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बाबासाहेब अंबेडकर पर कविता : मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं
मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं, जय भीमा, जय भीमा, तेरे चरणों की धूल कहाऊं!! अर्थशास्त्री, कानून के ज्ञाता, ... -
नारी की खूबसूरती पर कविता : ये इत्र-सी स्त्रियां...
ये इत्र-सी स्त्रियां!! महकाती फुलवारियां, रूह-रूह कोने-कोने, चहकती ज़िंदगियां!! -
हरियाणा में डॉ. निशा माथुर को 'विलक्षणा समाजसेवा सारथी अवॉर्ड'
डॉ. निशा माथुर को सक्रिय रूप से साहित्य, कला, शिक्षा, उद्यमी और समाजसेवा कार्यों में भूमिका निभाने के लिए 'विलक्षणा ... -
कविता : मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो
मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो, वही मेरे बाबुल का आंगन दीजो, वही नीम छैयां सा कानन दीजो, भीगता था जहां प्यारा-सा बचपन, -
जयपुर की महिलाएं हरियाणा के करनाल में 'राष्ट्रीय गौरव अवार्ड' से सम्मानित
राजस्थान के जयपुर की समाज प्रसिद्ध महिलाएं 'राष्ट्रीय गौरव अवार्ड' से हरियाणा के करनाल में सम्मानित हुईं, जिनमें से ... -
कविता : कुछ गड़बड़ है!
देख रही हूं कुछ गड़बड़ है, ये बेचैनी और ये हड़बड़ है!! मोहब्बत नई दिखे है जालिम, बोली में भी तेरे खड़खड़ है!! -
हिन्दी कविता : पापा, आना सरहद पार से...
पापा, आना सरहद पार से, दुश्मन के घरबार से। रस्ता देखे थकी हैं अंखियां, चुप हूं मेरी खो गई निंदिया। -
हिन्दी कविता : जय भीमा जय भीमा!!
मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं, जय भीमा, जय भीमा, तेरे चरणों की धूल कहाऊं!! अर्थशास्त्री, कानून के ज्ञाता, ... -
कविता : ऐ दिल जरा बचपन की गलियों से गुजर आऊं!!
ऐ दिल जरा बचपन की गलियों से गुजर आऊं, गरमी की छुट्टियों को तगड़े आलस में जी आऊं, भानुमति के पिटारे से निकलूं छोटी सी ... -
कविता : तीये की बैठक
तथागत का हंसता-सा चित्र पुष्पहारों से हो रहा सुवासित कोविद, आगंतुक सभी उपस्थित अब होगा गरूड़ पुराण वाचित!! -
कविता : होली के मुक्तक
धक-धक-सी महकी सांसें हैं, मदहोशियां छाईं, झूमे पलाश मदमस्त सा, जामुनिया भी बौराई। मन-मयूरा नाचे ता धिक, आज पी के भंग ... -
डॉ. निशा माथुर को मिला इंडियन ट्रिलब्लाजेर विमन अवॉर्ड-2018
जयपुर में रविवार, 11 फरवरी को मानसरोवर के जीडी बडाया मेमोरियल ऑडिटोरियम में हुआ इंडियन ट्रिलब्लाजेर अवॉर्ड-2018। आयोजक ... -
कविता:सुन री, चिड़कली
सुन री, चिड़कली हो के विदा, आइयो रे, घर की है सूनी देहरी, निरखत जाइयो रे। -
कविता: हाय ! खोखली तालियां...
अलसवेरे ढोलक की थाप, नौबत बधाइयां, सुरों की सप्तक संग, संगीत में रुबाइयां, किन्नरों की किस्मत में, कैसी ये रुसवाइयां... -
रोमांस गीत: घूंघट पट से नयन झांकती
जब चांदनी मेरी छत पे पिघले, पूनम का चांद मचलता हो, जब बरखा रानी बिजुरी को छेड़े,
