-
फादर्स डे पर कविता : सागर-सा पिता
आसान नहीं है बनना सागर, सागर बनने के लिए चाहिए, विशालता, गहराई और सबको आत्मसात करने का गुण। -
पितृ दिवस पर कविता : जीवन में जरूरी है नदी की मिठास
माना कि मौन रहकर सागर समाहित कर लेता है स्वयं में उसकी ओर आने वाली हर नदी को पर नदियों ने समझा है कभी दर्द सागर का? -
लघुकथा - मेरा घर ?
मेरा घर है ये ! ...नहीं बाबा नहीं, कोई घर नहीं है मेरा ! जब तक मेरी शादी नहीं हुई थी, तब तक भी यह कहने को ही मेरा घर ... -
लघुकथा : जगमगा उठे खुशियों के दीप
दीपावली का पर्व ज्यों-ज्यों पास आ रहा था, शोभा के चेहरे की आभा अपनी कांति खोती जा रही थी जिसे वह चाहकर भी छुपा नहीं ... -
लघु कहानी : नवरात्रि और अंधविश्वास
'नवरात्रि पर्व' के चलते ग्रामीण अंचल के कुछ व्यक्तियों से रमेश की मुलाकात हुई। वे 'कहीं' सलाह लेने आए थे। मुखिया थे ... -
नई कविता : सागर-सा है पिता
जितनी जरूरी है जीवन में हमारे नदी की मिठास उतना ही जरूरी है समुद्र-सा खारापन भी। -
कहीं आपका स्वभाव भी तनाव लेने का तो नहीं है.. इसे पढ़ें
तनाव वास्तव में एक स्वभावगत समस्या है जो हमारे आत्मबल की कमी से उत्तपन होता है और फिर धीरे धीरे अवसाद की ओर ले जाता है। ... -
लघु कहानी : आत्मबल
घर के कामकाज से निपटकर सुनीता थोड़ा आराम करने के लिए लेटी ही थी कि तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी। सुनीता ने फोन उठाकर देखा ... -
लघु कहानी : पिता का विश्वास
अपने पिता का अंतिम संस्कार कर लौट रहे सिद्धार्थ की आंखों से अविरल धारा बह रही थी। वह अपने साथ वापस हो रही भीड़ के ... -
खर्चीले विवाहों का क्या औचित्य ?
वर्तमान में मुझे विवाह की परिभाषा बदलती हुई नजर आ रही है। अब विवाह का अर्थ वि + वाह! पर आधारित हो गया है अर्थात विवाह ... -
जरा हटके : पानी
हमेशा की तरह ही, त्रस्त हैं लोग, सूखते रिश्तों से, आंखों के घटते पानी से और गिरते भू जल स्तर से। -
लघुकथा : चुनौती
आज 12वीं बोर्ड का परिणाम घोषित होने वाला था। घड़ी का कांटा जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा था, रमेश का दिल भी उसी तेजी से धड़क रहा ... -
लघुकथा : दोहरी जिम्मेदारी
सत्तर की उम्र पार कर रहे रमेश और उनकी पत्नी राधा अपनी बहू रमा की तारीफ करते नहीं अघाते। जब भी कभी उनसे मिलने कोई ... -
नई कविता : जीवन के रंग...
रंग, जीवन में हम, कृत्रिम रंगों का तो, आंनद लेते हैं बहुत। हर रंग का अपना -अपना होता है... -
लघु कहानी : मौन व्रत
रमा के मौन व्रत का आज 7वां दिन था। उसने परिवार में सबसे बोलना बंद कर दिया था। दिनभर सबके काम करना और फिर चुपचाप अपने ... -
प्रेम दिवस पर नई कविता : आसान नहीं है प्रेम
आसान नहीं है प्रेम पर लिखना प्रेम को समझना उसे जीना या फिर परिभाषित कर -
लघुकथा : पहचान
संपन्न और शिक्षित परिवार में जब रमेश के यहां पहली पुत्री का जन्म हुआ तो पूरे कुटुम्ब में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा नहीं ... -
स्वास्थ्य के प्रति कितने जिम्मेदार हैं हम?
मानव जीवन की सबसे बड़ी और अनदेखी पूंजी यदि कोई है, तो वह है हमारा स्वास्थ्य। 'अनदेखी' इसलिए कहा, क्योंकि हम जब तक हम ... -
नई कविता : करुणा...
रोज देखता हूं, निश्चित समय पर, उस अर्द्धविक्षिप्त अधेड़ महिला को जो निकलती है, मेरे घर के सामने से, कटोरा लिए हाथ में। -
लघु कहानी : अपराध बोध...
रमा कई दिनों से अपने पति सुरेश को बेचैन देख रही थी। दिन तो कामकाज में कट जाता, पर रात को उसे करवटें बदलते रहने का कारण ...
