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पुस्तक समीक्षा : धूप का छोर, भाव-भीने दोहों का आकर्षक संग्रह
धूप का छोर : जैसे सुहानी भोर, जैसे बीता हुआ वह दौर रचनाकार एवं कवि सीमा पांडे मिश्रा “सुशी” द्वारा रचित पुस्तक “धूप ... -
संत कबीर : कबीर ने समाज की दुखती रग को पहचान लिया था...
इतिहास गवाह है, आदमी को ठोंक-पीट कर आदमी बनाने की घटना कबीर के काल में, कबीर के ही हाथों हुई। कबीर ने समाज की दुखती रग ... -
World Hijab Day विश्व हिजाब दिवस क्यों मनाया जाता है?
काले हिजाब में से झांकती दो चमकती आंखें बहुत सवाल करती हैं, हंसती हैं, बोलती हैं, नम होती हैं, गुनगुनाती हैं और देख ... -
आखिर जिम जाने वाले फिट लोगों को क्यों आता है इतना घातक हार्ट अटैक
दिन रात आजकल यह एक शब्द फिटनेस हर कहीं सुनाई देता है.... फिर कोई खबर आती है किसी युवा की ... और सब सकते में कि ... -
मोहब्बत बरसा देना तुम, सावन आया है …
ओ हरीश-चन्द्र! मेरे बच्चोँ के साथ खेलेंगे तेरे बच्चे! अभी ही नया झूला लगाया है अम्मा की छत पे। और तू तो मेरी देवरानी ... -
पप्पा ! तुम घबराना मत, मैं फिर भी जीत के आउंगी
फादर्स डे पर सहबा जाफरी की मर्मस्पर्शी कविता- पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, ... -
world bicycle day : तुम लौट आओ कि मेरी मीठी घंटी गुनगुनाने को बेताब है....
world bicycle day इस दिन को मनाने का श्रेय अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफ़ेसर लेज़ेक सिबिल्स्की को ... -
आवाज़ बढ़ा दे ज़रा, लता दीदी का गाना है...
मैं खुद को फिलिप्स का अपना रेडियो सेट बाहों में भरे फर्स्ट ईयर की अभी अभी जवान हुई लड़की सा महसूस करने लगी, कानों में ... -
इब्ने मरियम हुआ करे कोई : ईसा मसीह की इस्लामिक अवधारणा
गूगल के सर्वे के अनुसार ईसा दुनिया भर की दस असरंदाज़ शख्सियतों मे से एक हैं जिनका होना लोगों के दिलों को बदलने के लिए ... -
हिन्दी दिवस पर कविता : मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुमने बचपन खेला...
मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम जीवन साज पे संगत देते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम, भाव नदी का अमृत पीते मैं वह भाषा ... -
कबीर जयंती : वक्त की सीढ़ियों पर लेटे हैं इस सदी के कबीर हैं हम लोग...
कबीर वाकई अपने आने वाले समय की अमिट वाणी थे। कबीर का जन्म इतिहास के उन पलों की घटना है जब सत्य चूक गया था और लोगों को ... -
कबीर पर एक उम्दा गज़ल : हर एक हर्फ को खुशबू में फिर भिगोते हैं
हर एक लफ्ज जो अपने लहू से धोते हैं हर एक हर्फ को खुशबू में फिर भिगोते हैं न हो मुश्क तो मुअत्तर(भीगा) है ये पसीने ... -
फादर्स डे पर मर्मस्पर्शी कविता : आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी
पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी तुमने ही तो सिखलाया था, ... -
World Bicycle Day Special : सुनो, मैं साइकिल इधर स्टोर में पड़ी हूँ....
हाँ! रखी हूँ आज स्टोर रूम में। नहीं बची कोई जगह तुम्हारे घर में मेरे लिए। जालों ने घेर लिया है मुझे। और छिपकलियां रोज़ ब ... -
प्यारी आयशा, तुम अकेली थी तो दुनिया को महकाती...
आयशा क़ुदरत् ने औरत को बड़ी मजबूती दी होती है। दुनिया में आने की जद्दोज़हद में अक्सर मर्द दम तोड़ जाते हैं, और बेटियां ... -
मकर संक्रांति : सूर्य के स्वागत में सजता सृजन और समर्पण का उत्सव
बहुत सुन्दर त्योहारों की मनोहर धरा का नाम है भारत। सकारात्मकता एवं सहज अनुभूतियों को समेट कर जीने वाले भोलेभाले लोग एवं ... -
Christmas Special : ऐ इब्न-ए-मरियम! जल्दी आओ...
ऐ परमेश्वर की रूह! वक्त तुम्हारी आमद का है, और बच्चे- बूढ़े सभी तुम्हारे मुन्तजिर हैं तो आते वक्त अपने पमेश्वर से उस ... -
अलविदा राहत : गज़ल ने आपके नाम की मेहंदी रचाई थी...
राहत ! अदबी दुनिया की राहत, ज़िंदगी के दर्द से थके उम्र के मारों की राहत, गुस्से मे उबलते और सिस्टम से नाराज़ ज़हनों की ... -
Fathers Day Poem : पापा मेरी नन्ही दुनिया
poem on father - पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी, आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी -
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर विशेष: चाय एक महबूबा सी....
मां को चाय बिलकुल पसंद नहीं, पापा सुबह चाय की जगह छाछ पीते हैं, अक्सर जब हम भाई बहन चाय पीतें हैं, दोनों नाक भौंह ...
