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प्रवासी कविता : देशप्रेम तुम्हारा
जनता पूछती सरकार से, सरकार पूछती जनता से, विपक्ष पूछता सत्ता से, कहता सरकारी फ़ैसले ग़लत, जनता का फ़ैसला भी ग़लत, देश किससे ... -
प्रवासी कविता : कैलिफोर्निया की सर्दी
प्यासी थी धरती और प्यासा अंबर, पीली धूप में, पीली धरती पीला अंबर हमदम, हमसफ़र ऋतु की सखी पत्तियां, करें काम दिन-रात, न ... -
नए साल पर कविता : हम तुम किसी से कम नहीं
आ री सखी ! तू क्यों उदास है किस बात का ग़म है, क्या हम-तुम किसी से कम हैं जीवन में सर्दी से घबरा रही है, देख सखी री, ... -
प्रवासी कविता : मैं भारतीय हूं
यह अनमोल जिंदगी, इसकी अपनी पहचान है, जब इसने जन्म लिया, पतन हुआ गुलामी का, यह एक गर्वित एहसास है आजादी का, इसका अपना ... -
'भारत काव्य पीयूष' कवियों द्वारा राष्ट्र-वंदन का अनूठा दस्तावेज
वर्ष 2022 में भारत अपनी स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो अमृत महोत्सव के नाम से जाना जा रहा है। इस अवसर पर ... -
प्रवासी कविता : तुझसे ही पाया है जीवन
Poem on Bharat Maa सीता-सा आह्वान कर, तुम्हारी छवि मन में उतारूं, मेरे विश्वास का तिनका जिसे थाम मैं प्रार्थना करती, ... -
भारत अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रकाशित 'भारत काव्य पीयूष' काव्य संग्रह में रेखा भाटिया की 2 कविताएं
Azadi Ka Amrit Mahotsav भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्षों के पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे 'अमृत महोत्सव' के अवसर ... -
प्रवासी कविता : मन उदास हो उठता है
रह रह कर मन उदास हो उठता है, एक अंधेरे कोने में सिमटने लगता है हजार दुख छिपाकर एक खुशी मनाएं कैसे, मां ठीक है लेकिन ... -
मनोरंजक प्रवासी कविता : पिकनिक
एक सुबह सुहानी खिल आई इठलाती, नभ ललचाए आ बैठे सुबह की गोद में, धूप देख शरमा पड़ी, सूरज हो गया रुआंसा, गगन की मादकता से ... -
शार्लिट शहर के 'साहित्य संगम' ग्रुप की पहली कविता गोष्ठी का आयोजन संपन्न
अमेरिका की स्टेट नॉर्थ कैरोलाइना के शार्लिट शहर के 'साहित्य संगम' ग्रुप की पहली कविता गोष्ठी की रिपोर्ट यहां पेश की जा ... -
मेरी, मेरे शहर शार्लिट और हिन्दू सेंटर की कहानी
कैसे एक व्यक्ति की सोच, उठाया गया एक सार्थक कदम और प्रयास भविष्य निश्चित कर, अस्तित्व को मजबूत कर, सभी को एकजुट कर सभी ... -
प्रवासी कविता : रिश्ते पीड़ा भोगते हैं
जब सहन करते हैं, जब मर्यादा उलांघते हैं, जब आकांक्षाएं ऊंची रखते हैं, जब उम्मीदों को ठुकराते हैं, जब चाल चल जाते हैं -
लता मंगेशकर पर कविता : लता एक मीठी नदी
एक समुंदर पानी का, एक समुंदर रेत का, एक जमीन बंजर एक पहाड़ विशाल, मध्य जीवन रिक्त है -
प्रवासी हिंदी कविता : जिंदगी के चार पाए
स्वास्थ, सद्बुद्धि, हिम्मत, मेहनत, चार पाए हैं ऐसी खटिया के जिन पर टिक कर, आराम से कटती है जिंदगी -
प्रवासी कविता : तस्वीरें चिढ़ा रही हैं
आज मेरी तस्वीरें चिढ़ा रही हैं मुझे, जब मैं उनसे नजरें मिला रही हूं कुछ पुरानी तस्वीरें कॉलेज के दिनों की, प्रयोगशाला ... -
यात्रा अनुभव : होम स्वीट होम
आज अरसे बाद घर लौटी हूं। घर जी हां, घर अपना घर, वफादार घर जिसकी छत के नीचे आकर एक अजीब-सा अपनापन महसूस होता है। अभी-अभी ... -
पुस्तक समीक्षा : दृश्य से अदृश्य का सफ़र, एक बेहतरीन उपन्यास
मनुष्य जीवन और रिश्ते अत्यंत जटिल होते हैं। मनोविज्ञान के अनुसार परिस्थिति के, सोच के, वातावरण के, मनुष्य के साथ हुए ... -
प्रवासी कविता : पदक की यात्रा
आज बदली है सोच बदला है जमाना, दावे तो कई हैं फिर भी एक पदक ना ला सकी बेटी, कइयों के मुंह खुल गए, कइयों ने सांत्वना भी -
पितृ दिवस पर कविता : हर सुबह का सूरज हैं आप
मुझे ऐसा लगे हर सुबह का सूरज आप हैं, अथाह समुंदर कोई और नहीं आप ही हैं पापा, पृथ्वी के माथे लगा चंद्र भी आप हैं, खिली ... -
हिन्दी कविता: तुम्हारा-मेरा रिश्ता
मेरा उससे कोई नाता नहीं ना मैंने उसे देखा है कभी फिर भी वह लगती है अपनी दूर बैठी लगती है करीब-सी संसार छोटा होता जा ...
