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क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

Why is World Tribal Day celebrated
World Indigenous Day 2026 : जल, जंगल और जमीन के सच्चे संरक्षक और प्रकृति के सबसे करीबी आदिवासी समाज की संस्कृति, उनके अधिकारों और योगदान को सम्मानित करने के लिए हर साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस (World Indigenous Day) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में इसे मनाने की घोषणा की थी। साल 1982 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की आदिवासी आबादी पर कार्य समूह की पहली बैठक हुई थी, जिसकी याद में यह दिन तय किया गया।
 

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य और महत्व

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य आदिवासी लोगों के मानवाधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और जमीन की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आदिवासी समाजों की अनूठी भाषा, परंपराओं और कला को बचाए रखना है। यह दिन न केवल उनकी समृद्ध परंपराओं को याद करने का अवसर है। 
 
यह दिवस समाज की मुख्यधारा से दूर रह रहे इन समुदायों की चुनौतियों पर विचार करने का भी एक माध्यम है। आदिवासी समाज दुनिया की कुल आबादी का एक छोटा हिस्सा होने के बावजूद जैव विविधता (Biodiversity) को बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
 

विश्व आदिवासी दिवस का इतिहास

आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं की ओर दुनिया का ध्यान खींचने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के मंच से हुई। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार आयोग ने 'आदिवासी आबादी पर कार्य समूह' (Working Group on Indigenous Populations) की पहली बैठक आयोजित की।
 
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में इसे मनाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र ने 'इंडिजिनस पीपुल्स के अधिकारों पर घोषणा पत्र' (UNDRIP) अपनाया, जो उनके आत्मनिर्णय, भूमि और सांस्कृतिक अधिकारों का आधार बना। 1857 की क्रांति से ठीक एक साल पहले बिहार और झारखंड के 'दामिन-इ-कोह' क्षेत्र में संथाल आदिवासियों ने ब्रिटिश हुकूमत और महाजनों के अत्याचारों के खिलाफ बिगुल फूंका था।
 
संथाल परगना के महान क्रांतिकारी तिलका मांझी (जबा पहाड़िया) को देश के पहले आदिवासी स्वाधीनता सेनानियों में गिना जाता है। विश्व आदिवासी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जब तक हम अपने मूल संरक्षकों के अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा नहीं करेंगे, तब तक प्रकृति का संतुलन बनाए रखना असंभव है।
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