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प्रेम कविता: जो कह न सके तुमसे
जो कह न सके तुमसे शब्दों में लिखा होगा आंखों पे लिखी-बातें आंखों ने पढ़ा होगा तस्वीर तेरी मैंने जो नयनों में बसाई है ... -
हिंदी कविता : चला सखी घूम आई माई के दुआरे
चला सखी घूम आई माई के दुआरे। मथवा टिकाय आई माई के दुआरे। चला सखी घूम आई माई के दुआरे। टिकुई चढ़ाए आई माई के ... -
प्रेम गीत : भीगी भीगी बरसातों में
भीगी भीगी बरसातों में, तुम ख्वाबों में छा जाते हो, मैं कैसे समझाऊं तुम्हें, मेरे सपनों में तुम आते हो, सौंधी सौंधी माटी ... -
हिन्दी कविता : बड़ा ही दयालु है मुरली वाला
कट जाएंगे तेरे दुःख-दर्द सारे कान्हा की चरणों में जाके तो देखो बड़ा ही दयालु है मुरली वाला कभी उसकी शरणों में जाके तो ... -
जन्माष्टमी पर कविता: नन्द के ललना मंद-मंद मुस्काए
नन्द के ललना मंद-मंद मुस्काए यशोदा मइया पलना झुलाए पलना झुलाए मइया पलना झुलाए ललना को देख मन ही मन मुस्काए नन्द के ... -
पितृ दिवस पर कविता : मैं एक छोटा बच्चा हूं
Fathers Day par Kavita : जब मैं आंखें खोलता हूं, पापा को घर में नहीं पाता हूं, मम्मी धीरे से समझाती, पापा ऑफिस चले गए, ... -
प्रेम गीत : देखो रात हुई और चांद खिला
देखो रात हुई और चांद खिला, हम दीवाने यूं ही मचलते हैं, हाल दिलों का क्या कहें हम, सिर्फ तुमको देखा करते हैं, कुछ ... -
मां दुर्गा पर कविता : मैया नवरातन में मुझ पर कृपा कीजिए
Poem on Navratri 2022 : नवरात्रि में व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा-आराधना की जाती है, यहां पढ़ें मां दुर्गा के प्रति ... -
हिन्दी कविता : मेरे कान्हा की प्यारी मुरतिया
मेरे कान्हा की प्यारी मुरतिया, मन में बस जाए इसकी सुरतिया, गोकुल धाम से कान्हा आए, जमुना किनारे बंसी बजाए, भागी-दौड़ी ... -
पितृ दिवस पर कविता : पापा जल्दी आ जाना, घंटों गप्पे लड़ाएंगे
मैं तुमसे बातें करने, मोबाइल रोज मिलाता हूं, टन-टन घंटी रोज है बजती, बात नहीं कर पाता हूं -
पिता पर कविता : संडे जल्दी से आ जाओ, पापा से पूरे दिन मिलाओ
मैं मम्मा से पूछता हूं, पापा कब मेरे संग खेलेंगे, मम्मा धीरे से समझाती वो तो संडे को मिल पाएंगे... -
हिन्दी कविता : सिया जू की प्यारी मिथिला नगरिया
सिया जू की प्यारी मिथिला नगरिया, देखो बरात ले के आए हैं। लक्ष्मण राम संवरिया, बरात को देखकर सखिया मुस्काई -
महिमा मैया की कितना बखाने
कविता- महिमा मैया की कितना बखाने -
हिन्दी कविता : राजा दशरथ के घर बाजे शहनाई रे
राजा दशरथ के घर बाजे शहनाई रे, गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं, सब मिल के गावे बधाई रे, गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाऊं -
प्रेम कविता : गीत बनकर वो आने लगे
गीत बनकर वो आने लगे, अधरों पर मुस्कुराने लगे राज अंखियन का क्या कहूं मैं, उनके नैना कजरारे लगने लगे -
प्रेम कविता: वो मेरा दोस्त...!
वो मेरा दोस्त मुझे अब खुदा सा लगता है। तमाम मोड़ में सबसे जुदा सा लगता है। हंसता है तो आकाश में चांद खिला सा लगता है -
अवध में विराजे श्रीराम जी
अवध में विराजे श्रीराम जी, पावन भई अयोध्या, सब मिल गावे रे मंगलाचार जी पावन भई अयोध्या -
हिन्दी कविता : जय श्रीराम
जय-जय श्रीराम जय-जय प्रभु राम, मेरे मन में बसे हैं श्रीराम, मेरे रोम-रोम में बसे हैं श्री प्रभु राम -
मार्मिक कविता : व्हाट्सएप चलाती हुई मां
मैंने अचानक अपने व्हाट्सएप पर देखा तो वह अनेक हिदायतें और आशीर्वादों से भरा था -
कविता: भार तो केवल श्वासों का है...
स्वप्न जो देखा था रात्रि में हमने सुबह अश्रु बन बह किनारे हो गए हैं चांद और मंगल पर विचरने वाले हम आज कितने बेसहारे हो ...
