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शनि जयंती पर भूलकर भी ना करें ये काम, शनि देव हो सकते हैं नाराज, जानिए उपाय
shani jayanti remedies : न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनि देव का जन्मोत्सव, शनि जयंती, हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। यह दिन शनि देव की कृपा पाने और उनके अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार 27 मई 2025, मंगलवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें करने से शनि देव रुष्ट हो सकते हैं और व्यक्ति को उनके क्रोध का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप शनि देव की कृपा पाना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति चाहते हैं, तो शनि जयंती के दिन भूलकर भी ये काम न करें:
लोहे या चमड़े की नई वस्तुएं खरीदना
शनि देव को लोहा और चमड़ा प्रिय माना जाता है, लेकिन शनि जयंती के दिन इन चीजों को खरीदना शुभ नहीं माना जाता। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई लोहे या चमड़े की वस्तुएं खरीदने से शनि देव नाराज हो सकते हैं और आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दिन शनि देव को लोहे या चमड़े की वस्तुएं दान करना अधिक शुभ माना जाता है।
किसी कमजोर या गरीब का अपमान करना
शनि देव को गरीबों, असहायों और श्रमिकों का संरक्षक माना जाता है। इसलिए, शनि जयंती के दिन भूलकर भी किसी गरीब, भिखारी या मजदूर का अपमान न करें। उन्हें प्रताड़ित करना या उनका हक मारना शनि देव को अत्यंत अप्रिय है। इस दिन ऐसे लोगों की मदद करना, उन्हें भोजन कराना या दान देना शनि देव को प्रसन्न करता है।
तेल, नमक या सरसों के बीज खरीदना
शनि देव से संबंधित कुछ वस्तुएं जैसे कि तेल (विशेषकर सरसों का तेल), नमक और सरसों के बीज को इस दिन खरीदने से बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन चीजों को खरीदने से घर में नकारात्मकता आ सकती है और शनि दोष बढ़ सकता है। इसके बजाय, आप इन चीजों का दान कर सकते हैं, जो अधिक फलदायी होगा।
शराब या मांसाहार का सेवन करना
शनि जयंती का दिन धार्मिक पवित्रता और सात्विकता का होता है। इस दिन शराब या मांसाहार का सेवन करने से शनि देव अत्यंत रुष्ट होते हैं। यह तामसिक भोजन शनि देव के सिद्धांतों के विपरीत है। इस दिन व्रत रखें या सात्विक भोजन ग्रहण करें, ताकि शनि देव की कृपा बनी रहे।
पश्चिम दिशा की यात्रा करना
शनि देव को पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है। इसलिए, शनि जयंती के दिन बहुत आवश्यक न हो तो पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। यह माना जाता है कि इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बाधाएं और अशुभ परिणाम मिल सकते हैं। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो हनुमान जी का नाम लेकर निकलें।
तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन
शनि जयंती का दिन पूरी तरह से सात्विक और पवित्रता का होता है। इस दिन मांस, मदिरा (शराब) और अन्य तामसिक आहार का सेवन भूलकर भी न करें। शनि देव को शुद्धता और सात्विकता प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि तामसिक भोजन करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शनि देव अप्रसन्न होते हैं। इस दिन केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करें।
गरीबों, कमजोरों या असहायों का अपमान
शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। उन्हें अन्याय, छल-कपट और किसी को सताना बिल्कुल पसंद नहीं है। शनि जयंती के दिन गरीबों, जरूरतमंदों, कमजोर लोगों या अपने कर्मचारियों/नौकरों का अपमान न करें। उनसे कठोरता से पेश आना या उनका हक मारना शनि देव को नाराज कर सकता है। इस दिन जितना हो सके, दूसरों की सहायता करें और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। दया, सेवा और परोपकार के कार्य शनि देव को अत्यंत प्रसन्न करते हैं।
बाल और नाखून काटना
कुछ मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती के दिन बाल और नाखून काटना अशुभ माना जाता है। यह एक ऐसा काम है जिससे बचना चाहिए। इस दिन शरीर की स्वच्छता का ध्यान रखें, लेकिन इन गतिविधियों से दूर रहें।
पुराने या अशुद्ध तेल का उपयोग/दान
शनि देव को सरसों का तेल अत्यंत प्रिय है और उन्हें तेल अर्पित करने या दान करने का विशेष महत्व है। लेकिन, ध्यान रखें कि शनि जयंती के दिन गंदा, बासी या अशुद्ध तेल का उपयोग या दान न करें। शुद्ध मन और नेक नीयत से साफ सरसों के तेल का दीपक जलाएं और जरूरतमंदों को दान करें। तेल का दान करते समय सावधानी बरतें और उसे गिरे नहीं।
क्रोध और नकारात्मक विचार
शनि जयंती के दिन शांत और सकारात्मक रहना चाहिए। क्रोध, ईर्ष्या, लालच या किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नकारात्मक विचार रखने से शनि देव अप्रसन्न हो सकते हैं और आपके कार्यों में बाधा आ सकती है। अपने मन को शांत रखें, मेडिटेशन करें और सकारात्मक ऊर्जा को अपने आस-पास बनाए रखें।
शनि जयंती पर क्या करें
