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  4. Ayodhya Ram Mandir poem

अवध में विराजे श्रीराम जी

अयोध्या
अवध में विराजे श्रीराम जी
पावन भई अयोध्या 
सब मिल गावे रे मंगलाचार जी
पावन भई अयोध्या 
पावन भई अयोध्या, पावन भई अयोध्या 
हर्षे दशरथ हर्षी कौशल्या
हर्षित नर, नारी मुनि मुनिया
सरजू भई रे निहाल जी
पावन भई अयोध्या 
रामलला जन्म भूमि विराजे 
बंद सुखन के खुल गए ताले
जंबू क्षेत्र हुआ मालामाल जी
पावन भई अयोध्या अवध में
सुख के आंसू भक्त जन के छलके
सरजू तट के रजकण है दमके
सब प्राणी करे गुणगान जी
पावन भई अयोध्या
अवध में विराजे श्रीराम जी
पावन भई अयोध्या।
 
लेखक के बारे में
राकेशधर द्विवेदी
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