NEET पेपर लीक: इंदौर में डटे 5 हजार छात्र, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, मिला LGBT और आम जनता का साथ
इंदौर। NEET पेपर लीक मामले को लेकर मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर का भंवरकुआं चौराहा बड़े आंदोलन का केंद्र बन चुका है। फ्लाई-ओवर के नीचे दिन-रात डटे 5,000 से अधिक छात्र-छात्राओं, परिजनों, वकीलों, कुछ संगठनों और आम नागरिकों का यह प्रदर्शन लगातार जोर पकड़ रहा है। आंदोलन की संवेदनशीलता को देखते हुए अब शहर की जनता खुद भोजन, चाय और पानी की व्यवस्था कर रही है, वहीं LGBT कम्युनिटी ने भी मैदान में उतरकर छात्रों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन जताया है। दिन-ब-दिन बढ़ती भीड़ के बीच उग्र होते इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों की अब केवल एक ही स्पष्ट मांग है—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा और देश के एजुकेशन सिस्टम में बड़े पैमाने पर रिफॉर्म।
फ्लाईओवर के नीचे दिन-रात डटे छात्र : गुरुवार सुबह से लेकर देर रात तक तांत्या भील चौराहे पर 'न्याय दो' और 'पेपर लीक के दोषियों को सजा दो' के नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें हैं- नीट पेपर लीक के मास्टरमाइंड्स पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। रात में जैसे ही एक जत्था आराम करने जाता, दूसरा ग्रुप माइक संभाल लेता। स्थिति यह रही कि देर रात तक शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग छात्रों को समर्थन देने भंवरकुआं पहुंचते रहे।
दिग्विजय सिंह और पटवारी ने की छात्रों से मुलाकात : बुधवार रात पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भंवरकुआं चौराहे पर चल रहे धरना स्थल पहुंचे थे। नेताओं ने वहां लगभग 30 मिनट रुककर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से सीधे चर्चा की। बातचीत के दौरान विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है।
मानवीय व्यवहार हों छात्रों के साथ : पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा का पेपर लीक होने की स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराया। दिग्विजय सिंह ने टेंट लगाने की अनुमति न दिए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि बारिश के समय विद्यार्थियों को फ्लाई-ओवर पुल के नीचे बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से छात्रों के साथ मानवीय व्यवहार करने का आग्रह किया।
दिल्ली में देखी पुलिस की बर्बरता : बता दें कि इंदौर के भंवरकुआ चौराहे पर पिछले 23 दिनों से हजारों छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इनमें से कई स्टूडेंट दिल्ली प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए भी गए हैं। कुछ ने वहां से लौटकर वहां स्टूडेंट के साथ हुई ज्यादती के बारे में भी बताया। छात्र पवन अहिरवार ने बताया कि दिल्ली में पुलिस ने स्टूडेंट के साथ मारपीट की। गलत तरह से बर्ताव किया। उन्होंने बताया कि मैंने कभी ऐसा नहीं देखा कि पुलिस ने किसी स्टूडेंट के साथ इस कदर बर्बरता के साथ बर्ताव किया हो।
इस्तीफा दो आंदोलन खत्म कर देंगे : अरूण बडोले ने बताया कि हम पिछले करीब 20 दिनों से इंदौर के भंवरकुआ चौराहे पर हजारों स्टूडेंट के साथ यहां बैठे हैं। मर जाएंगे पर यहां से उठेंगे नहीं। अब तो हमें आम लोगों का भी साथ मिलने लगा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही यह आंदोलन खत्म होगा।
दोस्त और भाई का सपोर्ट : पायल करोले ने बताया कि अपनी दोस्त के सपोर्ट में यहां आई हैं। कई स्टूडेंट भूखे हैं, प्यासे हैं। लेकिन लोग पानी और केले लेकर आ रहे हैं। लेकिन बेरहम सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है। अहंकारी सरकार छात्रों की नहीं सुन रही है। दिल्ली में स्टूडेंट के ऊपर लाठियां बरसाई जा रही हैं। मैं अपने दोस्त के लिए यहां आई हूं, ऐसे कई लोग हैं जो अपने दोस्तों के सपोर्ट में यहां पहुंचे हैं। विकास पचाया ने बताया कि वे तो ऑटो चलाते हैं, लेकिन उनकी पत्नी पढ़ाई करती है, उनके लिए वे आंदोलन में शामिल हुए हैं।
कुछ भी हो, झुकेंगे नहीं : बता दें कि छात्रों की आवाज में गुस्सा है, आंखों में भविष्य को लेकर फिक्र। वे अपने कॅरियर के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि उनके और उनके मां-बाप के सपने पूरे हों, जो लाखों रुपए उनके परिवारों ने कर्ज लेकर कोचिंग में फूंके कम से कम उनकी भरपाई हो सकें, लेकिन देश की भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ उनके चेहरे पर बेबसी साफ नजर आती है। वे नारे लगा रहे हैं, रो रहे हैं, चीख रहे हैं, लेकिन उनकी चीख से जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। उनका कहना है कि कुछ भी हो जाए, किसी भी हालत में झुकेंगे नहीं।
