इतिहास में ऐसे बहुत सारे राजा, महाराजा व सरदार मिल जाएंगे, जो अपनी राजसी ठसक और शौकों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। इंदौर के होलकर राजघराने से जुड़े 'तात्या सरकार' को उनके इन्हीं शौकों के कारण याद किया जाता है। शराब, शबाब तथा राजसी सभी गुणों की वजह से लोग उन्हें जानते थे। एक बार महाराजा होलकर को उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए कठोर निर्णय लेना पड़ा था।
खासगी जागीर के प्रारंभ से राज्य के भारतीय संघ में विलय होने तक की लंबी अवधि (220 वर्ष) तक एक ही परिवार द्वारा दीवान के दायित्वों का निर्वाह करने वाला यह विशिष्ट परिवार था जिसका 'उपनाम' ही 'खासगीवाले' पड़ गया। इस परिवार को सुदीर्घ सेवाओं के बदले होलकर राज्य की ओर से 254 रु. प्रतिमाह का नकद भुगतान किया जाता था और उन्हें जागीर भी दी गई थी। एक घोड़ा व अन्य सम्मान भी इस परिवार को राज्य की ओर से दिए गए थे।