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सात दिवस का एक सप्ताह : मजेदार कविता
आमतौर पर एक माह में 4 सप्ताह आते हैं...और एक सप्ताह में सात दिन होते हैं.... आइए पढ़ते हैं एक मजेदार कविता -
देशभक्ति पर कविता : बच्चे हम भारतमाता के...
बच्चे हम भारतमाता के सभी प्यार से रहते कभी न लड़ते हम आपस में और खेलते रहते ...। जात न माने पात न माने भाई हैं आपस में -
मजेदार बाल कविता : पशु पुकारते...
कुत्ता बोला भौं भौं भौं, गफलत में क्यों रहते? चौकन्ने तुम सदा रहो ...1 बिल्ली बोली म्याऊं-म्याऊं, भूख लगी है मुझको -
चटपटी-अटपटी मजेदार बाल पहेलियां
जल से जीवन मुझ में रहता मैं भी साथ-साथ बहती हूं जल ना रहता नदी तलहटी सांस रोक तपती रहती हूं ...1 पौधों, वृक्षों ... -
बाल कविता : लकड़ी का घोड़ा
लकड़ी का घोड़ा है मेरा देखो कैसा टप-टप चलता मेरी टांगों के अंदर से अपना मुंह ऊंचा कर चलता है ...1 हिन हिन हिन हिन ... -
बच्चों की कविता : होमवर्क
चला जा रहा था मैं गुमसुम कांधे लटकाए बस्ते को भारी मन से चिंतातुर हो उस दिन विद्यालय अपने को मैडम डांटेगी ना लाया ... -
चुलबुली चंचल कविता : चींटी और चिड़िया
एक कहानी बहुत पुरानी दादी कहती मुझको उसे सुनाता हूं मैं बच्चों अभी-अभी तुम सबको ...1 पानी इक दिन बहुत गिरा ... -
बच्चों की मजेदार कविता : दर्जी और हाथी
बहुत पुरानी एक कहानी हाथी बहुत बड़ा था जब चलता था कभी सड़क पर सूंड उठा बढ़ता था ...1 -
नटखट कविता : आओ! पकड़ा पाटी खेलें
रामू आओ! श्यामू आओ! टोनी आओ! गोनी आओ! निप्पू आओ! संजू आओ! चम्पू आओ! गुड्डू आओ! मिलकर पकड़ा पाटी खेलें आओ! ... -
बच्चों की रोचक कविता : जादुई गलीचा
जादुई एक गलीचा उतरा आसमान से छत पर प्रसून पहुंचा निकट उसी के जो खेल रहा था छत पर ...लिखा हुआ था उसके ऊपर आओ! बैठो! ... -
बाल कविता : मां! मुझसे कुछ बातें कर लो
मां! मुझसे कुछ बातें कर लो जब से आया विद्यालय से सब्जी काट रही हो तब से मेरे मन में क्या चलता है नहीं पूछती हो तुम ... -
चुलबुली कविता : पांच फुग्गे...
पुनीत पांचों फुग्गे लेकर उड़ा रहा था, उनको ऊपर, ऊपर, ऊपर गैस से भरे थे वे सब पांचों लगातार उड़ते वे ऊपर, ऊपर, ... -
नन्ही कविता : हरी-भरी है प्यारी दूब
हरी-भरी है प्यारी दूब सबके मन को भाती दूब आंखों को ठंडाई देती हमें निकट बुलाती दूब ...1पैरों नीचे जब यह आती बड़ी ... -
नन्ही कविता : बागड़
बागड़ खेत किनारे लगती, औ' फसलों की रक्षा करती। खेजड़ की डाली-डाली से, खेत-खेत को घेरे रखती ...1। पशु अंदर जाने ना ... -
बच्चों की लोरी : निंदिया आई अब तू सो जा
दिल के टुकड़े मेरे भानू निंदिया आई अब तू सो जा आंखें भारी और उबासी ने घेरा है अब तू सो जा ...दूध पिया है तूने जी ... -
नटखट कविता : ढोल ढमा ढम ढम बजता है
ढोली ढम ढम ढम करता है ढोल ढमा ढम ढम बजता है बीच-बीच में तड़तड़ तड़ तड़ फिर ढमा ढम ढम बजता है ढोली ढम ढम ढम करता ... -
चुलबुली कविता : चिड़ा-चिड़ी का जीवन
एक घोंसला उन्हें बनाना दौड़-दौड़ तिनकों को लाना चिड़ा-चिड़ी का काम पुराना फिर अंडे उसमें बैठाना .एक-एक कर अंदर ... -
मजेदार कविता : गणेशजी के वाहन हैं यह
सरपट-सरपट दौड़ लगाते चूहे निकले बिल के बाहर ..चूं चूं करते शोर मचाते दुम लहराते सटक सटककर .. -
रोचक बाल कविता : इमली का यह पेड़ पुराना
इमली का यह पेड़ पुराना दादाजी से बूढ़ा है छोटी-छोटी पत्ती वाला छाया गहरी करता है ...पकड़ झूमते पतली डंडी नहीं टूटती ... -
बच्चों की कविता : कु्त्ता भौं-भौं करता है
कु्त्ता भौं-भौं करता है पूछ उठाए वह फिरता है देख कभी दूसरा कुत्ता उस पर भी भौं-भौं करता है ...गली-गली में घूमा करता भूख ...
