1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. Poem on Actor Ashutosh Rana
Last Updated : सोमवार, 10 नवंबर 2025 (17:08 IST)

अभिनय के ऋषि आशुतोष राणा

Ashutosh Rana
वो मंच पर नहीं,
जीवन के हर दृश्य में अभिनय करते हैं 
जहां सत्य संवाद बन जाता है
और संवेदना सबसे बड़ी पटकथा।
 
उनके चेहरे पर
अनुभव की नदियां बहती हैं,
हर शब्द में तप का ताप,
हर दृष्टि में करुणा की चमक।
वे किसी पात्र को नहीं निभाते,
उसमें प्राण भर देते हैं 
मानो शब्द उनके पास नहीं,
वे स्वयं शब्दों का जन्मस्थान हैं।
 
आशुतोष का होना
सिर्फ अभिनय नहीं, एक साधना है 
जहां हृदय से निकले संवाद
मनुष्य के भीतर की चुप्पी तोड़ते हैं।

mgid

उनकी मुस्कान में गहरा धैर्य है,
जो पीड़ा को भी सुंदर बना देता है।
 
उनके भीतर का गांव अब भी जीवित है 

aniview

जहां मिट्टी, मां और ममता
हर विचार के साथ चलती है।
प्रसिद्धि की ऊंचाइयों पर खड़े होकर भी
उन्होंने अपने कदमों को
संस्कार की धरती से जोड़े रखा है।
 
उनके शब्दों में शक्ति है,
जो शोर नहीं करती 
बस मन के भीतर उतरकर
विचार को नया आकार देती है।
वो मंच से उतरते नहीं,
हर जीवन में उतरते हैं 
जहाँ कोई उदास आत्मा
थोड़ी-सी रोशनी ढूंढती है।
 
उनकी उपस्थिति
संवाद नहीं, आशीर्वाद बन जाती है।
उनका कर्म, उनका चिंतन,
दोनों में एक ही पवित्रता है 
जैसे दीपक
अपने जलने से अंधकार को हराता है।
 
आज, उनके जन्मदिन पर
मन कहता है 
युगों-युगों तक ऐसे ही प्रकाशित रहें,
अभिनय की मर्यादा और
मानवता के प्रतिनिधि बनकर।
आपका जीवन
कला की नहीं, करुणा की गाथा है,
और इस गाथा का हर अध्याय कहता है 
सच्चा कलाकार वही,
जो मानवता को चरित्र बना सके।
 
आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं,
आपकी मुस्कान में सदा
सत्य की आभा और 
प्रेम की गूंज बनी रहे।
 
आपका स्नेहिल

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है।)

 
ये भी पढ़ें
काश! कटप्पा, बाहुबली को कट्टे से कनपटी पर मारता