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स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

Spain Migrant Invasion
Spain Migrant Invasion: 29-30 जुलाई वाले दिन, अफ़्रीकी महाद्वीप के उत्तरी छोर पर बसे अरबी राजशाही के देश मोरक्को से भाग रहे 'जेन-जी' किस्म के हज़ारों युवाओं ने एक ऐसा दृश्य रच दिया, जिससे यूरोपीय संघ के देशों में तहलका मच गया। वे गिरते-पड़ते-दौड़ते हुए मोरक्को से ही सटे—पर स्पेनी स्वामित्व वाले एक छोटे से अलग भूखंड पर बसे— 'सेउता' (Ceuta) नाम के शहर में ऐसे पहुँचे, मानो आनन-फानन में उस पर धावा बोल दिया गया है।
 
मात्र 18.5 वर्ग किलोमीटर बड़ा और 83,600 की जनसंख्या वाला यह छोटा सा शहर तीन तरफ़ से मोरक्को से और एक तरफ जिब्राल्टर जलडमरूमघ्य के पानी से घिरा है। वहाँ से स्पेन की भूमि तक पहुँचने के लिए 21 किलोमीटर चौड़े जिब्राल्टर जलडमरूमघ्य को पार करना पड़ता है। सेउता सन 1415 से पहले पुर्तगाल के अधीन था और बाद में स्पेन के अधीन हो गया।

50 से 60 हज़ार लोगों का धावा

सरकारी अनुमानों के अनुसार, 29-30 जुलाई वाले दिन, मोरक्को और स्पेन के बीच स्थित जिब्राल्टर जलडमरूमध्य की तरफ से 50,000 से 60,000 मोरक्कन लोग ग़ैर-कानूनी तरीक़े से सेउता पहुँचे थे। स्पेनी गृह मंत्रालय के अनुमान बताते हैं कि वहाँ अभी भी लगभग 2,500 मोरक्कन मौजूद हैं। समुद्री रास्ते से सेउता पहुँचने की कोशिश में डूब जाने से कम से कम 72 लोगों की जानें गईं। राहत कार्य की टीमें अभी भी जलडमरूमघ्य के पानी में शवों की खोजबीन कर रही हैं।
 
सब कुछ बहुत ही आकस्मिक और अनपेक्षित ढंग से हुआ। एक अनुमान यह है कि मोरक्को की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति—उत्तरी अफ्रीका के अन्य अरबी देशों की तुलना में कहीं बेहतर होने के बावजूद—वहां के युवाओं को व्यापक ग़रीबी और बेरोज़गारी का सामना करना पड़ रहा है। वे अपने देश से पलायन में ही अपना भला देखते हैं।

स्पेनी सर्वोच्च न्यायालय का अनोखा फ़ैसला

स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय का कुछ समय पहले का एक फ़ैसला भी मोरक्कनों की भीड़ के सेउता की ओर अकस्मात भागने का एक संभावित कारण माना जा रहा है—जिसमें कहा गया है कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तुरंत मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। बताया जाता है कि इस फैसले का युवाओं ने यह अर्थ लगाया कि वे समुद्र के रास्ते से यदि सेउता पहुँच गए, तो देर-सवेर वहाँ से समुद्रपार की स्पेनी मुख्य भूमि तक भी पहुँच ही जाएंगे, और तब कोई-न-कोई काम-धंधा भी मिल ही जाएगा। 
 
दूसरी ओर, स्पेन के अधिकतर स्वतंत्र विश्लेषकों का मानना है कि मोरक्को के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना संभव नहीं था। आम तौर पर, कड़ी सुरक्षा वाली इस सीमा को इतना संवेदनशील और सुनियंत्रित माना जाता है कि मोरक्को की राजधानी रबात में बैठे अधिकारियों की "स्वीकृति या सहयोग" के बिना हज़ारों लोग वहां जाने का साहस नहीं कर सकते थे।

भीड़ को मोरक्को ने अपनी सीमा पर रोका नहीं

मोरक्को की सीमा से लगे इस इलाके में संकट के बीच, ऐसी अटकलें भी लगाई गईं कि मोरक्को की शाही सरकार ने स्पेन पर दबाव बनाने के लिए जानबूझ कर सेउता में अपने नागरिकों की इस भारी भीड़ को बढ़ावा दिया— या कम से कम इसे होने दिया। स्पेनी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रवासियों ने अलग-अलग बयानों में बताया कि उन्हें मोरक्को की सीमा पर रोका नहीं गया, बल्कि सीमा पार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कई अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें तो सेउता जाने की खुली सीमा के बारे में टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्मों पर के वीडियो और संदेशों से पता चला।
 
स्पेन के गृह मंत्री फर्नांदो ग्रांदे-मार्लास्का ने, इस घटना के होने की बहुत तेज़ गति के लिए मानव तस्करी करने वाले नेटवर्क को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन नेटवर्क ने अवैध प्रवासियों की सीमित सोच-समझ का फ़ायदा उठाया और स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के बारे में गुमराह करने वाली अफ़वाहें फैलाईं।

सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत जानकारी

मोरक्को की सरकार ने, 26 जुलाई की शाम को पहली बार, इस स्थिति पर टिप्पणी की और कहा कि हज़ारों लोगों का अचानक पलायन सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी की वजह से हुआ। वहां के गृह मंत्रालय ने कहा कि स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का—जिसमें कहा गया है कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तुरंत वापस भेजने पर रोक है— गलत अर्थ निकाला गया।
 
इस बयान में अवैध प्रवास से निपटने के लिए मोरक्को की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है और समस्या के भावी प्रबंधन के बोझ को साझा करने की अपील की गई है। इससे पहले, स्पेन में मोरक्को के राजदूत ने कहा था कि मोरक्को को इन घटनाओं पर खेद है और वह कानून सम्मत, व्यवस्थित और सुरक्षित प्रवास के लिए प्रतिबद्ध है।
 
स्पेन की सरकार 2021 के बाद अब पहली बार, सेउता में सीमा सुरक्षा में सहायता के लिए सेना तैनात कर रही है। वहाँ 60 सैनिक और विशेष पुलिस बल के 200 जवान भेजे गए हैं। 24 जुलाई को वहाँ के एक दौरे के दौरान, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने कुछ और कदमों के उठाए जाने की घोषणा की। मोरक्को के उन प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज़ किया जाएगा जो गैर-कानूनी तरीके से सेउता पहुँचे थे।
Spain Migrant Invasion

यूरोपीय संघ (EU) के देशों की प्रतिक्रिया

मोरक्को से सटे हुए स्पेन के समुद्र-पारीय शहर सेउता में जो कुछ हुआ है, उससे विचलित हो कर इटली सहित यूरोपीय संघ (EU) के कई देशों ने, "शेंगन समझौते" वाले क्षेत्र के भीतर वीज़ा-मुक्त यात्रा की अब तक की सुविधा को सभी ग़ैर यूरोपीय विदेशियों के लिए और अधिक सीमित करने तथा "आंतरिक सीमा नियंत्रण" को और अधिक कसने की संभावना की ओर भी इशारा किया—ऐसे उपाय जो जर्मनी में पहले से ही लागू हैं। फ्रांस ने भी घोषणा की है कि वह स्पेन के साथ उन सीमा नियंत्रणों को और कड़ा करेगा जो कई सालों से लागू हैं।
 
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने यूरोपीय संघ के कुछ देशों की प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि यह सब "पूर्वाग्रह, गलत जानकारी, अज्ञानता या राजनीतिक हितों" से प्रेरित है। यूरोपीय संघ के नेतृत्व को लिखे एक पत्र में उनका कहना है कि सेउता, वीज़ा- मुक्त शेंगन क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और वहाँ मौजूद प्रवासी, यूरोपीय संघ के दूसरे देशों में आसानी से नहीं जा सकते।

स्पेन की आप्रवासन नीति बहुत ज़्यादा उदार

दूसरी ओर, आलोचकों का आरोप है कि स्पेन की आप्रवासन नीति बहुत ज़्यादा उदार है। उनका तर्क है कि स्पेनी सरकार यूरोपीय संघ की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा करने में नाकाम रही है। फ़िनलैंड की गृह मंत्री मारी रान्तेनन ने X पर लिखा कि जो देश अपनी सीमाओं को सुरक्षित नहीं रख सकते, वे शेंगेन एरिया के सदस्य नहीं हो सकते। इसके अलावा, कुछ ही महीने पहले, स्पेन ने अपने यहां श्रमिको की कमी को दूर करने के लिए लगभग 5 लाख अनियमित विदेशी प्रवासियों को कानूनी दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य उन शरणार्थियों को लाभ पहुँचाना है, जिन्होंने 2025 के अंत से पहले शरणदान के लिए आवेदन किया था—न कि नए आने वालों को।
 
स्पेन की इस नीति ने, अवांछित अनियमित आप्रवासन को रोकने के लिए प्रयत्नशील 27 देशों के यूरोपीय संघ में भारी चिंता पैदा कर दी है। संघ के 22 देशों के एक साझे पत्र में, नए लोगों के आने में हुई बढ़ोतरी और स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के उस फ़ैसले के बीच सीधा संबंध बताया गया, जिसमें न्यायालय का कहना है कि विदेशी प्रवासियों को तुरंत लौटाना तभी न्याय संगत है, जब उन्होंने अनियमित तरीके से घुसते समय सीमा पर की कोई बाड़ या दूसरी रुकावट पार की हो। जो लोग बिना बाड़ वाले रास्ते से—जैसे समुद्र के रास्ते से—स्पेन पहुँचते हैं, उनके मामले की अलग से जाँच होनी चाहिए। यह फ़ैसला अब स्पेन से अधिक पूरे यूरोपीय संघ का सिरदर्द बन गया है।
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें
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