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मणिपुर घटना पर कविता : रहोगे तो तुम वहशी दरिंदे
चाहे तुम चांद पर पहुंच जाओ या छू लो सूरज चाहे कविताएं लिख लो या स्वयं को विद्वान कह लो रहोगे तो तुम वहशी दरिंदे -
क्षमा बिंदु की शादी : खुद से प्यार करने वाले बिरले ही होते हैं
परन्तु अभी तो बातें मुहब्बत की हों मुझे यकीन है क्षमा अपने साथ बढ़िया संबंध बना कर रहेगीं अपनी उम्मीदों पर खरी ... -
हिजाब मामला : बात इतनी बड़ी थी ही नहीं...
बात इतनी बड़ी थी ही नहीं जितनी बड़ी बना दी गई...आप कुछ भी पहनिए किसी ने कभी रोका है क्या ..बुरखा पहनिए, हिजाब पहनिए, ... -
हिन्दी कविता : प्रेम के बेल बूटे सजाया करूंगी...
तुम ने मुस्कुरा कर कहा इस घर और मुझ पर अब तुम्हारा पूर्ण अधिकार है मैं अपना सर्वस्व सदा के लिए तुम्हें सौंप रहा ... -
आज पुरखों की विदाई का दिन है..
पंद्रह दिन के आतिथ्य के पश्चात आज पुरखों की विदाई का दिन है.. कि वे इन पंद्रह दिनों हमारे संग रहे ये बात ही कितनी ... -
मन के चाचर चौक में : गुजरात में बगैर गरबे की नवरात्रि
गुजरात में बगैर गरबे की नवरात्रि न कभी देखी न सुनी..इस वर्ष माँ चाचर चौक में नही पधारी..शहर सूना.. गरबा ग्राउंड ... -
कविता : अभी बहुत छोटी हूं मां
मैं अभी बहुत छोटी हूं मां अभी से न अस्तित्व पे चुनरी ओढ़ाओ अभी उड़ने दो मुक्त खोलो ये केश -
बुद्ध को दो शब्द : सुनो सिद्धार्थ
सुनो सिद्धार्थ... धरा साक्षी है, तुम्हारे जाने के बाद, मैं भी कुशा पर ही सोई, त्यागा हर ऐश्वर्य -
लोकप्रिय हिन्दी कविता : आ गए तुम
आ गए तुम द्वार खुला है अंदर आ जाओ.. पर तनिक ठहरो देहरी पर पड़े पायदान पर अपना अहंकार झाड़ आना.. -
हिन्दी कविता : सूर्य की प्रथम रश्मि
सूर्य की प्रथम रश्मि देर तक रही उनींदी बलपूर्वक जागी भरी अंगड़ाई अधमुंदे नैनों से सूर्य को देख लजाई नेह से ... -
हिन्दी कविता : जागी हूं तो
आज रात नींद से नैनों पर तिरने की और पलकों पर उतरने की बेवजह कोई गुहार नहीं ... जागी हूं तो पिछले पड़े हुए काम ...
