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फिर नया शुभ प्रभात करें : नई गज़ल
नज़रों से ही नहीं अधरों से भी कुछ तो बात करें कोरा है जीवन का कागज़ लफ्ज़ों की बरसात करें कहने को तो सारी दुनिया ... -
मां पर हिंदी में कविता : माँ आचमन है, माँ उपवन है...
सर्वश्रेष्ठ कृति माँ माँ अर्थ है रिश्तों का माँ नाम है भरोसे का माँ उपवन है माँ निर्वहन है माँ आचमन ... -
प्रेम की पाती प्रीतम के नाम
हर राज दिल का तुम्हें बताने को जी चाहता है हर इक सांस में तुम्हें बसाने को जी चाहता है यही है मेरे प्यार,नेह और ... -
प्रेम कविता : मिलूंगी तुम्हें वहीं प्रिये
मिलूंगी तुम्हें वहीं प्रिये तारों से जब आंचल सजाओगे सीपों से गहने जड़वाओगे प्रीत में तेरी राधा सी बनकर मन में जब ... -
संक्रांति पर कविता : पर्व ऐसा मनाए
आओ ऐसी पतंग उड़ाएं सरहद के सब भेद मिटाएं चाहत रहे न कोई बाकी उत्सव ऐसा आज मनाएं आओ ऐसी.................. -
आयशा, तुम मुश्किलों से नहीं,अपनों की बेवफाई से हारी हो...
तुमने यह कैसी कर दी नादानी, बैठकर नदिया के पास नहीं सीखा लहरों से निर्बाध बहना, कितने तुफान और भवंर सीने में छुपा कर बस ...
