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कविता : कोयल रानी
कुहू-कुहू कर मीठे स्वर में, हमें बुलाती कोयल रानी। अमराई में तान सुरीली, उसकी लगती बड़ी सुहानी -
कविता : निंदिया रानी आ जा री
ओ मेरी निंदिया रानी, चुपके से तू आ जा री। मीठे सपनों में खो जाऊं, -
कविता : उड़नखटोला पाते जी
बढ़िया सा एक उड़नखटोला,काश! कहीं से पाते जी।अपने भैया अजय-विजय संग, -
बाल कविता : नभ के तारे
नभ में देखो प्यारे-प्यारे, चम-चम चमक रहे हैं तारे।अठखेलियां करते हैं हरदम, -
कविता : हमको आगे बढ़ना है
मंजिल को जब है पाना, खतरों से क्यों कर डरना। बाधाओं से टकराकर, हमको है आगे बढ़ना -
कविता : दिवाली है खुशी मनाएं
दीप जले हर गली-गली गुपचुप क्यों बैठे हो भाई नाचो-गाओ खुशियां बांटों दीवाली है घर आई । -
बाल कविता : चलो मंगल ग्रह में
हम भी भेज दिए हैं बच्चों मंगल ग्रह को यह संदेश सकल जहां से कम नहीं है अपना प्यारा भारत देश -
कविता : गांधी उसका नाम है
देश की संतान है भारत मां की शान है सत्य-अहिंसा हमें सिखाता गांधी उसका नाम है -
हिन्दी कविता : दहेजी दानव
दहेजी दानव ने बगराया भारी भष्टाचार जी इस दानव को मार भगाओ है जन-जन का भार जी -
बाल कविता : मेरा परिवार
मेरा छोटा सा परिवार , इससे हम करते हैं प्यार। मम्मी-पापा सोनू -भैया, करते मुझसे प्यार दुलार ।।1।। -
हिन्दी कविता : विजयादशमी...
विजय हुए थे रामजी, अतुलित राक्षसी शक्ति से। तब से मनाते हैं विजयादशमी, भारतवासी भक्ति से।।1।। -
बाल गीत : अजब सलोना गांव
अजब सलोना, सबसे प्यारा, गांव हमारा भाई। मस्त मगन हो पक्षी नभ में, उड़ रहे हैं भाई।। हरी घास है मखमल जैसी, चहुं दिशा में ...
