मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
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कविता : ताजा घटनाक्रम पर दोटूक...

Current Events Poems
धरपकड़ नए/पुराने बैंककर्मियों की, दिन-दिन फैल रहा है जाल।
पिंजरे में है इतराने वाला, पी. चिदंबरम का लाल।।
अवसरवादी गठबंधन-मेकर, लालू हाल-बेहाल।
जान छुड़ाने मांग रहा माफी, अब बड़बोला केजरीवाल।।1।।
 
उपचुनावों की जीतों ने, जगा दिए हैं कितने सपने।
परंपरागत प्रतिद्वंद्वी भी, लगने लगे अपने-अपने।।
उधर नोटबंदी/जीएसटी का, बासी राग अलापने वाले।
तैयार नहीं हैं अब भी, जमीनी ठोस यथार्थ समझने।।2।।

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विपक्ष हो मजबूत इससे, कहिए किसको है इंकार।
अच्छे प्रजातंत्र में चाहिए, सचमुच दो दल दमदार।।

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पर यारों, मत अवसरवादी गठजोड़ों पर इतराओ।
(वर्तमान शासक दल और मोदी से नेता का)
विश्वसनीय विकल्प तो, कोई कर दिखलाओ तैयार।।3।।