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सद्भावना दिवस क्यों मनाया जाता है, क्या है सद्भावना दिवस प्रतिज्ञा
जानिए अब तक किसे मिल चुका है राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार
sadbhavana diwas 2023
क्यों मनाया जाता है सद्भावना दिवस
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था और राजीव गांधी की मृत्यु के एक वर्ष बाद सन् 1992 में इसी दिन राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार की स्थापना की गई थी। तमिलनाड़ु के पेरंबदूर शहर में 21 मई 1991 को एक आत्मघाती हमले में पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या हो गई थी। इसलिए 20 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर प्रतिवर्ष इस दिन को उनकी याद में मनाया जाता है।
क्या है सद्भावना दिवस की प्रतिज्ञा
'मैं ये पूरी गंभीर प्रतिज्ञा लेता/लेती हूं कि मैं जाति, क्षेत्र, धर्म और भाषा को बिना ध्यान दिये भारत के सभी लोगों की भावनात्मक एकात्मकता और सद्भावना के लिए कार्य करूंगा/करूंगी। और मैं कसम खाता/खाती हूं कि बिना हिंसा के संवैधानिक साधनों और बातचीत के द्वारा एक-दूसरे के बीच की दूरियों को अवश्य समाप्त कर दूंगा।'
राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार की स्थापना
उनकी हत्या के करीब एक साल बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने साल 1992 में राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार (Rajiv Gandhi Sadbhavana Award) की स्थापना की थी। राजीव गांधी 40 साल की उम्र में भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे।
राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार से जुड़े तथ्य
- देश में शांति एवं सद्भावना को बढ़ाने में योगदान देने के लिए हर साल राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार दिया जाता है।
- यह अवार्ड राजीव गांधी के जन्मदिन 20 अगस्त को प्रदान किया जाता है।
- यह अवार्ड ऐसे व्यक्ति या संस्था को दिया जाता है जिसने देश में एकता और शांति स्थापित करने और आतंकवाद को रोकने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो।
- इस अवॉर्ड में 10 लाख रुपए की राशी तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
- भारत का सबसे पहला राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार मदर टेरेसा को दिया गया था।
अब तक इन्हें मिल चुका है राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार
- सबसे पहला पुरस्कार 1992 में मदर टेरेसा को समाज सेवा के लिए दिया गया था।
- उसके बाद साल 1993 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को संगीत एवं समाज सेवा के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
- मोहम्मद यूनुस को 1994 में समाज उत्थान के लिए दिया गया था यह पुरस्कार।
- 1995 में जगन नाथ कौली को समाज कल्याण प्रशासक और भारत के SOS चिल्ड्रन विलेज के संस्थापक के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
- 1996 में लता मंगेशकर को भारतीय पार्श्व गायक के लिए यह अवॉर्ड दिया गया था।
- 1998 में सुनील दत्त को अभिनेता, राजनीतिज्ञ और शांति कार्यकर्ता के लिए पुरस्कार दिया गया।
- कला और इतिहास के विद्वान के लिए साल 2000 में कपिला वात्स्यायन को यह पुरस्कार दिया गया।
- 2003 में राष्ट्रीय युवा परियोजना के संस्थापक एस एन सुब्बा राव को यह पुरस्कार मिला।
- 2004 में स्वामी अग्निवेश को बंधुआ मजदूरी के खिलाफ काम किया आर्य सभा के संस्थापक के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।
- सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाओं, आदिवासियों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए काम करने वाली निर्मला देशपांडे को 2006 में यह अवॉर्ड दिया गया।
- असम से सांप्रदायिक सद्भाव कार्यकर्ता, हेम दत्ता को 2007 में यह अवॉर्ड दिया गया था।
- 2008 में एन राधाकृष्णन को सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और प्रोफेस के लिए पुरस्कार दिया गया था।
- गौतम भाई को 2009 में सामाजिक कार्यकर्ता और पौनार आश्रम के सदस्य के लिए अवॉर्ड दिया गया।
- 2010 में वहीदुद्दीन खान को इस्लामी विद्वान और शांति कार्यकर्ता के लिए यह अवॉर्ड दिया गया था।
- युवाओं के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्पिक मैके को 2011 में यह अवॉर्ड दिया गया था।
- 2012 में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर) के संस्थापक और विकलांगों के लिए मुफ्त अंग प्रदान करने के लिए डी. आर. मेहता को पुरस्कार दिया गया था।
- 2013 में संगीतकार अमजद अली खान, 2014 में फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली और 2016 में गायक शुभा मुदगली को यह पुरस्कार मिल चुका है।
- 2017 में पूर्व क्रिकेटर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, एम गोपाल कृष्ण को भी यह पुरस्कार मिल चुका है।
- 2018 में सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और सद्भावना के लिए गोपालकृष्ण गांधी को भी यह अवॉर्ड मिल चुका है।
