1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. गुरु पूर्णिमा
  4. guru purnima katha 2023

गुरु पूर्णिमा के पीछे की कहानी क्या है?

maharishi ved vyas
इस वर्ष 3 जुलाई 2023 को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। गुरु पूर्णिमा मनाने के पीछे कारण यह है कि इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। 
 
आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा की कहानी- guru purnima katha
 
गुरु पूर्णिमा के संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के अंश स्वरूप कलावतार हैं। उनके पिता का नाम ऋषि पराशर तथा माता का नाम सत्यवती था। उन्हें बाल्यकाल से ही अध्यात्म में अधिक रुचि थी। 
 
अत: उन्होंने अपने माता-पिता से प्रभु दर्शन की इच्छा प्रकट की और वन में जाकर तपस्या करने की आज्ञा मांगी, लेकिन माता सत्यवती ने वेदव्यास की इच्छा को ठुकरा दिया। तब वेदव्यास के हठ पर माता ने वन जाने की आज्ञा दे दी और कहा कि जब घर का स्मरण आए तो लौट आना। इसके बाद वेदव्यास तपस्या हेतु वन चले गए और वन में जाकर उन्होंने कठिन तपस्या की। 
 
इस तपस्या के पुण्य-प्रताप से वेदव्यास को संस्कृत भाषा में प्रवीणता हासिल हुई। तत्पश्चात उन्होंने चारों वेदों का विस्तार किया और महाभारत, अठारह महापुराणों सहित ब्रह्मसूत्र की रचना की। महर्षि वेदव्यास को अमरता का वरदान प्राप्त है। अतः आज भी महर्षि वेदव्यास किसी न किसी रूप में हमारे बीच उपस्थित हैं। वेदव्यास को हम कृष्णद्वैपायन के नाम से भी जानते है। अत: हिन्दू धर्म में वेदव्यास को भगवान के रूप में पूजा जाता है। इस दिन वेदव्यास का जन्म होने के कारण इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। 

अगला लेख
मंगल का सिंह राशि में गोचर, जानिए क्या होगा देश दुनिया पर असर