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इन वर्जित कामों से दूर रहने के साथ-साथ आप शनि मंदिर में दर्शन करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल और उड़द दाल का दान करें। शनि चालीसा का पाठ करना और "ॐ शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इन बातों का ध्यान रखने से आप शनि देव के अशुभ प्रभावों से बच सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
लोहे या चमड़े की नई वस्तुएं खरीदना
शनि देव को लोहा और चमड़ा प्रिय माना जाता है, लेकिन शनि जयंती के दिन इन चीजों को खरीदना शुभ नहीं माना जाता। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई लोहे या चमड़े की वस्तुएं खरीदने से शनि देव नाराज हो सकते हैं और आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दिन शनि देव को लोहे या चमड़े की वस्तुएं दान करना अधिक शुभ माना जाता है।
किसी कमजोर या गरीब का अपमान करना
शनि देव को गरीबों, असहायों और श्रमिकों का संरक्षक माना जाता है। इसलिए, शनि जयंती के दिन भूलकर भी किसी गरीब, भिखारी या मजदूर का अपमान न करें। उन्हें प्रताड़ित करना या उनका हक मारना शनि देव को अत्यंत अप्रिय है। इस दिन ऐसे लोगों की मदद करना, उन्हें भोजन कराना या दान देना शनि देव को प्रसन्न करता है।
शनि देव से संबंधित कुछ वस्तुएं जैसे कि तेल (विशेषकर सरसों का तेल), नमक और सरसों के बीज को इस दिन खरीदने से बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन चीजों को खरीदने से घर में नकारात्मकता आ सकती है और शनि दोष बढ़ सकता है। इसके बजाय, आप इन चीजों का दान कर सकते हैं, जो अधिक फलदायी होगा।
शराब या मांसाहार का सेवन करना
शनि जयंती का दिन धार्मिक पवित्रता और सात्विकता का होता है। इस दिन शराब या मांसाहार का सेवन करने से शनि देव अत्यंत रुष्ट होते हैं। यह तामसिक भोजन शनि देव के सिद्धांतों के विपरीत है। इस दिन व्रत रखें या सात्विक भोजन ग्रहण करें, ताकि शनि देव की कृपा बनी रहे।
पश्चिम दिशा की यात्रा करना
शनि देव को पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है। इसलिए, शनि जयंती के दिन बहुत आवश्यक न हो तो पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। यह माना जाता है कि इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बाधाएं और अशुभ परिणाम मिल सकते हैं। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो हनुमान जी का नाम लेकर निकलें।
तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन
शनि जयंती का दिन पूरी तरह से सात्विक और पवित्रता का होता है। इस दिन मांस, मदिरा (शराब) और अन्य तामसिक आहार का सेवन भूलकर भी न करें। शनि देव को शुद्धता और सात्विकता प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि तामसिक भोजन करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शनि देव अप्रसन्न होते हैं। इस दिन केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करें।
शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। उन्हें अन्याय, छल-कपट और किसी को सताना बिल्कुल पसंद नहीं है। शनि जयंती के दिन गरीबों, जरूरतमंदों, कमजोर लोगों या अपने कर्मचारियों/नौकरों का अपमान न करें। उनसे कठोरता से पेश आना या उनका हक मारना शनि देव को नाराज कर सकता है। इस दिन जितना हो सके, दूसरों की सहायता करें और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। दया, सेवा और परोपकार के कार्य शनि देव को अत्यंत प्रसन्न करते हैं।
बाल और नाखून काटना
कुछ मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती के दिन बाल और नाखून काटना अशुभ माना जाता है। यह एक ऐसा काम है जिससे बचना चाहिए। इस दिन शरीर की स्वच्छता का ध्यान रखें, लेकिन इन गतिविधियों से दूर रहें।
पुराने या अशुद्ध तेल का उपयोग/दान
शनि देव को सरसों का तेल अत्यंत प्रिय है और उन्हें तेल अर्पित करने या दान करने का विशेष महत्व है। लेकिन, ध्यान रखें कि शनि जयंती के दिन गंदा, बासी या अशुद्ध तेल का उपयोग या दान न करें। शुद्ध मन और नेक नीयत से साफ सरसों के तेल का दीपक जलाएं और जरूरतमंदों को दान करें। तेल का दान करते समय सावधानी बरतें और उसे गिरे नहीं।
क्रोध और नकारात्मक विचार
शनि जयंती के दिन शांत और सकारात्मक रहना चाहिए। क्रोध, ईर्ष्या, लालच या किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नकारात्मक विचार रखने से शनि देव अप्रसन्न हो सकते हैं और आपके कार्यों में बाधा आ सकती है। अपने मन को शांत रखें, मेडिटेशन करें और सकारात्मक ऊर्जा को अपने आस-पास बनाए रखें।
शनि जयंती पर क्या करें
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इन वर्जित कामों से दूर रहने के साथ-साथ आप शनि मंदिर में दर्शन करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल और उड़द दाल का दान करें। शनि चालीसा का पाठ करना और "ॐ शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इन बातों का ध्यान रखने से आप शनि देव के अशुभ प्रभावों से बच सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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