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लॉक डाउन के साइड इफेक्ट्स-3 : पुरुष वर्ग की बदलती सोच और जिम्मेदारियों का अहसास
पुरुष वर्ग का यह बदला हुआ रूप और व्यवहार क्या कभी देखा जा सकता था , मतलब घर पर रहकर बर्तन मांजना , झाड़ू पोछा लगाना , ... -
लॉक डाउन के साइड इफेक्ट्स- 2 : प्रकृति के नए रंग रूप
विश्वस्तर पर लगे इस लॉक डॉउन ने कुदरत को उसका असली चेहरा वापिस लौटा दिया है। हमें इससे सबक लेना चाहिए कि यदि हम कुदरत ... -
लॉक डॉउन के साइड इफेक्ट्स - 1
अधिकतर लोग मदद कर रहे हैं , जिसका पुण्य उन्हीं को ही मिलेगा, यह सब करने से ज़रूरतमन्दों की मदद तो होती ही है, ख़ुद को ... -
परीक्षा के दिनों में सहायक होगा यह आलेख : परीक्षा और मस्तिष्क
स्कूली बच्चों ने अपनी-अपनी कक्षा की अंतिम और निर्णायक परिक्षाओं के लिए उल्टी गिनती गिननी शुरू कर दी है। कक्षा एक, ... -
अपने सपनों को जिएं
हम सभी लोग सपने देखते हैं। नींद में देखे गए सपने हमारी कल्पनाएं और कभी हमारी चिंताएं होती हैं। इन सपनों को हम सुबह उठते ... -
हिन्दी दिवस विशेष : क्या हिन्दी पर शर्म है!
क्या आपको शर्म महसूस होती है कि आप अच्छी इंग्लिश नहीं बोल पाते या आपको अपने बच्चे का एडमिशन कराना है एक अच्छे पब्लिक ... -
कैसे बनेगा मेरा भारत महान
कैसे बनेगा मेरा भारत महान...!! जिसकी राजधानी दिल्ली में कचरे के ढेर पहाड़ के रूप ले चुके हैं। किसी की कोई जिम्मेदारी ... -
चलो गांव चलें हम...
हमारा भारत देश कभी कृषि प्रधान देश कहलाता था। ज्यादा आबादी गांवों में ही बसती थी। पर पिछले कुछ दो-एक दशकों में भारत की ... -
कविता : भावनाओं का अपलोड
डिलीट होती जा रही भावनाओं और संवेदनाओं का बैकअप शायद किसी ने भी नहीं रखा है -
कविता : हवाएं करती हैं प्रतीक्षा
हवाएं करती हैं प्रतीक्षा किसी सुगंध के आने की ताकि वो भी सुगंधित हो सकें चांद करता है प्रतीक्षा -
उफ्फ कितनी गर्मी है!
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वैशाख एवं ज्येष्ठ का माह भारत में ग्रीष्म ऋतु कहलाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार माह अप्रैल ... -
संतुष्टि क्या है ?
संतुष्टि' एक बड़ा ही प्यारा और आनंदित कर जाने वाला शब्द है। संतुष्टि मस्तिष्क की उस अवस्था को दर्शाता है, जब भीतर से ... -
व्यंग्यात्मक काव्य : चलो अब कुछ बड़े हो जाते हैं
छोड़ देते हैं मस्तियों को, नादानियों को नहीं देखते उन सपनों को जो सूरज और चांद को छूने का दिलासा दिलाते हैं दबा देते ... -
हिन्दी कविता : आजकल
आजकल बचाने वाले कम हैं, मारने वाले ज्यादा हो गए हैं, हर कोई नजर गड़ाए बैठा है -
अपने जीवन की किताब के आप खुद लेखक हैं...!!
हमारी जिंदगी का हर दिन हमें एक नया पाठ पढ़ा कर जाता है। रोज कितने ही किस्से जुड़ते हैं...कुछ भूल जाने वाले और कोई कोई मन ... -
हिन्दी कविता : चांद की आंखों में
चांद की आंखों में भरा हुआ है, चांद का सारा पानी, पृथ्वी का एक अकेला चांद, देखता है पूरी पृथ्वी का पानी सूख गया है -
नारी जीवन : नारी पर आधारित कविता
नारी जीवन....आंखों से रूठी नींद, बोझिल सी पलकें, पहाड़-सी जिम्मेदारियां ढोती -
नारी पर कविता : मैं नारी...
जितना घिसती हूं, उतना निखरती हूं, परमेश्वर ने बनाया है मुझको, कुछ अलग ही मिट्टी से -
हिन्दी कविता : खनकती ख्वाहिशें....
पर्स में रखे चंद नोटों और कुछ खनकते सिक्कों जितनी ही बच गई हैं ख्वाहिशें और दिन चढ़ते वो भी हो जाती हैं पराई -
स्त्री जीवन की मार्मिक कहानी : खूबसूरत घाव
एक बड़ा सा आलीशान पुराना घर था। वहां करीब चालीस बरस की एक औरत अपने पति, एक बेटे और एक बेटी के साथ रहती थी। उसके चेहरे ...
