कविता: एक भीनी सी खुशबू हूं, हवाओं में घुल जाने दो मुझे एक भीनी सी खुशबू हूं, हवाओं में घुल जाने दो मुझे। आसमान को छूता परिंदा हूं उड़ जाने दो मुझे।।