साथ ही, पितरों की तृप्ति के लिए किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
लाभ: अनाज और वस्त्र दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और राहु-केतु से मिलने वाली परेशानियां खत्म होती हैं।
5. महामृत्युंजय मंत्र और 'ॐ नागदेवतायै नमः' का जाप
उपाय: नाग पंचमी के दिन रुद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मंत्र की कम से कम 1 या 3 माला जाप करें। इसके बाद "ॐ नागदेवतायै नमः" या "ॐ राहुवे नमः" का जाप करें।
लाभ: मंत्र जाप से मानसिक तनाव कम होता है, स्वास्थ्य लाभ मिलता है और जन्मकुंडली के दोनों प्रमुख दोषों की उग्रता शांत होती है।

