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गणतंत्र दिवस पर पढ़ें देशभक्ति की कविता: सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा
gantantra diwas 2025: इस वर्ष हम 26 जनवरी को 76वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। आइए यहां पढ़ें देशभक्ति से भरपूर प्रेरक ... -
बाल कविता : प्रात:काल
सूरज प्रात: उदित है होता, करने रोशनी का उजियारा। किरणें देती हैं हमें प्रेरणा, दूर हो जाता है आलस सारा। सुंदर पुष्प सर ... -
बाल कविता : जय हनुमान बजरंग बली
जय हनुमान बजरंग बली अंजनी के लाल पवन सुत नाम तुम्हारा। जय महावीर हे महाबली -
बाल गीत : जय हनुमान बजरंग बली
जय हनुमान बजरंग बली, अंजनी के लाल पवन सुत नाम तुम्हारा। जय महावीर हे महाबली। रामभक्ति ही मुख्य काम तुम्हारा। बुद्धि, ... -
गुरु पूर्णिमा पर कविता : गुरु का सदा आदर करो...
हर प्रकार से नादान थे तुम, गीली मिट्टी के समान थे तुम। आकार देकर तुम्हें घड़ा बना दिया, अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। ... -
गुरु पूर्णिमा पर कविता : गुरु का सदा आदर करो
गुरु बिना ज्ञान कहां, उसके ज्ञान का आदि न अंत यहां। गुरु ने दी शिक्षा जहां, उठी शिष्टाचार की मूरत वहां। -
गुरु पूर्णिमा पर कविता : गुरु का करो सदा आदर
हर प्रकार से नादान थे तुम, गीली मिट्टी के समान थे तुम। आकार देकर तुम्हें घड़ा बना दिया, अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। -
चटपटी कविता : सब्र...
एक दिन में सागर निर्माण नहीं होता, बूंद-बूंद करके ही नदी बनती है। समय सदा गतिशील है, पल-पल करके ही एक सदी बनती है। -
प्रेरक कविता : निराश न होना...
एक चमकती किरण कई पुष्प खिला सकती है, क्षणभर की हिम्मत जीत का एहसास दिला सकती है। वे लोग जो असफलता से निराश हो अंधकार ... -
बाल साहित्य : मेरे ईश्वर
प्रभु! लोभ, स्वार्थ का क्या तात्पर्य है? प्रभु बोले- 'इस पर मेरा यह उत्तर है, लोभ सारी विपत्तियों की जड़ है, स्वार्थ ... -
हिन्दी बाल साहित्य : सफलता
देख रास्ते खुले हुए हैं, तुम्हें अब बढ़ना बाकी है। रुके न तू, नहीं थके तू कभी, तेरा अंत तक लड़ना बाकी है। मंजिल तुमसे ... -
बाल साहित्य : मैं और प्रभु
प्रभु! मैं हूं दर्शनाभिलाषी आपका, मैंने ईश्वर से यह विनय किया। चाहता हूं मैं मार्गदर्शन आपका, तब प्रभु ने यह उत्तर ... -
बाल साहित्य : मैं चलता चला गया
राह की दिक्कतों को सहता चला गया, अपने सभी गम भुलाता चला गया। हरदम प्रभु का नाम ही कहता चला गया, मैं जिंदगी का गीत ... -
बाल कविता : पिता
जब-जब डिगे पैर तुम्हारे, हाथ पकड़कर दिया सहारा। पहुंचाने को तुम्हें किनारे, त्याग दिया निज जीवन सारा। खुद न खाकर ... -
कविता : हौसला अपना बुलंद कर लो...
अपने मनोबल को इतना सशक्त कर, कठिनाई भी आने से जाए डर। आत्मविश्वास रहे तेरा हमसफर, बड़े-बड़े कष्ट न डाल पाएं कोई ... -
बाल साहित्य : अच्छा जीवन
नित आईने में देख अपना चेहरा संवार लिया, कभी दिल के आईने में झांककर मन साफ बनाना है। अच्छे गुणों को ग्रहण करके दुनिया को ... -
बाल कविता : बचपन
जब कठिन ये रास्ता न था, इस संसार से वास्ता न था। तनावरहित जब यह मन था, कितना अनमोल बचपन था। वो पल कितने मासूम, वो ... -
प्रेरक रचनाएं : भारत मेरा देश
भारत मेरा देश जहां ज्ञान का अथाह भंडार है, लोगों में सतगुणों का अंबार है। प्रकृति की कृपा जहां अपार है, वो मेरा भारत ...
