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अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर कविता : पर्वतराज हिमालय
वह अटल खड़ा है उत्तर में, शिखरों पर उसके, हिम किरीट। साक्षी, विनाश निर्माणों का, उसने सब देखी, हार-जीत। अंतरराष्ट्रीय ... -
हिन्दी कविता : चौबीस तीलियों वाला तिरंगा ध्वज
नील चक्र, चौबीस तीलियों वाला तिरंगा ध्वज, आगे बढ़ने की, बात करे मतवाला। बस बढ़े देश का मान, न हो कुछ बांका, हमको ... -
लाल बहादुर शास्त्री पर हिन्दी में कविता : सोया है लाल बहादुर अब
जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई। विश्वासी, धर्मनिष्ठ, ... -
लाल बहादुर शास्त्री पर हिन्दी कविता
लाल बहादुर शास्त्री पर कविता- जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई। -
Poems on Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी पर कविता
महात्मा गांधी पर कविता- भारत छोड़ो, भारत छोड़ो, हर ओर, यही स्वर उठता था। भारत के, कोने-कोने से, गांधी का नाम, उछलता था। -
हिन्दी कविता : लाल बहादुर शास्त्री
जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई। विश्वासी, धर्मनिष्ठ, कर्मठ, ... -
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर हिन्दी कविता...
भारतमाता, अंधियारे की, काली चादर में लिपटी थी। थी, पराधीनता की बेड़ी, उनके पैरों से, चिपटी थी। था हृदय दग्ध, धू-धू ... -
गांधी जयंती पर कविता : बापू का गुणगान...
जिसको पाकर मुक्त हुआ था, भारतमाता का उपवन। आओ आज सुनाएं तुमको, बापू का निर्मल जीवन।। अठ्ठारह सौ उनहत्तर में, अक्टूबर ... -
हिन्द के इतिहास का स्वर्णिम दिवस- 15 अगस्त
आज का दिन! हिन्द के इतिहास का सबसे सुनहरा दिवस प्यारा! आज का दिन! देश मेरा! जो धरा पर था प्रखर मार्तण्ड सा। पर ग्रसित ... -
भारत की गरिमा पर कविता : बच्चों! देश तुम्हारा..
नई शती है, खड़ी प्रगति के, द्वार यहां पर खोले। देख-देख, भारत की ताकत, सबकी हिम्मत डोले। पुनर्प्रतिस्थापन का देखें, समय ... -
तिरंगे झंडे पर कविता : लहर-लहर तुम लहरो...
हे ध्वजा! राष्ट्र की, नील-गगन पर फहरो, उन्मुक्त पवन में, लहर-लहर तुम लहरो। तेरा केशरिया रंग, वीर का बाना, सीखा है ... -
भारत देश पर कविता : तुझको मेरा नमन है...
हे जन्म-भूमि मेरी, तुझको मेरा नमन है। दुनिया से खूबसूरत, मेरा यही चमन है। सागर जिन्हें पखारें, तेरे युगल चरण हैं। -
मैं करूं वंदना भारत मां...
मैं करूं वंदना भारत मां... कल-कल झरने, शीतल जल के, वन-उपवन, फल से लदे हुए, है मलय गंध-युत, शीत पवन, श्यामल-श्यामल, धरती ...
