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यात्रा संस्मरण : गंगा कहे पुकार के (हर की पौड़ी)
पति की पोस्टिंग देहरादून हो गई थी दूसरी बार। देहरादून की वादियां तो सम्मोहित कर ही रही थीं। रह-रहकर गंगा की लहरें भी ... -
यात्रा वृत्तांत : उदयपुर का वैभवशाली, शौर्य से भरा इतिहास
म्हारा राजस्थान। नाम सुनते ही अभूतपूर्व, वैभवशाली इतिहास के कई सुनहरे पन्नों से स्वत: ही साक्षात्कार होता है। साकार हो ... -
रूस को यूक्रेन की चुनौती उसकी देशभक्ति और असीम मनोबल की कहानी बयां करती है
अगर ताकत और कद की बात करे तो दोनों राष्टों के बीच कोई मेल नहीं और यह समझा भी जा रहा था कि रुस यूक्रेन को चींटी की तरह ... -
पुस्तक समीक्षा : अद्धभुत प्रेम गाथा का बेहतरीन उपन्यास 'रेवा में बहते मयूर पंख'
हतरीन लेखिका निधि जैन की 'रेवा में बहते मयूर पंख' सशक्त हस्ताक्षर है अद्धभुत प्रेम गाथा का। यह कहानी है कल-कल बहती रेवा ... -
सत्ता पर महिलाओं की सहभागिता
क्या सत्ता में महिलाओं की सहभागिता की वही स्थिति हैं जो बीस साल पहले हुआ करती थी? इस प्रश्न पर अक्सर आंकड़ों के आकलन ... -
लघुकथा : मंथन
कृति ने खाने का डिब्बा खोला ही था कि मोबॉइल घनघना उठा। स्क्रीन में जो नाम चमका उसे देख कृति का मन कसैला हो उठा। मन ... -
करवा चौथ संस्मरण : जब सताया चंद्रमा ने
बात उन दिनों की हैं जब मेरे पतिदेव की पोस्टिंग देहरादून में थी। अक्सर होता कि करवा चौथ वाले दिन आसमान बादलों से ढंका ... -
लघुकथा : अश्क भिगोते रहे
बिटिया, दामादजी कार लाए हैं क्या? पापा की आंखों में मुझे देख आशा के जो दीये जल उठते थे, उसे देख मुझे खौफ होता था। -
नई कहानी : सुनयना
सुनयना और देवांश बचपन के साथी थे। हर बात के साथी। खेलना-खाना, रूठना-मनाना, मान-मनुहार सबका साथ। बचपन का खिलंदड़ापन कब ... -
मिजोरम की लोककथा : वे आज भी चूहे के अहसानमंद हैं
पुराने जमाने मे मिजो जनजातियां भोजन के लिए मक्का, ज्वार-बाजरा, फल-फूल, साग-सब्जियों एवं विभिन्न पशु-पक्षियों के मांस का ... -
फ्रेंडशिप डे पर कहानी : दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे
दीपा क्लास के दरवाजे पर इस तरह खडी हो गई कि अवनि क्लास के अंदर नहीं आ पाए, जानबूझकर दीपा ऐसे काम करती जिससे अवनि को ... -
रक्षाबंधन पर कहानी : वैभव का पत्र
आज वैभव का पत्र आया था। भाई के पत्र का कितने दिनों का इंतजार आज खत्म हुआ। पर आज जब पत्र उसके हाथ में है, अंजली उसे ... -
संस्मरण : बारिश का वो दिन...
बात उन दिनों की है जब मेरे पापा, ऑडिनेंस फैक्ट्री, कानपुर में कार्यरत थे। फैक्ट्री के ही कैंपस में हमें बड़ा-सा घर मिल ... -
हिन्दी कविता : तुम बदल गई हो
सब कहते हैं - तुम बदल गई हो, मैं तो वही हूं दबी, सहमी, सकुचाई सी -
प्रेरक कहानी : गोपी और मास्टर जी
गोपी अपने मां-बापू और चार बहनों के साथ गांव के एक छोटे से झोपड़े में रहता था। झोपड़ी की छत धान के सूखे पुए से बनी थी, ... -
एक प्रयास जिंदगी का...
मेरे ख्याल से साहस का कोई काम केवल शारीरिक क्षमता से ही ताल्लुक नहीं रखता, बल्कि मानसिक शक्ति से किसी को उज्जवल भविष्य ... -
अब मैं कभी चाबी नहीं भूलता.....
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ कि झमझम बरसते मौसम में आप 20-25 किलोमीटर तय कर अपने घर आए हो और पता चले कि घर की चाबी तो ... -
यात्रा संस्मरण : सफर..
हम लोग लखनऊ से देहरादून वापस जा रहे थे। परिस्थिति कुछ ऐसी बनी कि मेरे और पतिदेव के कोच अलग-अलग हो गए। पति का कोच आगे और ... -
प्रेमी प्रेमिका की नोंकझोंक : ओवर लोडिंग
छोटा सा तो दिल है मेरा, उस पर भी तुम आ बसे, ओवर लोडिंग हो गई जनाब, या तुम बसो या हम -
वसंत पंचमी : वसंत का आगमन काल
माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी से ऋतुओं के राजा वसंत का आंरभ हो जाता है अत: इसे ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रथम दिन माना ...
