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आत्महत्या करने से पहले मेरे बच्चे एक बार सोचना...
तुम्हारी सीखने की ललक ही सबसे बड़े अंक है मेरे लिए। मैं कभी एक साथ तुम पर सचिन तेंदुलकर और सुन्दर पिचाई बनने का दबाव ... -
ये किस विमर्श ने कह दिया कि हर पुरुष बुरा होता है, और हर स्त्री देवी?
कुछ बुरे लोगों के कारण सब बुरे ठहरा दिए जाते हैं। उन पुरुषों को बहुत शुभकामना जो सहायक हैं, भावुक हैं, परिवार की रीढ़ ... -
श्रद्धा- आफताब पर कुछ चुभते सामाजिक सवाल
विकृतियों किस व्यवस्था में नहीं होती हमारी वैवाहिक सामाजिक पारिवारिक ताने बाने में भी थीं, हैं भी, किंतु उन्हें दूर ... -
बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे, या यह केवल एक किताबी आदर्श है आपके लिए?
गलती अलगाववादियों की नहीं, वो तो उनके मिशन पर थे। गलती उनको शह देने वाले, उनको गले लगाने वाले और कश्मीरी पंडितों को 30 ... -
हिज़ाब: धार्मिक पहचान की यह कैसी ज़िद है इल्म की रोशनी पर....
सभी स्वतंत्र हैं कुछ भी पहनने के लिए, किंतु संस्था गत व्यवस्था और अनुशासन तो धर्म से ऊपर की बात है, उसके पालन के लिए तो ... -
#लताजी: तुम न रच सकोगे कभी दूसरी लता, ईश्वर स्वयं भी नहीं.....
हाँ हमने लता जी को गाते सुना है। सरस्वती साधिका ने बसंत चुना जाने को, कला का अंक 6 छठ तिथि, पूरी दुनिया को अपनी कला से ... -
युगों में कोई एक लता होती हैं #RIPLATA
हम उस युग में हुएं हैं जिसमें लता जी के स्वर गूंजे हैं, इससे बड़ी जीवन की सार्थकता क्या होगी, जिसने लताजी को न सुना वो ... -
पुस्तक समीक्षा : स्त्री के मन का द्वीप है चंद्रदीप
चेतना भाटी का हाल में प्रकाशित उपन्यास चंद्रदीप सहज स्त्री भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उपन्यास बहुत बड़े कैनवास पर नहीं ... -
Ayesha Suicide Case : ऐसी मुस्कुराहटें बहुत भारी होती हैं....
मुस्कुराहटें, मासूमियत कहीं बोझिल होती हैं भला, वह तो ज़िंदगी को हल्का फुल्का बनाती है। दुःख के घने सायों में ... -
Vikas dubey encounter: सही-गलत से परे अंतत: कोई स्थाई समाधान तो निकले
एनकाउंटर को सही कहते हैं तो अपनी खुद की बनाई व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाने होते हैं, जिसने बरसों से न्याय में देरी की ... -
जनता कर्फ्यू : ताली, थाली और शंख के साथ अद्भुत, अकल्पनीय
सुना करते थे, पढ़ा करते थे कि गांधी जी के पीछे पूरा देश चला, नेहरू जी के पीछे एक आज़ाद भारत चला, शास्त्री जी के कहने पर ... -
कड़वा सच : बहू और बेटी का अंतर
मैंने सुना तो आंखों और कानों पर विश्वास नहीं हुआ। आश्चर्य भी हुआ, कोई औरत इतनी बेबाकी, ईमानदारी और साहस के साथ एक अलग ... -
निरंतर बढ़ते रेप केस और 'विरोध' का 'विरोध'
क्या विरोध करें,किसका विरोध करें, विरोध करने पर देखा न आपने किसी ने dp विवाद को जन्म दिया,किसी ने उसे मुंह काला करने की ... -
आत्ममुग्धता : तेजी से बढ़ता एक सामाजिक रोग
हम सभी में आलोचना करने की प्रवृत्ति होती ही है किंतु दिन रात अपनी प्रशंसा व दूसरों की खामियों की चर्चा करना NPD के ... -
Natural Selfie की जरूरत क्यों आन पड़ी
यह बहस श्रृंगार के विरोध की है ही नही, बस इस बात को लेकर है कि कहीं श्रृंगार आपका जूनून तो नहीं, बिना मेकअप के आप बाहर ... -
मदर्स डे स्पेशल : मातृत्व की मार्मिक यादों के बीच मेरी मां
मंदिर की ही देहरी पर मां को स्तनपान करवाते करवाते नानीजी स्वर्ग सिधार गईं और मेरी मां अबोध एक वर्ष की बालिका स्तनपान ... -
मूर्ख दिवस पर संकट
एक बार फिर मूर्ख दिवस आसन्न है, और यकीन कीजिए किसी को मूर्ख बनाने और निंदा करने में जो परमानन्द है उसके आगे सकल सुख ... -
रोशनी से क्यों डर रहे हैं जनाब : नाहिद आफरीन के बहाने
हिंसा, भय और असुरक्षा से उपजी पहली प्रतिक्रया है। मनुष्य जब अपने आस पास फैली कलात्मक अभिव्यक्तियों से डरने लगे, तो यह ... -
पार्थ...तुम्हें जीना होगा : वर्तमान की विडंबनाओं का प्रभावी दस्तावेज़
"पार्थ..तुम्हें जीना होगा" से प्रतिष्ठित साहित्यकार ज्योति जैन ने उपन्यास विधा में कदम रखा है, और अपने पहले ही प्रयास ... -
महिला दिवस विशेष : सवाल अब भी बाकी हैं...
“लेकिन हम तो जिंदा है ना.......? एंड टीवी पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक “गंगा” में एक दस साल की बच्ची का यह सवाल ...