आंदोलन की खास बातें
कहां हो रहा प्रदर्शन: टंट्या भील चौराहा, भंवरकुआं (इंदौर का कोचिंग हब)।
प्रदर्शनकारियों की संख्या: करीब 5,000 से ज्यादा (छात्र, शिक्षक, अभिभावक व नागरिक)।
मुख्य मांग: पेपर लीक दोषियों पर कार्रवाई और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।
फ्लाईओवर के नीचे दिन-रात डटे छात्र : गुरुवार सुबह से लेकर देर रात तक तांत्या भील चौराहे पर 'न्याय दो' और 'पेपर लीक के दोषियों को सजा दो' के नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें हैं- नीट पेपर लीक के मास्टरमाइंड्स पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। रात में जैसे ही एक जत्था आराम करने जाता, दूसरा ग्रुप माइक संभाल लेता। स्थिति यह रही कि देर रात तक शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग छात्रों को समर्थन देने भंवरकुआं पहुंचते रहे।
दिग्विजय सिंह और पटवारी ने की छात्रों से मुलाकात : बुधवार रात पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भंवरकुआं चौराहे पर चल रहे धरना स्थल पहुंचे थे। नेताओं ने वहां लगभग 30 मिनट रुककर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से सीधे चर्चा की। बातचीत के दौरान विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है।
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छात्रों ने बताया कि प्रशासनिक निर्देशों के तहत उनके लिए भोजन, पानी और चाय की व्यवस्था करने वाले सहयोगियों को पुलिस थानों में बुलाकर परेशान किया जा रहा है। छात्रों से जानकारी मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भंवरकुआं चौराहे पर छात्र पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। यदि प्रशासन उनके साथ किसी प्रकार की ज्यादती या आंदोलन को कुचलने का प्रयास करेगा, तो कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगी।
मानवीय व्यवहार हों छात्रों के साथ : पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा का पेपर लीक होने की स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराया। दिग्विजय सिंह ने टेंट लगाने की अनुमति न दिए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि बारिश के समय विद्यार्थियों को फ्लाई-ओवर पुल के नीचे बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से छात्रों के साथ मानवीय व्यवहार करने का आग्रह किया।
इस्तीफा दो आंदोलन खत्म कर देंगे : अरूण बडोले ने बताया कि हम पिछले करीब 20 दिनों से इंदौर के भंवरकुआ चौराहे पर हजारों स्टूडेंट के साथ यहां बैठे हैं। मर जाएंगे पर यहां से उठेंगे नहीं। अब तो हमें आम लोगों का भी साथ मिलने लगा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही यह आंदोलन खत्म होगा।
दोस्त और भाई का सपोर्ट : पायल करोले ने बताया कि अपनी दोस्त के सपोर्ट में यहां आई हैं। कई स्टूडेंट भूखे हैं, प्यासे हैं। लेकिन लोग पानी और केले लेकर आ रहे हैं। लेकिन बेरहम सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है। अहंकारी सरकार छात्रों की नहीं सुन रही है। दिल्ली में स्टूडेंट के ऊपर लाठियां बरसाई जा रही हैं। मैं अपने दोस्त के लिए यहां आई हूं, ऐसे कई लोग हैं जो अपने दोस्तों के सपोर्ट में यहां पहुंचे हैं। विकास पचाया ने बताया कि वे तो ऑटो चलाते हैं, लेकिन उनकी पत्नी पढ़ाई करती है, उनके लिए वे आंदोलन में शामिल हुए हैं।
कुछ भी हो, झुकेंगे नहीं : बता दें कि छात्रों की आवाज में गुस्सा है, आंखों में भविष्य को लेकर फिक्र। वे अपने कॅरियर के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि उनके और उनके मां-बाप के सपने पूरे हों, जो लाखों रुपए उनके परिवारों ने कर्ज लेकर कोचिंग में फूंके कम से कम उनकी भरपाई हो सकें, लेकिन देश की भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ उनके चेहरे पर बेबसी साफ नजर आती है। वे नारे लगा रहे हैं, रो रहे हैं, चीख रहे हैं, लेकिन उनकी चीख से जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। उनका कहना है कि कुछ भी हो जाए, किसी भी हालत में झुकेंगे नहीं।
आंदोलन की खास बातें
कहां हो रहा प्रदर्शन: टंट्या भील चौराहा, भंवरकुआं (इंदौर का कोचिंग हब)।
प्रदर्शनकारियों की संख्या: करीब 5,000 से ज्यादा (छात्र, शिक्षक, अभिभावक व नागरिक)।
मुख्य मांग: पेपर लीक दोषियों पर कार्रवाई और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।
