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मां पर हिन्दी में रचना : माँ तुझसे ही अस्तित्व मेरा
Poem about Mother in Hindi माँ तुझसे ही अस्तित्व मेरा तुझसे ही ख़ुशियाँ मेरी तुझसे ही व्यक्तित्व मेरा तुझ से ये ... -
जीवन में ऋतुराज वसंत जैसे संतुलित रहें, रमणीय और कमनीय...
वसंत ऋतु में वातावरण में भी ग़ज़ब का संतुलन होता है- न ही अत्यधिक सर्दी न अतिशय गर्मी :वातावरण सुखद, रमणीय और कमनीय ... -
बालिका दिवस पर कविता : बेटी की उड़ान मेरा अभिमान
मान मिला सम्मान मिला धन्य हुआ नारी जीवन जब...... आँचल रूपी सुखद सरोवर पुत्री रत्न सम कमल खिला मन की आशाओं को ... -
दिलों में रहेगी सदा लता ताई तुम्हारी आवाज़...
शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी लता मंगेशकर जी जिनके नाम में ही सुर और ताल का अद्भुत समन्वय था ‘लता ‘उलट कर देखें तो ... -
वसंत पंचमी पर कविता : मन-मनोहारी हुई वसुंधरा
नीलाभ व्योम ,पुलकित है रोम , धरिणी लावण्य हुई सुंदरा। स्वर्णिमपर्णा, प्रकृति है मोद , मन-मनोहारी हुई ... -
गणतंत्र दिवस पर कविता : भारत नया बनाएँगे....
क़तरा-क़तरा लहू बहा है आज़ादी को पाने में फिर;लगे वर्ष २ , ११ माह ,१८ दिवस विधी बनाने में कर उपयोग अधिकारों का ... -
नीले घन को चीरकर, झाँक रहा देखो दिनकर
नीले घन को चीरकर, झाँक रहा देखो दिनकर। दोनों बाहों को फैलाकर , जीवन पाता मैं प्रबल-प्रखर, रश्मिकर ही तो है ... -
संक्रांति पर प्रेम कविता : मैं पतंग सी सजन तुम संग
मैं पतंग सी सजन तुम संग, उड़ चली इक डोर में बंध।। तिल से कोमल गुड़ से मीठे , मृदु रिश्ते की मिठास भीगे। थाम कर ... -
राम नवमी विशेष कविता : राम तुम्हें आना होगा
हे राम !! तुम्हे आना होगा ..जग पर बरसी यह विकट आपदा तुमको ही तो मिटाना होगा ..... -
राम नवमी पर कविता : मेरे राम...
राम तुम्हें अब आना होगा, मैं शबरी बन जाऊंगी, ध्यान तुम्हारा नित मैं धरूंगी रघुपति राघव गाऊंगी -
राम जन्मभूमि पर कविता : सवारी रघुनाथ की आई
हुई पूर्ण प्रतीक्षा जन-जन की 'लाल' का स्वप्न साकार अवध में प्रकट भए श्री राम निभाने रघुवर-रघुकुल रीत
