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आमदनी अठन्नी, घोटाला रुपईय्या
बही-खातों में जब छोटे-छोटे घपले टाले जाते हैं, तो वो घोटाले बन जाते हैं। आशावादी भारतीय लोकतंत्र में घोटाला होना एक शुभ ... -
उफ़! ये तुम्हारी वायरल अदाएं
जो सज्जन इसे पढ़ सकते हैं, बहुत संभव है वो इसे समझ नहीं सकेंगे। यद्यपि पढ़ना शिक्षित होना दर्शाता है वरन, समझना समझदारी। ... -
जो दिखाई दे, वही सत्य है
उद्घाटन कार्यक्रम के पश्चात मंत्रीजी ने टीवी कैमरे की ओर जिस धृष्टता से देखा तभी लग गया था कि फीता तो कट गया अब नाक ... -
तेरा भारत, मेरे भारत से महान कैसे?
जब माताश्री के नारे ‘गरीबी हटाओ’ से गरीबी हट गई तब सुपुत्रश्री ने राजनीति में आते ही घोषणा कर दी - ‘मेरा भारत महान'। ... -
इस संक्रांति... तिल का ताड़
दिवाली पर प्रदूषण के निरंतर बढ़ते स्तर का स्वयं संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च माननीय ने पटाखों पर निषेधाज्ञा लागू कर दिवाली ... -
अगला चुनाव कब है?
जब से गुजरात व एक अन्य किसी प्रदेश के चुनावों के अपेक्षित परिणाम, अनपेक्षित रूप से घोषित हुए हैं, तब से जीवन सूना-सूना ... -
लो फिर से आ गया नया साल...
बधाइयों और शुभकामनाओं का जब ‘व्हाट्स एप’ पर यकायक तांता लग जाए और मोबाइल की घंटी अनवरत घनघनाने लगे तो नया साल आ ही गया ... -
'पहले आप'… 'पहले आप, मेरे बाप'
चौराहे जाम, मुख्य मार्ग जाम, देखते ही देखते जाम छलक गया गलियों में। पुलिसकर्मी नदारद, लाल बत्तियाँ गुल, व्यवस्था ... -
तोल, मोल के बोल
प्रत्येक बोले जाने वाले बोल का मोल होता है अत: उसका व्यय तोल-तोलकर ही करना उचित है। बोल सस्ते भी होते हैं और महंगे भी। ... -
पॉलिथीन में लिपटी मृतप्राय व्यवस्था
कुछ दिनों पूर्व एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जिसमें 22 सप्ताह के 2 अपरिपक्व भ्रूणों को जन्म के पश्चात असंवेदनशीलता से ... -
हु छु ओखी, हु छु चुनाव
आगामी सप्ताहांत गुजरात में समुद्र एवं पृथ्वी की विपरीत दिशाओं से दो दो तूफान आने वाले हैं। देखना होगा की कौन अधिक तबाही ... -
सर्पीली व्यवस्था के विषैले नाग
दिल्ली के भीतर ही एक दिल्ली और है। यहाँ सामान्य जन नहीं वरन असामान्य व्यवस्थाएँ रहती हैं। ‘अंग्रेज़ो के जमाने के’ ... -
मैं और मेरा स्थायी विपक्ष
मैं स्वयं को इस घर की राजनीति में सत्ता पक्ष का दर्जा देता हूँ। मजेदार बात यह है कि श्रीमतीजी की भी यही राय है स्वयं ... -
खाली-पीली ‘हॉर्न प्लीज़’
जब नीचे लिख ही दिया है कि ‘जगह मिलने पर साइड दी जाएगी’ तो ‘हॉर्न प्लीज’ लिखने की क्या जरूरत है? और जब हॉर्न प्लीज लिखा ... -
ट्विटर की जमात और राष्ट्रद्रोह का बवाल
'भक्त' सौ सुनार की और एक लोहार की साबित हुआ है जबकि 'राष्ट्रद्रोह' दहले पर नहला ही रह गया। मैं बताता हूं कैसे- भक्त, एक ... -
इस जवाब के कई सवाल हैं...
कक्षा नौवीं की गणित में प्रमेय सिद्ध करना सिखाते हैं। जो लोग शौकिया तौर पर हिन्दी पढ़ते हैं, उनके लिए बता दूं कि प्रमेय ... -
चौराहों पर लगी हैं औचित्यहीन लाल बत्तियां
चौराहों पर लगी ये लाल बत्तियां सिगरेट के डब्बे पर लिखी हुई वैधानिक चेतावनियों से अधिक कुछ भी नहीं। ऐसा प्राय: उन ... -
है ना दीदी, हां दीदी के बंधन तोड़ती हमारी सुलु
सुलु हमारे चारों ओर है। हर घर में है। सरल और सुलझी हुई 'तुम्हारी सुलु' में कोई नायक या नायिका नहीं है, ना ही कोई ... -
सम-विषम अर्थात जलाओ पराली बुझाओ दिवाली
विषम परिस्थितियों में ताबड़तोड़ थोपे गए निरर्थक समाधान को ही ‘सम-विषम’ कहा जाता है। दिल्लीवाले आम आदमी इसे ऑड़-ईवन, ...
