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उज्जैन में जब निर्माण कार्यों के बीच आए हनुमान मंदिर: जानिए इतिहास, चमत्कार और चौंकाने वाले किस्से

Khade hanumaan Ujjain
उज्जैन के खड़े हनुमान जी के मंदिर और प्रतिमा को हटाने/शिफ्ट करने की कोशिशें नाकाम होने जैसी घटनाएं देश के कई अन्य शहरों में भी सामने आ चुकी हैं। उज्जैन में जब इस 1000 साल प्राचीन प्रतिमा को शिफ्ट करने का प्रयास किया गया, तो मशीनें खराब होने या जनआस्था/तकनीकी बाधाओं के चलते काम रोकना पड़ा। भारत के कई अन्य शहरों में भी फ्लाईओवर, हाईवे या रेलवे प्रोजेक्ट्स के दौरान जब हनुमान मंदिरों या प्रतिमाओं को हटाने की कोशिश की गई, तो चमत्कारिक परिस्थितियों या विरोध के चलते प्रशासन को अपना नक्शा बदलना पड़ा:-

1. नागपुर: फ्लाईओवर के बीच में आया मंदिर (मेकोसाबाग हनुमान मंदिर)

घटना: नागपुर में कड़बी चौक से मेकोसाबाग की तरफ फ्लाईओवर (पुल) का निर्माण किया जा रहा था। सड़क के ठीक बीचों-बीच एक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर आ रहा था।
क्या हुआ: शुरुआत में प्रशासन ने मंदिर को हटाने का निर्णय लिया, लेकिन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के कड़े विरोध व आस्था के कारण मंदिर हटाया नहीं जा सका।
समाधान: इंजीनियरों ने फ्लाईओवर का डिज़ाइन ही बदल दिया। फ्लाईओवर के बीच में पिलर की संरचना इस प्रकार बनाई गई कि मंदिर सड़क/पुल के बीच सुरक्षित बना रहा और ट्रैफ़िक उसके दोनों ओर से निकलने लगा।
 

2. दिल्ली: झंडेवालान की 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा

घटना: जब दिल्ली में ब्लू लाइन मेट्रो और फ्लाईओवर का निर्माण हो रहा था, तब 108 फीट ऊंची विशाल हनुमान प्रतिमा एलाइनमेंट के बीच में आ रही थी।
क्या हुआ: अदालत में भी प्रतिमा को एयरलिफ्ट या शिफ्ट करने की चर्चा हुई, लेकिन प्रतिमा का विशाल आकार और ज़मीन से जुड़ाव इतना गहरा था कि इसे बिना नुकसान पहुँचाए हिलाना असंभव पाया गया।
समाधान: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो ट्रैक का नक्शा मोड़ दिया (Curve दे दिया)। आज मेट्रो ट्रेन उस विशाल प्रतिमा के ठीक बगल से होकर गुजरती है।

3. लखनऊ: गोमती नदी का 'हनुमान सेतु'

घटना: 1960 के दशक में लखनऊ में गोमती नदी पर यूनिवर्सिटी के पास पुल बनाने का काम चल रहा था। बार-बार पिलर धंस जाते थे और ठेकेदारों को भारी नुकसान हो रहा था।
क्या हुआ: नीम करोली बाबा के परामर्श पर वहाँ संकटमोचन हनुमान मंदिर की स्थापना की गई।
समाधान: पुल का निर्माण रोकने या बदलने की जगह पुल के नक्शे को समायोजित कर मंदिर परिसर को उसमें शामिल किया गया, जिसके बाद ही वह पुल बन सका और उसका नाम 'हनुमान सेतु' पड़ा।
 

4. कानपुर: जीटी रोड फ्लाईओवर निर्माण की घटना

घटना: कानपुर में जीटी रोड पर चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण के दौरान सड़क किनारे स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर को हटाने की योजना बनाई गई।
क्या हुआ: लोकश्रुति के अनुसार जब बुलडोजर से निर्माण हटाने की कोशिश की गई, तो मशीनें बार-बार बंद होने लगीं।
समाधान: प्रशासन ने सड़क और फ्लाईओवर के रैंप का एलाइनमेंट थोड़ा साइड से निकाला, जिससे मंदिर आज भी अपनी जगह पर सुरक्षित है।

उज्जैन के 'खड़े हनुमान मंदिर' की मूर्ति को यदि ज़बरदस्ती हटाया गया, तो क्या होगा?

"उज्जैन के खड़े हनुमान जी की यह प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष पुरानी है। उस दौर में पाषाण की एक ही विशाल शिला (पाषाण खंड) को तराशकर मूर्तियाँ बनाई जाती थीं। वर्तमान में प्रतिमा का जितना भाग भूमि के ऊपर दिखाई दे रहा है, संभवतः उससे दोगुना हिस्सा ज़मीन के भीतर किसी बड़ी चट्टान के साथ इंटरलॉक (संलग्न) किया गया है।
 
ऐसे में यदि इस प्रतिमा को किसी क्रेन या अन्य भारी मशीन के माध्यम से ज़बरदस्ती हटाने का प्रयास किया गया, तो इसके टूटने की 100 प्रतिशत संभावना है। इससे न केवल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था खंडित होगी, बल्कि शासन-प्रशासन के पास भी पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचेगा।"
 
देशभर में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जब हनुमान मंदिरों के समक्ष प्रशासन को घुटने टेकने पड़े हैं और अपने निर्णयों को बदलना पड़ा है। अब इसे हनुमान जी का चमत्कार कहें या लोगों की अटूट आस्था—यह तो सभी जानते हैं कि हनुमान मंदिर के साथ छेड़खानी करने के क्या परिणाम होते हैं। ज़िम्मेदारों को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा है, और ऐसे किस्से-कहानियाँ भी भरे पड़े हैं।" 
 
 
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