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फलों से फैल सकता है निपाह वायरस!
निपाह वायरस से बचना है, तो फलों से रहें दूर
केरल के कोझिकोड में चमगादड़ से फैलने वाली घातक निपाह वायरस से कई लोगों की मौत की खबर आने के बाद देशभर में डर का माहौल है। इनसानों में निपाह वायरस का इंफेक्शन एंसेफ्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग को नुकसान होता है।
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5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस 3 से 14 दिन तक तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो 24-48 घंटों में मरीज कोमा में पहुंच सकते हैं ।
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इंफेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि कई मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी होती हैं। फिलहाल इस वायरस का इलाज खोजा नहीं जा सका है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए बचाव ही एकमात्र उपाय है।
निपाह वायरस से बचाव के तरीके:
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5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस 3 से 14 दिन तक तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो 24-48 घंटों में मरीज कोमा में पहुंच सकते हैं ।
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इंफेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि कई मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी होती हैं। फिलहाल इस वायरस का इलाज खोजा नहीं जा सका है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए बचाव ही एकमात्र उपाय है।
- फलों, खासकर केले और खजूर खाने से बचें। पेड़ से गिरे फलों को न खाएं। जब भी बाजार से कोई सब्जी या फल खरीदें, तो उसे अच्छे से गर्म पानी से धोकर खाएं।
- निपाह वायरस से पीड़ित लोगों से दूर रहें। यदि मिलना ही पड़े तो बाद में साबुन से अपने हाथों को अच्छे से धोएं।
- निपाह वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से दूर रहें। अंतिम संस्कार से पहले उनके शरीर को स्नान कराते समय सावधानी बरतें।
- खुले में टंगी मटकी वाली ताड़ी का सेवन करने से बचें।
