कावड़ यात्रा आज से शुरू: जानिए रूट, ट्रैफिक डायवर्जन और जरूरी नियम
कांवड़ यात्रा 30 जुलाई 2026 (सावन महीने के पहले दिन) से शुरू हो चुकी है। इस यात्रा का मुख्य समापन 11 अगस्त 2026 (सावन शिवरात्रि) को होगा, जब श्रद्धालु हरिद्वार या अन्य पवित्र जगहों की नदियों से लाया गया जल शिवलिंग पर अर्पित (जलाभिषेक) करेंगे। देशभर में कावड़ यात्रा के सैंकड़ों रूट हैं लेकिन यहां गंगा और नर्मदा से जुड़े कुछ खास रूट। कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर भारत के कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर केवल शिवभक्तों की पैदल आवाजाही होती है। यहाँ देश के सबसे प्रमुख कांवड़ रूटों की जानकारी दी गई है।
कांवड़ यात्रा के प्रमुख और खास रूट
1. हरिद्वार से दिल्ली - एनसीआर (सबसे व्यस्त रूट)
मार्ग: हरिद्वार (हर की पौड़ी)- रुड़की - मुजफ्फरनगर- मेरठ - मोदीनगर - गाजियाबाद - दिल्ली/ हरियाणा
दूरी: लगभग 210 से 230 किमी।
खासियत: दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान की ओर जाने वाले अधिकतर कांवड़िये इसी दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे से गुजरते हैं।
2. हरिद्वार से नीलकंठ महादेव (उत्तराखंड)
मार्ग: हरिद्वार $\rightarrow$ ऋषिकेश $\rightarrow$ स्वर्गाश्रम $\rightarrow$ नीलकंठ महादेव मंदिर
दूरी: लगभग 40-50 किमी।
खासियत: कम दूरी और पहाड़ी रास्तों वाला यह रूट श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है।
सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम (पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रूट)
मार्ग: सुल्तानगंज (बिहार) $\rightarrow$ तारापुर $\rightarrow$ दुम्मा $\rightarrow$ देवघर (झारखंड)
दूरी: लगभग 105 किमी।
खासियत: यहाँ श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक) को चढ़ाने नंगे पैर चलते हैं।
4. प्रयागराज से काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश)
मार्ग: प्रयागराज (संगम) $\rightarrow$ भदोही $\rightarrow$ वाराणसी (काशी विश्वनाथ मंदिर)
दूरी: लगभग 120 किमी।
खासियत: श्रद्धालु प्रयागराज संगम से जल लेकर वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करते हैं।
5. ओंकारेश्वर, इंदौर या देवास से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर (मध्यप्रदेश)
मार्ग: ओंकारेश्वर से उज्जैन, इंदौर से सांवेर होते हुए उज्जैन। देवास से बांगर होते हुए उज्जैन।
दूरी: ओंकारेश्वर से उज्जैन करीब 140 किलोमीटर, इंदौर से उज्जैन की 65 किमी, देवास से उज्जैन की 35 किमी।
खासियत: श्रद्धालु से जल लेकर वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा के अन्य महत्वपूर्ण नियम
- यात्रा के दौरान सात्विक भोजन करें, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और नशे से दूर रहें।
- गंगाजल से भरी कांवड़ को कभी सीधे जमीन पर न रखें।
- कांवड़ यात्रा पैदल करने की परंपरा है।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को शांत रखें।
- कई श्रद्धालु पूरी यात्रा नंगे पैर करते हैं, जो उनकी तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
यातायात और डायवर्जन (Traffic Advisory)
यदि आप इन रूटों पर सामान्य यात्रा या गाड़ियों से सफर कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
भारी वाहनों पर प्रतिबंध: 29 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे, वजीराबाद रोड, जीटी रोड और नेशनल हाईवे पर भारी वाहनों (Trucks/HTVs) के प्रवेश पर रोक है या उनके रूट डाइवर्ट किए गए हैं।
वैकल्पिक मार्ग: दिल्ली-एनसीआर और वेस्टर्न यूपी से गुजरने वाली गाड़ियों को एनएच-9 (NH-9) या एनएच-44 (NH-44) के रास्तों पर डाइवर्ट किया जा रहा है।

