Varalakshmi Vrat: वरलक्ष्मी व्रत की पूजा सामग्री और पूजा विधि
वरलक्ष्मी व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से ठीक पहले आने वाले शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। सुख-समृद्धि और आरोग्य प्रदान करने वाले इस पावन व्रत की संपूर्ण पूजन सामग्री और क्रमबद्ध विधि यहाँ व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत है।
आवश्यक पूजा सामग्री
पवित्र धातु व वस्त्र: कलश, जल का पात्र, लकड़ी की चौकी, लाल वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी और मौली।
पत्र-पुष्प व फल: आम के पत्ते, पान के पत्ते, दूर्वा, ताजे फूल, पुष्पमाला, नारियल और केले।
नैवेद्य व अभिषेक: दूध, दही, पंचामृत और जल।
श्रृंगार व अन्य सामग्री: माँ लक्ष्मी के लिए सोहल श्रृंगार (दर्पण, कंघा, सिंदूर आदि), धूप, घी का दीपक और कपूर।
स्थान शुद्धि व संकल्प
पूजा की शुरुआत में स्वयं और स्थान को पवित्र करें
प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान गणेश व माता वरलक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
कलश स्थापना
अक्षत की ढेरी पर मंगल कलश रखें
प्रतिमा के दाहिनी ओर अक्षत (चावल) की ढेरी बनाकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश के कंठ पर मौली बांधें, चंदन का तिलक लगाएं और उसमें आम के पत्ते व नारियल रखें।
षोडशोपचार पूजन व श्रृंगार
माँ लक्ष्मी व गणेश जी का विधिपूर्वक पूजन करें
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को जल से सांकेतिक स्नान कराएं। तत्पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करें। माँ को रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत, पुष्पमाला, दूर्वा, नारियल और सोहल श्रृंगार अर्पित करें।
भोग व मंत्र जाप
कम से कम 108 बार महालक्ष्मी मंत्र का जाप करें
देवी को पंचामृत, 9 प्रकार के फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। इसके बाद नीचे दिए गए किसी भी एक मंत्र की 1 माला (108 बार) का जाप करें:
- ॐ श्रीं श्रियै नम:
- श्री महालक्ष्म्यै नमः
- श्री ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- ॐ कमलवासिन्यै श्रीं श्रियै नम:
- श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
आरती, कथा व सुहाग सामग्री वितरण
संध्या समय पूजन का समापन करें
पूजन के बाद वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। कपूर से आरती करके प्रसाद सभी में बांटें। शाम को पुनः आरती के बाद सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग सामग्री और फल उपहार स्वरूप भेंट कर आशीर्वाद लें।

