भविष्यवाणी: क्या POK जल्द बनेगा भारत का हिस्सा? ग्रह-नक्षत्र क्या दे रहे हैं संकेत
कालयुक्त सिद्धार्थ संवत्सर 19 मार्च 2026 तक रहा इसके पूर्व वर्ष 2025 में भारत और पाकिस्तान का एक युद्ध हो चुका हो चुका है जिसमें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 में रौद्र नामक संवत्सर चल रहा है जो 07 अप्रैल 2027 तक रहेगा। पूर्व के दोनों ही संवत्सरों में भारत के लिए घटना दुर्घटना और हिंसक आंदोलन का समय रहा है और अभी जो रौद्र संवत्सर चल रहा है इसमें 07 अप्रैल 2027 का समय भारत के लिए ठीक नहीं है।
रौद्र संवत्सर:
रौद्र संवत्सर का राजा गुरु, मंत्री मंगल और सेनापति चंद्र है। मंगल के मंत्री होने के चलते एक और जहां युद्ध हो रहे हैं वहीं गुरु के राजा होने के चलते शांति और समृद्धि के कार्य भी हो रहे हैं। गुरु के कारण शिक्षा से जुड़े लोगों में असंदोष के चलते शिक्षा और तकनीक में बढ़े बदलाव हो रहे हैं और आगे भी होंगे, लेकिन सबसे बड़ी बात यह कि गुरु अतिचारी हैं और मंगल पॉवरफूल होने के कारण देश और दुनिया में आंदोलन और युद्ध का दौर जारी रहेगा। रौद्र संवत्सर देश और दुनिया में नरसंहार को लेकर आया है जो जारी है। इस संवत्सर के प्रारंभ में ही ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि पाकिस्तान के टूकड़े हो जाएंगे जो कि हम देख ही रहे हैं। बलूचिस्तान और पीओके में नरसंहार जारी है। दूसरी और खैबर पख्तून खां भी अलग होने की तैयारी कर चुका है।
दुर्मति संवत्सर:
अभी 07 अप्रैल 2027 तक भारत का पाकिस्तान के साथ एक और संघर्ष होने की आशंका जताई जा रही है। 7 अप्रैल 2027 के बाद से दुर्मति नामक संवत्सर प्रारंभ होगा। दुर्मति का अर्थ बुरी बुद्धि, दुष्ट बुद्धि, कुमति या नासमझी होता है। इस संवत्सर में प्राजा की बुद्धि भ्रष्ट होकर जाएगी। वैसे भी सोशल मीडिया आग में घी डालने का काम कर ही रहा है।
इस संत्सर के राजा बुध और मंत्री भी बुध होंगे लेकिन सेनापति मंगल होंगे जो भारत को एक बड़े युद्ध में ले जा सकते हैं। जब सेनाधिपति मंगल होते हैं, तब मनुष्य विभिन्न प्रकार के दुख एवं वियोग से पीड़ित होता है। राजा एवं प्रजा के मध्य संघर्ष, गतिरोध एवं अनावश्यक असंतोष की स्थितियां बनती हैं। व्यापारी उद्योग आदि में अल्प निवेश करते हैं। लाभ न्यूनतम होता है। भूलोक पर जल एवं धन-धान्य का अभाव होता है, लेकिन बुध का राजा होने के कारण थोड़ा बहुत कंट्रोल में भी हो जाता है।
भारत और भारत के प्रधानमंत्री की कुंडली में मंगल की महादशा:
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है जो सितंबर 2028 तक रहेगी। नरेंद्र मोदी की कुंडली में मंगल की महादशा के अंतर्गत तृतीय और चतुर्थ भाव के कारक शनि की अंतर्दशा चल रही है जो पंचम भाव में राहु के साथ गोचर कर रहे हैं। इससे ज्ञात होता है कि निकट भविष्य में पीएम मोदी सोच समझकर और धैर्यपूर्वक कोई बड़ा निर्णय लेने वाले हैं।
दूसरी ओर भारत की कुंडली में भी मंगल की महादशा चल रही है जो 31 मार्च 2025 से प्रारंभ हुई थी। यह दशा 2032 तक रहेगी तब तक भारत अपने पराक्रम का प्रदर्शन संपूर्ण विश्व में करके अपनी पताका लहराएगा। भारत के खिलाफ कोई भी शक्ति सफल नहीं हो पाएगी। संभवत इसी या अगले संवत्सर में भारत एक बड़े युद्ध को छेड़ सकता है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि 28 दिसंबर 2027 भारत अपने खोए हुए क्षेत्र पीओजेके (POJK) पर कब्जा कर सकता है। हालांकि भारत को आंतरिक मोर्चे पर एक बड़ी साजिश का शिकार भी होना पड़ सकता है क्योंकि अगले वर्ष दुर्मति संवत्सर प्रारंभ होगा।
अधिकतर ज्योतिषियों का मानना है कि मई 2027 से लेकर जुलाई 2028 तक गुरु की चतुर्थ भाव में गति के चलते भारत की सीमाओं में बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे और पाकिस्तान नाम का देश धरती पर नहीं रहेगा।

