Mangla Gauri Vrat 2026: तीसरा मंगला गौरी व्रत 2026: जानिए पूजन का महत्व, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि
3rd Mangla Gauri Vrat 2026: श्रावण मास का हर मंगलवार माता पार्वती के स्वरूप माँ मंगला गौरी की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। 18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सावन माह का तीसरा मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। यह पावन व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के शुभ संयोग में मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने और शीघ्र विवाह की मनोकामना से यह पूजन करती हैं।
मंगला गौरी व्रत का महत्व एवं लाभ
अखंड सौभाग्य एवं संतान प्राप्ति: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवप्रिया माँ पार्वती की इस पूजा से महिलाओं को अखंड सुहाग, दांपत्य जीवन में मधुरता और योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
मंगल दोष और विवाह बाधा का निवारण: यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है या विवाह में लगातार विलंब व अड़चनें आ रही हैं, तो यह व्रत करने से दोष शांत होता है और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
सात्विक साधना: इस व्रत में पूरे दिन माँ पार्वती की आराधना की जाती है और केवल एक समय सात्विक अन्न ग्रहण किया जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त (18 अगस्त 2026)
शुभ पूजा मुहूर्त: प्रातः 05:52 बजे से सुबह 09:08 बजे तक (अमृत व शुभ चौघड़िया)
अभिजीत मुहूर्त (अत्यंत फलदायी): दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
संध्या पूजा मुहूर्त: शाम 06:45 बजे से रात 08:12 बजे तक
क्रमबद्ध एवं संपूर्ण पूजा विधि
1. प्रातः कालीन तैयारी एवं संकल्प
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान से निवृत्त हों और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
तत्पश्चात हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर इस संकल्प मंत्र का जाप करें:
'मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।'
(अर्थात: मैं अपने पति, पुत्र-पौत्रों की सौभाग्य वृद्धि एवं माँ मंगला गौरी की कृपा प्राप्ति के लिए इस व्रत का संकल्प लेती हूँ।)
2. चौकी स्थापना एवं दीप प्रज्वलन
एक स्वच्छ लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर माँ मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
आटे से निर्मित 16 बत्तियों वाला घी का दीपक बनाएं और उसे माता के समक्ष प्रज्वलित करें।
3. षोडशोपचार पूजन
निम्न ध्यान मंत्र का उच्चारण करते हुए माँ पार्वती का आह्वान करें:
'कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्...'
माँ मंगला गौरी को षोडशोपचार (16 उपचारों) से पूजन अर्पित करें।
4. 16 सामग्रियों का विशेष अर्पण
इस व्रत में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। माता को 16 चूड़ियां, सुहाग की सामग्री, 16 लौंग, 16 सुपारी, 16 इलायची, 16 फल, पान के पत्ते, मालाएं और मिठाई अर्पित करें। इसके अतिरिक्त 5 प्रकार के सूखे मेवे तथा 7 प्रकार के अनाज (गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) चढ़ाएं।
5. कथा श्रवण एवं आरती
पूजन के बाद एकाग्रचित्त होकर मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें। अंत में 16 बत्तियों वाले दीपक से माता की भावपूर्ण आरती उतारें और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
सिद्ध एवं प्रभावशाली मंगला गौरी मंत्र
पूजा के दौरान तथा दिनभर माँ मंगला गौरी के इन दिव्य मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है:
सामान्य पूजार्थ मंत्र: ॐ गौरीशंकराय नम:
- शीघ्र विवाह एवं बाधा निवारण मंत्र: ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
- शिव-पार्वती कृपा मंत्र: उमामहेश्वराभ्यां नम:।
- मनोवांछित वर प्राप्ति हेतु मंत्र: गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया। मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।।
- देवी स्तुति मंत्र: नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम्।।

