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आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया!
आभासी दुनिया ने हमारे देखने सुनने और प्रतिक्रिया करने के तौर तरीकों को बहुत ही गहरे से बदल दिया है। हम में से कई लोगों ... -
भूतपूर्व होना या अभूतपूर्व बने रहना!
भूतपूर्व होना यानी आकस्मिक रूप से या पदावधि समापन से जीवन में आई बीती यादों या बातों को अपने शेष बचे जीवन का अभिन्न अंग ... -
जीवन एक उत्सव है, तो वन महोत्सव है!
वन और जीवन हमारी धरती का कभी न खत्म होने वाला या अंतहीन प्राकृतिक गति विधियों का जीवंत सिलसिला है। यदि धरती पर हम जीवन ... -
सृष्टि का आनंद बनाम आनंद की सृष्टि!
सृष्टि मूलतः विराट नैसर्गिक ऊर्जा के अनन्त अद्भुत आनंद की प्रत्यक्ष अनुभूति हैं। आनंद का विस्तार सूक्ष्म रूप से समूची ... -
मानवीय सवालों की सुनामी में बढ़ती समाधान शून्यता!
बहुआयामी लोकतांत्रिक व्यवस्था हो या सैनिक शासन सहित चाहे राजशाही भी क्यों न हो किसी भी तरह की शासन व्यवस्था नित नये ... -
गांधी महज सिद्धांत नहीं, सरल व्यवहार है
गांधीजी को बचपन में अंधेरे से भय लगता था। उस उम्र में प्राय: सभी के मन में अंधेरे का भय होता है। पर गांधीजी ने सबके मन ... -
तीस जनवरी, हे राम, साकार गांधी निराकार गांधी!
बिड़ला भवन दिल्ली में तीस जनवरी 1948 की शाम संध्याकालीन प्रार्थना पर निकले साकार गांधी अपने अंतिम शब्द 'हे राम' के साथ ... -
स्त्री और पुरुष दोनों ही संपूर्ण मनुष्य हैं!
Man and woman are complete human beings: जीवन के प्रारंभ से ही स्त्री-पुरुष साथ साथ रहते आए हैं। मानव इतिहास के सारे ... -
भूतपूर्व सवाल और भूतपूर्व जवाब!
Why questions are necessary: मनुष्य और दिमाग की जुगलबंदी सवाल और जवाब के बगैर नहीं हो सकती। यदि मनुष्य के मस्तिष्क में ... -
विचार बीज है और प्रचार बीजों का अप्राकृतिक विस्तार!
विचार और प्रचार दोनों के बीच अंतर्संबंधों पर जब हम सोचते-विचारते हैं तो यह सूत्र मिलता है कि विचार ही प्रचार का ... -
भीड़ भरी दुनिया में अकेलेपन की भीड़!
8 अरब मनुष्यों की दुनिया को भीड़ भरी दुनिया की संज्ञा दी जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं मानी जाएगी। पर आज की भीड़ भरी ... -
कहानी, उपन्यास लिखना और पढ़ना धीरज की बात है!
Writing and reading stories: कहानी, उपन्यास लिखना और पढ़ना दोनों ही बातें हर किसी के बस में नहीं है। असीम धीरज चाहिए। ... -
प्रकृति प्रदत्त वाणी एवं मनुष्य कृत भाषा!
मनुष्यों को जन्म के साथ ही प्राकृतिक रूप से वाणी मिलती है। मनुष्येतर अन्य जीवों को भी वाणी तो किसी न किसी रूप में मिलती ... -
जीवन की ऊर्जा का मूल प्रवाह है आहार
किसी भी जीव को जीवन को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए नियमित आहार का जीव की जरूरत अनुसार निरन्तर मिलते रहना जीवन की अनिवार्य ... -
भारतीय लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही असमंजस में हैं!
Indian democracy: लोकतंत्र एक पक्षीय या एक दलीय नहीं हो सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की सामान्य न्यूनतम निरंतर ... -
आठ अरब मनुष्य यानी आठ अरब विचार शैली और स्वभाव!
मनुष्य को जन्म के साथ ही मनुष्य शरीर को आकार मिलता है।पर मनुष्य का आकार,आचार, विचार और स्वभाव अपने आप में मनुष्यता का ... -
लगातार गुस्सा या तनावपूर्ण मनःस्थिति को त्यागना काल धर्म है
Mental stress: गुस्सा या तनाव क्षणिक हो तो उसे लहरों की तरह मन में आई क्षणिक स्थिति ही मनोविज्ञान में मानी जाती है। ... -
क्षण और अनंत काल्पनिक गणना के दो बिन्दु है!
मनुष्य की अवधारणाएं गजब की है। अवधारणाओं का जन्म कल्पना करने की मानवीय क्षमता से हुआ है। मानवीय क्षमता के दो आयाम हैं। ... -
भारतीय आबादी में तरुणाई की बहुलता और भविष्य की दिशा
Young population in India: भारत सभ्यता, संस्कृति, पारिवारिकता और दर्शन के संदर्भ में बहुत प्राचीन समय से अपनी मौलिक समझ ... -
मौन, शब्द से व्यापक अभिव्यक्ति है!
मौन का विस्तार अनंत है या यह भी कहा जा सकता हैं कि मौन की व्यापकता सीमा से परे होकर मौन पूर्णत: असीम है। मौन ध्वनि ...
