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Diwali 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों मनाई जाती है काली चौदस और मां काली को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय

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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली के नाम से जाना जाता है। इसी पावन रात्रि में 'काली चौदस' का पर्व मनाने की परंपरा है। जब चतुर्दशी तिथि रात्रि में प्रदोष काल और निशिथ काल (मध्यरात्रि) में व्याप्त होती है, तब महाकाली की यह विशेष पूजा संपन्न की जाती है।
 

काली चौदस 2026: शुभ तिथि व निशिथ काल मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 07 नवंबर 2026 (शनिवार)- सुबह 10:47 बजे से
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 08 नवंबर 2026 (रविवार)- सुबह 11:27 बजे तक
काली चौदस निशिथ काल (पूजा मुहूर्त): 07 नवंबर की मध्यरात्रि 11:39 PM से 08 नवंबर की रात 12:31 AM तक.
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लोक परंपराएं और क्षेत्रीय महत्व:-

गुजरात (भूत चतुर्दशी): पश्चिमी राज्यों, विशेष रूप से गुजरात में, इसे 'भूत चतुर्दशी' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तंत्र साधना और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा के अनुष्ठान किए जाते हैं।
पश्चिम बंगाल (काली पूजा): बंगाल में मां काली की विशेष पूजा दिवाली के मुख्य दिन होती है। इस दिन को माता काली के अवतरण दिवस के रूप में श्रद्धाभाव से मनाया जाता है।
शत्रु विजय व श्मशान पूजा: काली चौदस की मध्यरात्रि में मां काली के साथ-साथ वीर वेताल की भी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि मां काली के पूजन से साधक को शत्रुओं पर विजय मिलती है और हर प्रकार के डर से मुक्ति प्राप्त होती है।
 

काली चौदस के 5 विशेष उपाय (जो दूर करेंगे हर संकट):-

चौमुखी दीपक से नकारात्मकता नाश: काली चौदस की रात घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा सा काला तिल डालें। इससे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर दूर होती है।
 
शत्रु बाधा व भय मुक्ति के लिए: मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त में मां काली को गुड़, लाल पुष्प (गुड़हल) और सरसों का तेल अर्पित करें। 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करने से गुप्त शत्रुओं का भय समाप्त होता है।
 
काले तिल व लौंग का उपाय: एक नीबू पर चार लौंग गाड़कर मां काली के चरणों में रखें और पूजा के बाद उसे घर के बाहर किसी एकांत स्थान पर फेंक दें। इससे हर प्रकार के टोने-टोटके और बुरी नजर का असर समाप्त हो जाता है।
 
अकाल मृत्यु व संकट टालने के लिए: इस रात घर के सबसे अंधेरे कोने में यम और महाकाली के नाम का दीपक जलाएं। इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
 
आर्थिक बाधा दूर करने हेतु: काली चौदस की शाम को किसी मंदिर में या पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और गरीबो में काले तिल या उड़द की दाल का दान करें। इससे रुका हुआ धन वापस मिलता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
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