मनोज जरांगे ने 20 दिनों बाद खत्म की भूख हड़ताल, महाराष्ट्र सरकार को दिया 90 दिनों का अल्टीमेटम
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने आखिरकार 17 सितंबर को अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। हालांकि, आंदोलन वापस लेते हुए जरांगे ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटे हैं और उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए 90 दिनों का समय दिया है।
तबीयत बिगड़ने के बाद लिया फैसला
भूख हड़ताल के कारण मनोज जरांगे के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी। बुधवार तड़के बीड जिले के पातोदा में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें यात्रा रोकनी पड़ी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि जरांगे को गंभीर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो गई हैं, जिसके चलते उन्हें तुरंत इलाज कराने की सलाह दी गई थी।
मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में प्रदर्शन की नहीं दी अनुमति
जरांगे मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में जाकर आंदोलन करने की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस के अनुसार, जरांगे ने पहले लिखित रूप में आश्वासन दिया था कि वे सिर्फ 50 लोगों के साथ ही मुंबई आएंगे। हालांकि, जब वे जालना से मुंबई के लिए निकले, तो उनके साथ भारी भीड़ देखी गई, जिसे देखते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के अंदेशे में अनुमति नहीं दी गई।
क्या हैं मुख्य मांगें?
मनोज जरांगे लंबे समय से मराठा समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कोटे के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि मराठा समाज के पात्र परिवारों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार सतारा और औंध रियासत (राज्य) के पुराने ऐतिहासिक गजट को लागू करे, ताकि मराठा समुदाय को कानूनी रूप से ओबीसी का दर्जा और आरक्षण का लाभ मिल सके।
90 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए मराठा आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर सरकार ने इन मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को फिर से तेज किया जाएगा।

