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श्री गणेश चतुर्थी : भगवान श्री गणपति के 10 शुभ मंत्र और 5 उपाय
माह में दो चतुर्थी होती है। पहली कृष्ण पक्ष की संकष्टी और दूसरी शुक्ल पक्ष की विनायकी चतुर्थी होती है। दोनों का ही अलग अलग महत्व है। विनायकी चतुर्थी तिथि के दिन गणेशजी का जन्म हुआ था। फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी अंग्रैजी कैलेंडर के अनुसार 9 फरवरी गुरुवार के दिन आ रही है। इस दिन आप चाहें तो 10 में से किसी एक मंत्र से गणेशजी की पूजा करें और 5 उपाय आजमाएं।
गणेश मंत्र- Shri Ganesh Mantra
1. 'ॐ गं गणपतये नम:।'
2. 'श्री गणेशाय नम:'।
3. ॐ नमो विघ्नराजाय, सर्वसौख्य प्रदायिने
दुष्यारिष्ट विनाशाय पराय परमात्मने
लंबोदरं महावीर्यं, नागयज्ञोपज्ञोभितम
अर्धचंद्र धरम देहं विघ्नव्यूह विनाशनम्
ॐ ह्रां, ह्रीं ह्रुं, ह्रें ह्रौं हेरंबाय नमो नम:
सर्व सिद्धिं प्रदोसि त्वं सिद्धि बुद्धि प्रदो भवं
चिंतितार्थं प्रदस्तवं हीं, सततं मोदक प्रियं
सिंदूरारुण वस्त्रैश्च पूजितो वरदायक:
इदं गणपति स्तोत्रं य पठेद् भक्तिमाननर:
तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीं निर्मुंजति।
4. एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
5. वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ निर्विघ्नम कुरू मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।
6. 'ॐ गं गौं गणपतये विघ्न विनाशिने स्वाहा'
7. विघ्ननाशक मंत्र- गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः। द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥ विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्॥ विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्।
8. 'ॐ वक्रतुंडा हुं।'
9. 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।'
10. ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा।'
10 उपाय- 10 upay:
1. चतुर्थी के दिन गणपति जी के नामों का स्मरण करें, किसी भी गणेश मंदिर में विधि-विधान से पूजा करते हुए भगवान श्री गणेश के नाम लेने से वे प्रसन्न होते हैं।
2. श्री गणेश को घी-गुड़ का भोग लगाएं और वह भोग गाय को खिला दें, घर में आर्थिक रूप से खुशहाली आती है।
3. भूमि प्राप्ति के लिए संकटनाशन गणेश स्तोत्र और ऋणमोचन मंगल स्तोत्र के 11 पाठ करें, भूमि पाने के प्रबल योग बनेंगे।
4. श्री गणेश मंत्रों के साथ ही चतुर्थी के दिन श्री गणेश चालीसा, कनकधारा स्तोत्र, लक्ष्मी सूक्त का पाठ करें, संपत्ति पाने के अधिक योग बनेंगे।
5. कार्य पर जाने से पहले भगवान श्री गणेश को सिंदूर का तिलक लगाकर खुद अपने भी माथे पर तिलक लगाकर कार्य के लिए बाहर निकलें।
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