Sharad Purnima 2026: 30 साल बाद शरद पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग, 3 शुभ योग में 21 दीपक से बदलेगी किस्मत
आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष और अत्यंत पावन महत्व है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करता है। साल 2026 में शरद पूर्णिमा का यह पर्व लगभग 30 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग में आ रहा है। इस बार इस पावन तिथि पर तीन अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के जीवन से आर्थिक संकटों को दूर कर सुख-समृद्धि के नए द्वार खोलने वाला है। आइए जानते हैं कि इस बार शरद पूर्णिमा पर कौन-कौन से अद्भुत योग बन रहे हैं और 21 दीपकों का विशेष उपाय आपकी किस्मत को कैसे बदल सकता है।
30 साल बाद बन रहा है यह दुर्लभ महासंयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल 2026 की शरद पूर्णिमा पर ग्रहों की स्थिति और तिथियों के दुर्लभ मिलन से तीन अत्यंत कल्याणकारी योग बन रहे हैं। ऐसा महासंयोग लगभग 30 वर्षों के लंबे समय के बाद देखने को मिल रहा है। इस दिन बन रहे शुभ योग:-
शुभ योग:
1. सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 7 बजकर 22 मिनट पर सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। इस योग में किए गए सभी धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और उपाय 100% फलदायी और सिद्ध होते हैं।
2. अमृत सिद्धि योग: सूर्यास्त के बाद अमृत सिद्धि योग प्रारंभ होगा। चंद्रमा की किरणों से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य और आरोग्य लाभ को कई गुना बढ़ाने वाला योग।
3. हर्षण योग: हर्षण शब्द का अर्थ होता है- खुशी, प्रसन्नता, रोमांच या हर्षित करने वाला।
ग्रहों की दुर्लभ युति:
1. लक्ष्मी-नारायण योग: शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण योग बना है। धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बरसाने वाला योग।
2. बुधादित्य योग: सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य राजयोग धन, समृद्धि और पदोन्नति में सहायक होता है।
3. शुक्रादित्य योग: सूर्य और शुक्र की युति से बनने वाला शुक्रादित्य राजयोग भी धन और समृद्धि के योग के लिए जाने जाता है।
4. नीचभंग राजयोग: मंगल और बृहस्पति से बनने वाला नीचभंग राजयोग बना है।
इन तीनों योगों के एक साथ होने से शरद पूर्णिमा की रात का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस रात की गई लक्ष्मी पूजा से साल भर धन-धान्य की कमी नहीं होती।
21 दीपकों का महाउपाय: बदल सकती है आपकी किस्मत
शरद पूर्णिमा की मध्यरात्रि (कोजागरी पूजा के समय) महालक्ष्मी और चंद्रमा का आशीर्वाद पाने के लिए 21 दीपकों का विशेष उपाय करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस रात मां लक्ष्मी यह देखने के लिए पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं कि "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है)।
दीपक प्रज्वलित करने की सही विधि:
सामग्री: 21 मिट्टी के दीपक, गाय का शुद्ध देशी घी/तिल का तेल और रुई की बत्तियां।
कहां-कहां जलाएं ये 21 दीपक:
मां लक्ष्मी के समक्ष (1 दीपक): पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी और कान्हा जी के सामने मुख्य चौमुखी या बड़ा दीपक जलाएं।
चांद की रोशनी में (1 दीपक): जहां आपने रात भर खीर रखी है, उस स्थान के पास।
तुलसी जी के पास (1 दीपक): घर के आंगन में स्थापित तुलसी के पौधे के नीचे।
मुख्य द्वार पर (2 दीपक): घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों तरफ (लक्ष्मी आगमन के लिए)।
पानी के स्थान पर (1 दीपक): रसोई या जहां पीने का पानी रखते हैं।
घर के कोनों और तिजोरी के पास: बाकी बचे दीपक घर के ईशान कोण, बालकनी, छत और तिजोरी/अलमारी के पास जलाएं।
रात भर खुले आसमान में खीर रखने का महत्व
इस दुर्लभ संयोग में शरद पूर्णिमा की रात शुद्ध दूध, चावल, मखाने और मेवे से बनी खीर को किसी कांच या चांदी के बर्तन में भरकर महीन कपड़े से ढककर खुले आसमान या चांदनी रोशनी में रखें।
सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग के कारण इस बार चंद्रमा की किरणें खीर में औषधीय और दैवीय ऊर्जा का संचार करेंगी। अगले दिन सुबह स्नान के बाद इस खीर का प्रसाद पूरे परिवार में बांटकर ग्रहण करें। इससे न सिर्फ बीमारियां दूर होती हैं, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता भी प्राप्त होती है।
शुभ संदेश: शरद पूर्णिमा की यह दिव्य रात केवल पूजा-पाठ का अवसर नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय है। 30 साल बाद बने इस दुर्लभ योग में भक्तिभाव से दीप जलाएं और अपने जीवन में खुशहाली का स्वागत करें।

