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ऑपरेशन सिंदूर पर कविता : सिंदूर मिटाने वाले सुन
सिंदूर मिटाने वाले सुन, सिंदूर सदा जगमगाएगा, ऑपरेशन सिंदूर तुझे, समूल नष्ट कर जाएगा।। चूड़े की चमक, मेहंदी की महक, को ... -
हिन्दी कविता : पतंग हूं मैं..
प्यार और विश्वास से मांझा सूंता तो कटूंगी नहीं। रहूंगी हरदम, तुम्हारे साथ। क्योंकि उड़ जाऊं चाहे कितनी दूर गगन में ... -
प्रभु श्रीराम पर हिन्दी कविता : मेरे राम आए हैं आंगन में
बालरूप की छमछम छाप.., पैंजनियों की मीठी पदचाप..., मां के नैनों का बन उजास...मेरे राम आए हैं आंगन में..। करने नये युग का ... -
अटाला
लेखिका ज्योति जैन लघुकथा और कविताएं लिखती हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हर माध्यम में उनकी सरस प्रस्तुतियां आती रही हैं। ... -
मां पर कविता : बेटियों का मां होना
निश्चित ही मां बनने के लिए संतानोत्पत्ति अनिवार्य है....। लेकिन कुछ बेटियां .... जन्मजात ही... मां होती हैं..। ... -
इंदौर पर कविता : अपना इंदौर
Indore Poem : अहिल्या की विरासत, शिव को जल चढ़ाती, बाड़े को नमन् करने, रवि किरण अकुलाती, गैरों को शहर लगता, ये ठिया-ठौर ... -
तीन तलाक पर कविता : तीन तलाक गुनाह है...
आखिरकार किसी ने समझी.. मेरे मन की बात... कोई है जो समझ गया है.. नारी के जज़्बात... तीन तलाक की लटक रही थी... मेरे ... -
संजा : ग्राम्य सखियों का भोला प्रकृति लोकपर्व
लोक कला का ये पर्व संजा एक अलग ही सौंधी महक लिए आता था व सच्ची में बेटी की सी भावना लिए हम भावी माताओं का विदाई वाले ... -
महिला समानता दिवस :साहित्य व समाज में आज भी है लैंगिक भेदभाव
महिला समानता दिवस : साहित्य व समाज में लैंगिक भेदभाव इस विषय का तात्पर्य है कि लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ आज भी ... -
शादी का झांसा : दोनों पक्ष समझें आधुनिकता में मर्यादा की अहमियत...
आए दिन खबरें पढ़ने में आ रही हैं कि शादी का झांसा देकर युवती का शोषण किया गया। जेहन में एक प्रश्न बार-बार कौंध रहा था ... -
देश के लिए अगर आप ये काम करते हैं तो ही सच्चे देशभक्त हैं....
हममें से प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में, प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से देश की सेवा कर सकता है, यदि वह चाहे तो। ... -
अलविदा मन्नू दी : सुविख्यात लेखिका मन्नू भंडारी से एक पुरानी मुलाकात
संवेदनशील लेखन की दुनिया में लेखिका मन्नू भंडारी का नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। आज सूचना मिली है कि मन्नू ... -
साहित्यकार मन्नू भंडारी नहीं रहीं : जानिए उनके साहित्य सृजन में स्त्री विमर्श
स्त्री विमर्श का यह संपूर्ण साहित्य मन्नू जी का अंश बन चुका है, जिनके हृदय में साक्षात सरस्वती विद्यमान है। उन्हें याद ... -
हिन्दी दिवस पर लघुकथा : मातृभाषा या मात्र एक भाषा
मंच पर बड़े-बड़े अक्षरों में कार्यक्रम का विषय लिखा था अपनी मातृभाषा हिन्दी को कैसे बचाएं। उसका मन कह रहा था कि हिन्दी ... -
Happy Father's Day : क्यों मैं पिता कहलाता हूं..
मेरे पापा तुमने चलना मुझे सिखाया... हाथ आज पकड़ता हूं.... मेरी गूं..गां... समझी तुमने.... आज शब्द में देता ... -
आयशा अगले जन्म में मजबूत बेटी बनकर आना
परलोक यदि होता है..और तुम वहां हो ...तो सुनो...! अगले जन्म में भी बेटी बनकर आना..मजबूत बेटी...और अपनी अम्मी का आंचल ... -
एक पाती वृक्ष की : लघुकथा
आज के बूफे के दौर से कुछ वर्षों पीछे जाकर यदि सोच सकें तो सहभोज की पंगत याद कर लीजिए.....। -
Republic Day : क्या आप स्वयं को देशभक्त मानते हैं, तो पहले इसे पढ़ें
अगर आप भी खुद को देशभक्त मानते हैं तो पहले अपने दिल पर हाथ रखकर इन बातों को पढ़ें क्या आप ऐसा करते हैं? अगर हां, तो आप ... -
karva chauth short story : करवा चौथ व्रत की कामना
हेमेंद्र जी को बदहवास हालत में दोनों बच्चों को संभालते देख उनके घर से लौटी बेचैन सुवि सोच रही थी.. पत्नी के ना रहने से ... -
A short story about karva chauth : करवा चौथ पर लघुकथा सुहाग पर्व
ज़र्द पड़ चुके चेहरे के साथ सिर पर सुर्ख़ चुन्नी ओढ़ते हुए सिमरन ने राजीव से कहा...'सुनो..! पूजा की थाली जरा करीने से ...
