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सुकून से जीना असली कंफर्ट है
अपने दैनिक जीवन में हम प्रायः कंफर्ट अर्थात् सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। ठंडी हवा चाहिए, तो कूलर है, एसी है। गर्मी ... -
Exam Tips : तनाव से नहीं, पूर्व तैयारी से जीतें परीक्षा के भय को
परीक्षाओं का दौर शुरू हो गया है। इन दिनों अभिभावकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं और ... -
Triple Talaq Bill : अल्लाह की रज़ा सिर माथे, तीन तलाक़ अलविदा
आखिर वो बहुप्रतीक्षित फैसला आ ही गया। तीन तलाक अब गैर कानूनी, दंडनीय। सच जानिए,आज हर वो महिला दिल से खुश होगी, जो सिर्फ ... -
Republic Day : शिक्षा के आलोक से जब जगमगाएगा देश, गणतंत्र तब सार्थक होगा
निवेदन यही कि बाह्य रूप से नहीं बल्कि आंतरिक रूप से गणतंत्र के अर्थ व महत्व को जज़्ब कीजिए और स्वयं से आरंभ कर इसका शेष ... -
कोरोना काल में भी स्वर्ग बन सकता है आपका घर
जिन लोगों के जीवन में उपर्युक्त दृश्यों का अभाव था, जरा उनसे जाकर पूछिए कि कैसे उनकी आत्मा अपनों के साथ ना होने से गहरी ... -
International Womens Day : आखिर तुम करती क्या हो? का जवाब...
ये भारतीय पतियों द्वारा अपनी गृहिणी पत्नी को बोला जाने वाला आम जुमला है - "तुम करती क्या हो घर में। बस, खाना बनाना और ... -
ये दुनिया पहले से भी अधिक खूबसूरत हो जाएगी, सहभाव अपना लीजिए
एक लंबे अरसे के बाद वो अपनी मौसी के घर रात रुकी थी। रात को अपने मौसी, मौसाजी, पापा, मम्मी, भाई, भाभी और बच्चों को एक ... -
मोदी जी, अब निर्भया की मां के मन की बात सुनिए और कहिए
देश के मुखिया से सीधा निवेदन कि आपके मन की बात आप प्रायः करते हैं और हम सुनते, समझते व सराहते भी हैं। लेकिन मोदी जी, अब ... -
26 जनवरी के बाद भी गणतंत्र पर सोचें हम
26 जनवरी का हो-हल्ला बीत गया। छोटी-बड़ी परेड, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, झंडा वंदन, भाषणबाजी, देशभक्ति पूर्ण गीत, नृत्य के ... -
इंदिरा जयसिंह, कुछ तो सोच समझ कर बोलिए
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां आशा देवी से उनकी बेटी के बलात्कार ... -
एक औरत की कहानी, आखिर कब तक रहेगी बेगानी
उसकी आंखों में आंसू झिलमिला आए थे, सिर्फ इतनी सी बात पर कि 58 के पतिदेव थोड़ा दुबला गए हैं। आज से 27 साल पहले शादी के ... -
आइए, अपनी आत्मा को अमीर बनाएं
आपने कभी गौर किया है कि हम सदा अपनी सुनाने में यकीन रखते हैं। अपने भीतर का उड़ेलने के लिए आतुर, आत्माभिव्यक्ति के लिए ... -
कसिए स्वयं को धार्मिकता की सच्ची कसौटी पर
प्रात:काल का समय मंगल का, शुभ का माना जाता है। हम में से लगभग हर दूसरे घर में सुबह स्नान कर भगवान की पूजा या नाम स्मरण ... -
सच्चा धर्म निहित है मानवीयता में
ईश्वर यह नहीं देखता कि आप कितनी बार मंदिर गए? कितनी देर उसकी मूर्ति के समक्ष बैठकर विधि-विधान से उसकी पूजा की? कितने ... -
'मंगल' भाव से रचें सुख व शांति का सतयुग
हाल ही में मंगलमूर्ति श्री गणेश को हमने विदाई दी है। दस दिवसीय आयोजन में सहोल्लास हिस्सा लेकर खूब मंगल गीत गाए, मंगल ... -
थाम लीजिए अपनी हार्दिकता से रिश्तों की नाजुक डोर
जब किसी कटुता के चलते मन में संबंधित के प्रति गांठ पड़ जाती है और लाख उसके क्षमा मांगने पर भी हम उसके प्रति अपनी शिकायत ... -
आज मन की बात, मोदीजी के साथ
उन्नाव कांड- हम नारियों के सीने में एक और खंजर! तथाकथित सुशिक्षित समाज के मुंह पर एक और झन्नाटेदार तमाचा। भारतीय ... -
जीवन को सजा लीजिए 'अपनों' के अपनेपन से
एक दिन मैंने घर के बाहर अपनी गाड़ी रोकी। उतरते ही दीदी की हंसी सुनाई दी। बहन की हंसी से लगा, मानो दिनभर का बोझ उतर गया। -
दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें
भारतीय घर-परिवारों में आमतौर पर बुज़ुर्ग दो दशाओं में दिखाई देते हैं। या तो नई पीढ़ी से तालमेल के अभाव में वे ... -
अपने बच्चों को दीजिए शिक्षा के उचित संस्कार
प्राय: सभी परिवारों में बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए अध्ययन के प्रति निष्ठावान रहने की सीख दी जाती है और अधिकांश बच्चे ...
