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हिन्दी कविता : सबेरा हुआ
उठो, सबेरा हुआ चांद छुप गया रंग बदल गया भानु दस्तक देने लगा दरवाजे पर चिड़ियों की चहचाहट -
कविता : झकझोरकर मुझे हवा ने
झकझोरकर मुझे हवा ने अलौकिक खेल दिखाया उतार कमीज पल में -
हिन्दी कविता : फागुन मदमस्त
हुड़दंग गलियों में उड़ रहे गुलाल रंग हरे, पीले, लाल ओ री सखी फागुन मदमस्त। आंखें मलते भर-भर लोटा रंग उड़ाते हो रहे ...
