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उज्जैन का प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर जहां राजा विक्रमादित्य ने 11 बार दी थी अपने सिर की बलि
देवीजी सम्राट विक्रमादित्य की आराध्या रही हैं। इस स्थान पर विक्रम ने अनेक वर्षपर्यंत तप किया है। -
23 मार्च को अमर शहीद कॉमरेड भगत सिंह की पुण्यतिथि : खुश रहो अहले वतन....
23 मार्च, 1931 को कॉमरेड सरदार भगतसिंह को फांसीघर में बुलवाया गया। उन्होंने फंदे को चूमा और खुद ही फांसी पर झूल गए। ... -
शहीद दिवस विशेष : जब भगतसिंह सगाई का नाम सुनकर घर से भाग खड़े हुए थे...
बचपन में जब भगतसिंह सगाई का नाम सुनकर घर से भाग खड़े हुए थे, तब मां विद्यावतीजी पर मानो वज्रपात हो गया, उनके सपनों पर ... -
भारतीय इतिहास की बड़ी घटना थी विक्रम संवत् 2000 का पूरा होना, विक्रम के पराक्रम का परचम लहरा उठा था
उज्जैन में विक्रम संवत् के अवसर पर गौरव यात्रा निकाली जाती है... इतिहास के गवाक्षों से झांक रहा है वह दिन जब विक्रम ... -
कालों के काल महाकाल देवता और राजा के साथ वैज्ञानिक सत्य और तथ्य भी हैं
'स्टैंडर्ड टाइम' के अर्थों में किसी प्रयुक्त होने वाले 'महाकाल' शब्द का प्रयोग वर्तमान युग में प्राप्त किसी ज्योतिष ... -
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतिम भाषण के अंश
Subhash Chandra Bose Jyanati 2023 : सुभाष बाबू की गणना हमारे इतिहास के सर्वाधिक सम्मानित व्यक्तियों में होती है। वे ... -
जब भगत सिंह ने कहा था, ‘मां, मेरे लिए तो संसार में चारों तरफ फूल-ही-फूल हैं’
उनकी पहली गिरफ्तारी भी लाहौर में दशहरा बम-कांड के सिलसिले में 23 अक्तूबर को ही हुई थी। फांसी से दो दिन पहले जब मां उनसे ... -
इतिहास के झरोखों से : विक्रम संवत् 2000 पूरे होने पर विक्रम नगरी उज्जयिनी झूम उठी थी
विक्रम संवत् 2079 आरंभ हो रहा है। अब जबकि उज्जैन में इस अवसर पर गौरव यात्रा निकाली जा रही है इतिहास के गवाक्षों से झांक ... -
What is Love: जीवन के हर मोड़ पर साथ निभाता है प्यार
प्यार का एक और रूप जो अजीब है अनबूझ पहेली की तरह है। इसे आज तक कोई समझ नहीं पाया है। यह पता नहीं किस तरह दो अजनबी को ... -
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतिम भाषण के अंश : जरूर पढ़ें
सुभाष बाबू की गणना हमारे इतिहास के सर्वाधिक सम्मानित व्यक्तियों में होती है। वे कांग्रेस के भी अध्यक्ष रहे थे और ... -
भगत सिंह दिवस पर पढ़ें मार्मिक प्रसंग : भगतसिंह और 'भाग्य'!
आमतौर पर भगतसिंह के बारे में यह एक निर्भ्रांत तथ्य है कि वे एक घोषित नास्तिक थे, फिर भला 'भाग्य' से उनका क्या वास्ता हो ... -
स्मृति शेष : भीतर से छोटे बच्चे की तरह थे नामवर सिंह जी
नामवर सिंह जी का जाना हिन्दी की आलोचना परम्परा के बहुत बड़े स्तम्भ का ढह जाना है। -
मदिरापान करती हैं काल भैरव प्रतिमा लेकिन कैसे यह कोई नहीं जानता...
शिप्रा के उत्तर तट पर 'कालभैरव' का सुविशाल मंदिर है। मंदिर के पास नीचे शिप्रा नदी का घाट बहुत बड़ा और सुंदर पुख्ता बना ... -
क्रांतिकारी, कर्मयोगी और कलाप्रेमी हैं श्रीकृष्ण, हर रूप में करते हैं आकृष्ट
उसने जो किया खुलकर किया, जमकर किया,लगकर किया। कृष्ण पूर्णपुरूष हैं, मर्द हैं-नायक हैं, योगी भी,भोगी भी। जो करते हैं ... -
अटल थे, अटल हैं, अटल रहेंगे : अविस्मरणीय संस्मरण
मैं अटल तो हूं पर 'बिहारी' नहीं हूं। तब लोगों ने इसे अजीब ढंग से लिया था। लोगों को लगा कि वे 'बिहार' का अपमान कर रहे ... -
कई रहस्य बयां करती है राजा भर्तृहरि की गुफा
श्री भर्तृहरि की गुफा बड़ा शांत और रम्य स्थल है। समाधि स्थल के पश्चात अंदर जाकर एक संकुचित द्वार से जीने के द्वार गुहा ... -
श्री हरसिद्धि देवी : जहां 11 बार शीश काट कर चढ़ाए थे राजा विक्रम ने
शिवपुराण के अनुसार यहां हरसिद्धि देवी की प्रतिमा नहीं है। सती के शरीर का अंश अर्थात हाथ की कोहनी मात्र है, जो शिवजी ... -
क्या गृह-कलह से परेशान थे श्रीकृष्ण-बलराम भी.....
बलराम श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ बंधु थे, और सहपाठी भी थे। यज्ञोपवीत हो जाने के पश्चात् श्रीकृष्ण और बलराम दोनों ही उज्जैन ...
