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एक दिन थक जाओगे तुम : हिन्दी कविता
एक दिन तुम थक जाओगे लड़ते लड़ते ईर्ष्या करते करते द्वेष में कुढ़ते कुढ़ते बदले की भावना में सुलगते सुलगते तब ... -
लफ्ज़ों की नरमी पे मत जाना कभी : नई ग़ज़ल
ज़िंदा तो इंसानी खाल में है आदमी भीतर पर अलग हाल में है आदमी अपने आप से बहुत अलग है वो जाने किसकी खाल में है ... -
तमाशा देखती भीड़, हिंसक और कायर होते समाज के बीच बच्चियां
हम कैसे समय में जी रहे हैं? जहां संवेदनाएं पहले ही मृत हैं। एक युवा बच्ची की खुलेआम हत्या हो जाती है और आसपास के लोग भय ... -
भारतीय होने की वजह से एक नैतिक जिम्मेदारी हमारे कंधों पर भी है
आयकर विभाग में जब एक लड़की निर्णय के अंकों के जोड़ के लिए कैलकुलेटर देने आई तो मुझे हैरानी हुई। 100 नंबर के जोड़ के लिए ... -
प्रेम दिवस पर प्यार के ढाई आखर की पूंजी सहेजना जरूरी है
आइए आज प्रेम पर बात करते हैं। मदनोत्सव मनाने वाले देश में प्रेम पर बात करना वर्जित है। आप यदि किसी से प्रेम करते हैं तो ... -
ऋतुराज बसंत : कल,आज और कल
ऋतुराज बसंत का आगमन ....आह !कैसा अनोखा जीवन सुख है पतझर की गहन नीरवता के बाद मीठे कंठ का सुरीला गायन । उदासी के सारे ... -
पृथ्वी दिवस पर कविता : सोचो क्यों कर जिए जा रहे हैं?
सोचो ज़रा अगर हम पेड़ होते जग को ठंडी छांह देते फल,पत्ते,लकड़ी भी कितने उपयोगी होते....!! नन्ही चिरैय्या अगर ... -
महिला दिवस पर कविता : घर में भी थी एक उदास औरत
उनकी विजयी मुस्कान !! बहुत भली सी लगतीं हैं हँसने मुस्कुराने वाली ये औरतें टी.वी. के पर्दे पर सिनेमा के बड़े पर्दे ... -
हिन्दी दिवस : निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
गर्व होता है न हमारी राष्ट्र की भाषा पर। आज हिन्दी दिवस है। भारत में हिन्दी बोलने का दिन। अपने देश में अपनी ही भाषा के ... -
कविता : हर एक ग़म को हर्फ़ में ढाला था
हर एक ग़म को हर्फ़ में ढाला था किसे कहां पता भीतर हाला था लब की शोख हंसी चेहरे का नूर ख़ुद को तपा कर उसने ढाला था -
31 मार्च : मीना कुमारी की पुण्यतिथि पर विशेष
मीना कुमारी ....अदाकारा..शायरा..31मार्च पुण्यतिथि...आप सबने जाना है फिल्मों के ज़रिए ..लफ्ज़ों में मीना ने क्या ... -
कविता: कोई अमृता साहिर पर नहीं मर मिटती...
सब इतिहास की तरह ज़माने के सामने हैं -
23 अप्रैल विश्व पुस्तक दिवस : पुस्तकें कभी धोखा नहीं देती
23 अप्रैल, विश्व पुस्तक एवं स्वत्वाधिकार दिवस। एक विशेष दिन, जो बताना चाहता है कि जीवन में सबसे अच्छा मित्र यदि कोई है ... -
बाल दिवस 2019: अपने भीतर के बच्चे को मुरझाने न दें, खिलने खिलखिलाने दें
जीवन में उम्र के लम्हे जितने बढ़ते जाते हैं हम धीरे-धीरे समझदार होने की कवायद में लग जाते हैं। एक बच्चे को कभी छल कपट ... -
दीपावली 2019 : दीपों का प्रकाश और कुछ जरूरी सवाल
हम भारतीयों को एक बार आत्मचिंतन अवश्य करना चाहिए। देशप्रेम का राग अलापने और महानता का ढोल पीटने के बजाय एकबारगी एक नजर ... -
दीपावली पर कविता : माटी के नन्हे दीप का तेज नापते चलें
दीपावली पर कविता- सूर्य का तेज, सूर्य की रोशनी, सूर्य का वजूद, दुनिया जानती है। -
हिन्दी दिवस पर कविता : मैं हिन्दी केवल एक मां हूं तुम सबकी जां हूं ...
कश्मीर से कन्याकुमारी तक बंग से कच्छ तक गूंजने वाली ध्वनि हूं मैं लय हूं मैं . मैं हूं भाषा, मातृभाषा,राष्ट्र की ... -
पृथ्वी दिवस पर कविता : सोचो ज़रा
सोचो ज़रा अगर हम पेड़ होते जग को ठंडी छांह देते फल,पत्ते,लकड़ी भी कितने उपयोगी होते....!! नन्ही चिरैय्या अगर ... -
कैसे रोकें देश के 'बिगड़ते' युवा वर्ग को...
गणतंत्र पर तिरंगे को लहरा कर देशभक्ति का ढोंग करने से पहले एक बार हर व्यक्ति स्वयं सोचे ....मैं इस देश का कैसा नागरिक ... -
माखनलाल चतुर्वेदी : संक्षिप्त जीवनी
जन्मतिथि - 4 अप्रैल 1889 कार्यक्षेत्र - पत्रकारिता एवं साहित्य जन्म स्थान - बावई (होशंगाबाद) माता - सुंदरीबाई, ...
