हिन्दी कविता : लगता है...। Hindi Poem
लगता है कि
आसमान में चांद
छुपकर बादलों की
ओट में छुप गया है
शायद तुम छत पर निकल आई हो।
लगता है कि मोतियों की
माला इन्द्रधनुष बन
नीले आकाश पर छा गई है
शायद तुम खिलखिलाई हो।
लगता है आसमान में
काले मेघ छा गए हैं
शायद तुमने अपने लंबे काले गेसुओं को
लहराया है।
लगता है कि
ओस की बूंद गिर कर
सूरज की पहली किरण के साथ
फूलों पर गिरकर मुस्कराई है
या फिर तुमने संगीत का कोई मधुर स्वर गाया है।
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