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बिटिया दिवस पर सुंदर कविता : बेटियां विश्वास हैं, सत्य का प्रकाश हैं
बेटियों के दिन नहीं युग होते हैं बेटियां सृष्टि नहीं दृष्टि होती हैं बेटियां विश्वास हैं आभास हैं साथ हैं तो ... -
दुर्गोत्सव पर कविता : आई हो मां जो इस दफा
मां आई हो जो इस दफा तो जाना नहीं, रुको देखो जरा गिरते हुए मानदंडों को, बिखरते मुक्त स्वप्नों को -
एक लंबी कहानी : उसका होना...
तापसी नाम था उसका,जैसी सुंदर सुशील थी वो वैसे ही उसके भाव विचार, उसको देखकर अनुमान लगाना कठिन था कि वो दो जवान बच्चों ... -
बेटियों के दिन नहीं युग होते हैं : बिटिया दिवस पर सुंदर कविता
बेटियों के दिन नहीं युग होते हैं बेटियां सृष्टि नहीं दृष्टि होती हैं बेटियां विश्वास हैं आभास हैं साथ हैं तो ... -
जन्माष्टमी पर कविता: हे धरणीधर हे कृष्ण न तरसाओ
आ जाओ कृष्ण...देखो अब बोल भी छूट चले, शब्दों को भी खोती हूं एक-एक प्रेम पुष्प को, भाव माल में पिरोती हूं -
poem on Kargil: मनकही
एक लौ उम्मीद की रौशन कर लो -
कविता : जब हम बादलों को न्योता देने गए थे
याद है पिछली छुट्टियों से भी पहले वाली छुट्टियों में हम जब बादलों को न्योता देने उनके घर गए थे.... -
हिंदी कविता : शिव संवाद
कर्म की व्याख्या क्या करूं जो करवाते हो वह कर्म तुम्हीं को समर्पित मेरे कर्म यदि मेरे नहीं तो फल भी नहीं ...
